2019 के लोकसभा चुनाव का अंतिम महायुद्ध 19 मई 2019 को होना है। इस दिन मतदान के आखिरी चरण में 8 राज्यों की 59 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। इसमें उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश समेत कुल आठ राज्य शामिल हैं। सातवें और अंतिम चरण के मतदान के दिन देश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बॉलीवुड स्टार सनी देओल, अभिनेत्री किरण खेर और भोजपुरी अभिनेता रवि किशन समेत कई दिग्गजों की सियासी किस्मत का फैसला करेगी।
आगे देखें इस बार मैदान में कौन-कौन से दिग्गज उतर रहे हैं-
विज्ञापन
2 of 11
नरेंद्र मोदी-अजय राय
- फोटो : Amar Ujala
वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
उत्तर प्रदेश की वाराणसी लोकसभा सीट पर पूरा देश इसलिए नजर गड़ाए बैठा है, क्योंकि यहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं, जिन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में इसी सीट से प्रचंड बहुमत के साथ जीत हासिल की थी। इस बार उनका मुकाबला कांग्रेस के अजय राय से है। एक तरफ भाजपा यहां अपनी जीत पक्की मान कर चल रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस लक्ष्य साधने के लिए प्रियंका गांधी का सहारा ले रही है। इनके अलावा यहां से नरेंद्र मोदी के खिलाफ कई निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी पर्चा भरा है, जिनके कारण खेल बिगड़ने की उम्मीद है। इन सब के बावजूद यहां भाजपा की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। यहां ब्रह्मण, वैश्य और कुर्मी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
गोरखपुर, भाजपा और खासकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परंपरागत सीट है। कभी इस सीट पर भाजपा का एकछत्र राज था, लेकिन उपचुनाव में सपा और बसपा ने साथ मिल कर भाजपा के किले को भेद दिया था। इस बार भाजपा ने ब्राह्मण कार्ड चलते हुए भोजपुरी स्टार रवि किशन को मैदान में उतारा है, जबकि महागठबंधन ने पिछली बार जीत दिलाने वाले फॉर्मूले को दोहराते हुए निषाद समुदाय को ध्यान में रखा है, और रामभुआल निषाद को टिकट दिया है। इधर कांग्रेस ने भी ब्रह्मण प्रत्याशी मधूसूदन तिवारी को मैदान में उतारा है, जिसके कारण ब्राह्मणों का वोट भाजपा और कांग्रेस के बीच बंट सकता है। अगर वाकई ऐसा होता है तो भाजपा को होने वाले नुकसान की आड़ में महागठबंधन को फायदा मिल सकता है।
4 of 11
मिमि चक्रवर्ती-अनुपम हाजरा
- फोटो : Amar Ujala
जाधवपुर (पश्चिम बंगाल)
मतदान के दौरान पश्चिम बंगाल में होने वाली हिंसक घटनाओं के बीच दो सीटों पर होने वाली वोटिंग को लेकर लोगों में खासा जोश है। इनमें से एक है जाधवपुर लोकसभा सीट। यहां तृणमूल कांग्रेस मशहूर बांग्ला अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती को टिकट देकर उनके फैंस का समर्थन हासिल करने की कोशिश में है, तो भाजपा ने टीएमसी से बर्खास्त नेता अनुपम हाजरा को ही टीएमसी के सामने खड़ा कर दिया है। हालांकि पश्चिम बंगाल में पहले भी ममता बनर्जी को सितारों के सहारे जीत मिली है, इसलिए इस बार भी उन्हें जीत की उम्मीद है।
विज्ञापन
5 of 11
सायंतन बसु-नुसरत जहां
- फोटो : social Media
बशीरहाट (पश्चिम बंगाल)
बशीरहाट लोकसभा सीट पर भी तृणमूल कांग्रेस ने फिल्मी सितारे का सहारा लेते हुए लोकप्रिय अभिनेत्री नुसरत जहां को टिकट दिया है। उनका मुकाबला भाजपा के सायंतन बसु और कांग्रेस के काजी अब्दुर रहीम से है। चुनाव प्रचार के दौरान नुसरत को मिलने वाले जन समर्थन को देखते हुए टीएमसी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। बशीरहाट में मुस्लिम समुदाय के लोगों की आबादी अधिक है। करीब आधे वोटर मुस्लिम समुदाय से आते हैं। माना जा रहा है यहां से नुसरत जहां को चुनाव में उतारने के कारण तृणमूल कांग्रेस को इन वोटों का फायदा मिल सकता है। अगर ऐसा होता है तो भाजपा को यहां नुकसान झेलना पड़ सकता है। हालांकि लंबे समय तक यह सीट लेफ्ट के कब्जे में भी रह चुकी है।
विज्ञापन
6 of 11
सनी देओल-सुनील जाखड़
- फोटो : Amar Ujala
गुरदासपुर (पंजाब)
