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किसान आंदोलन: चलते-चलते पत्थर हुए पैर, तस्वीरें देखकर समझ पाएंगे दर्द

Mon, 12 Mar 2018 10:11 AM IST
बीबीसी हिंदी
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किसान आंदोलन - फोटो : PRASHANT NANAWARE
महाराष्ट्र में अपनी कई मांगों को लेकर नाराज किसानों का मार्च लगातार जारी है। 7 मार्च को नासिक से शुरू हुआ ये मार्च 12 तारीख को राज्य की राजधानी मुंबई पहुंचेगा।
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किसान आंदोलन - फोटो : PRASHANT NANAWARE
किसानों ने शनिवार को पहला पड़ाव भिवंडी में डाला था। अब यह मार्च मुंबई तक पहुंच गया है।
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किसान आंदोलन - फोटो : PRASHANT NANAWARE
किसानों ने एलान किया है कि वो 12 मार्च को मुंबई में राज्य की विधानसभा का घेराव करेंगे और अपनी आवाज राजनेताओं के कानों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे।

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किसान आंदोलन - फोटो : PRASHANT NANAWARE
किसानों की सरकार से कर्ज माफी से लेकर उचित समर्थन मूल्य और जमीन के मालिकाना हक जैसी कई और मांगें हैं। किसानों का कहना है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए और गरीब और मझौले किसानों का कर्ज माफ किया जाए।
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किसान आंदोलन - फोटो : PRASHANT NANAWARE
मराठवाड़ा इलाके में काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार संजीव उनहाले कहते हैं, "कर्ज माफी के संबंध में जो आंकड़े दिए गए हैं को बढ़ा-चढ़ा कर बताए गए हैं। जिला स्तर पर बैंक खस्ताहाल हैं और इस कारण कर्ज माफी का काम अधूरा रह गया है।'' संजीव उनहाले कहते हैं, "कर्ज माफी की प्रक्रिया इंटरनेट के जरिए हो रही है लेकिन डिजिटल साक्षरता किसानों को दी ही नहीं गई है, तो वो इसका लाभ कैसे ले पाएंगे? क्या उन्होंने इसके संबंध में आंकड़ों की पड़ताल की है?"
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किसान आंदोलन - फोटो : PRASHANT NANAWARE
किसानों की मांग है कि उन्हें स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों के अनुसार C2+50% यानी कॉस्ट ऑफ कल्टिवेशन (यानी खेती में होने वाले खर्चे) के साथ-साथ उसका पचास फीसदी और दाम समर्थन मूल्य के तौर पर मिलना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार निशिकांत भालेराव ने कहा, "किसानों की समस्या का समाधान करने के लिए उन्हें उचित समर्थन मूल्य दिया जाना चाहिए। सिर्फ न्यूनतम समर्थन मूल्य दे देना काफी नहीं। उन्हें मदद चाहिए, उनकी स्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ रही है। राज्य के आर्थिक सर्वे की बात करें तो बीते सालों में कृषि विकास दर कम हुई है।
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किसान आंदोलन - फोटो : PRASHANT NANAWARE
इस मार्च में हजारों की संख्या में आदिवासी हिस्सा ले रहे हैं। वास्तव में, मार्च में सबसे अधिक संख्या में आदिवासी ही शामिल हैं। कई आदिवासियों ने बताया, "कई बार वन अधिकारी हमारे खेत खोद देते हैं। वो जब चाहें तब ऐसा कर सकते हैं। हमें अपनी जमीन पर अपना हक चहिए। हमें हमेशा दूसरे की दया पर जीना पड़ता है।" बताया जा रहा है कि मार्च के पहले दिन करीब पच्चीस हजार किसानों ने इसमें हिस्सा लिया था। मुंबई पहुंचते-पहुंचते इनकी संख्या और बढ़ेगी। 
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