हाल ही में भाजपा में शामिल हुए बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल पंजाब के गुरदासपुर से चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। उनका मुकाबला करने के लिए कांग्रेस ने सुनील जाखड़ को खड़ा किया है। इस सीट पर लंबे समय से लागातार भाजपा का कब्जा रहा था, लेकिन 2017 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस के सुनील जाखड़ ने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी। गुरदासपुर पहले भी हाई प्रोफाइल सीटों की गिनती में रही है। यहां के लोग सेलिब्रिटीज को अपना समर्थन देने में आगे रहे हैं, इसलिए भाजपा फायदे में रह सकती है।
विज्ञापन
7 of 11
शत्रुघ्न सिन्हा-रविशंकर प्रसाद
- फोटो : Amar Ujala
पटना साहिब (बिहार)
बिहार की पटना साहिब लोकसभा सीट अपने भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के बागी हो जाने के बाद खूब सुर्खियों में रही। भाजपा नेता आरके सिन्हा के समर्थक चाहते थे कि यहां से उन्हें उतारा जाए, लेकिन पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद को टिकट दिया। इससे क्षेत्र की भाजपा इकाई में आंतरिक नाराजगी का माहौल है, जबकि नाराज शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा छोड़ कर कांग्रेस का दामन थामने के बाद इसी सीट से दोबारा ताल ठोक रहे हैं। जातीय समीकरण की मानें तो यहां कायस्थों के बाद यादव और राजपूत वोटरों का दबदबा है, और माना जाता है कि कायस्थ वोटरों का झुकाव भाजपा की तरफ है।
8 of 11
महाबली सिंह-उपेंद्र कुशवाहा
- फोटो : Amar Ujala
काराकाट (बिहार)
बिहार की काराकाट लोकसभा सीट नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की गिनती में आती है। 2014 के चुनावी रण में रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा, राजद प्रत्याशी कांति सिंह को हरा कर यहां से सांसद बने थे। इस बार यहां एनडीए ने महाबली सिंह को टिकट दिया है, और महागठबंधन की तरफ से उपेंद्र कुशवाहा दोबारा मैदान में हैं। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा करीब 18 फीसदी आबादी यादव जाति के मतदाताओं की है। इस बार एक तरफ महागठबंधन उपेंद्र कुशवाहा के सहारे कोयरी, यादव और मुसलमान वोटों पर निशाना लगा रहा है, वहीं महाबली सिंह सवर्ण और जदयू के अतिपिछड़े मतदाताओं के सहारे हैं। इन सब के बीच बसपा ने स्थानीय उम्मीदवार अनिल सिंह यादव को टिकट देकर मुकाबले को नया मोड़ दे दिया है।
9 of 11
किरण खेर-पवन बंसल
- फोटो : Amar Ujala
चंडीगढ़ (चंडीगढ़)
चंडीगढ़ लोकसभा सीट पर समय-समय पर कांग्रेस और भाजपा दोनों का ही प्रभाव रहा है। 2014 के चुनावों में किरण खेर ने भाजपा को यहां से जीत दिलाई थी। इस बार भाजपा ने दोबारा किरण खेर पर दांव लगाते हुए उन्हें टिकट दिया है। उनका मुकाबला कांग्रेस के पवन कुमार बंसल से होना है। 2014 में भी किरण खेर ने पवन बंसल को हरा कर 42.20 प्रतिशत मतों के साथ जीत हासिल की थी।
10 of 11
रामलाल ठाकुर-अुनराग ठाकोर
- फोटो : Amar Ujala
हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश)
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर लोकसभा सीट से भाजपा ने अपने निवर्तमान सांसद अुनराग ठाकोर को दोबारा टिकट दिया है। उनके सामने कांग्रेस के रामलाल ठाकुर मैदान में हैं। इस सीट पर अनुसूचित जाति की आबादी 22.63 फीसदी है। इसके अलावा राजपूत, मल्लाह और ब्राह्मण मतदाता भी काफी निर्णायक भूमिका में हैं।
मध्यप्रदेश की इंदौर लोकसभा सीट भाजपा नेता सुमित्रा महाजन की पारंपरिक सीट है। यहां भाजपा की जोरदार पकड़ साफ नजर आती है। इस सीट से लगातार आठ बार सांसद रह चुकीं सुमित्रा महाजन इस बार चुनाव नहीं लड़ रही हैं, जिसके बाद भाजपा ने शंकर लालवानी को टिकट दिया। उनका मुकाबला कांग्रेस उम्मीदवार पंकज संघवी से है। शंकर लालवानी का नाम भाजपा के सदाबहार नेताओं की सूची में आता है। वो इंदौर से विधानसभा पार्षद और विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वहीं पंकज संघवी की इंदौर में अच्छी पकड़ मानी जाती है। इस बार उनकी सर्वसुलभता और इंदौर के गुजराती समाज का मजबूत समर्थन ही उनकी शक्ति मानी जा रही है।