लोकसभा चुनाव की घोषणा होते ही देश भर में नेताओं ने अपनी सियासी सेहत को बेहतर रखने के लिए दल बदल कार्यक्रम शुरू कर दिया था। इस दौरान कई नेताओं की घर वापसी हुई तो कइयों ने दल बदल लिया। हालांकि नतीजों के बाद यह साफ हो गया कि ये जोड़-तोड़ का गणित किसके लिए फायदे का सौदा साबित हुआ और कौन हाथ मलता रह गया। आइए देखते हैं, दलबदलू नेताओं का आखिर क्या हुआ-
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शत्रुघ्न सिन्हा - राहुल गांधी
- फोटो : अमर उजाला
शत्रुघ्न सिन्हा
कभी भाजपा के टिकट पर लोकसभा सांसद रहे शत्रुघ्न सिन्हा ने इस बार टिकट कट जाने के कारण पार्टी से नाराज होकर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। वो कांग्रेस के टिकट पर पटना साहिब लोकसभा सीट से मैदान में तो उतर गए, मगर भाजपा के दिग्गज रवि शंकर प्रसाद ने उन्हें घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। रवि शंकर प्रसाद ने उन्हें करीब तीन लाख वोटों से हरा कर जीत हासिल की।
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सुजय विखे पाटिल
- फोटो : PTI
सुजय विखे पाटिल
महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे सुजय विखे पाटिल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस के उम्मीदवार संग्राम अरुणकाका जगताप को करीब तीन लाख वोटों से हरा कर जीत हासिल की।
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सौमित्र खान (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
सौमित्र खान
तृणमूल कांग्रेस को छोड़ भाजपा में शामिल हुए सौमित्र खान के लिए भी अपनी पुरानी पार्टी से नाता तोड़ना फायदेमंद रहा। उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार श्यामलाल को 78 हजार वोटों से हरा कर पश्चिम बंगाल की बिष्णुपुर लोकसभा सीट पर अपना झंडा फहराया।
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सावित्री बाई फुले
- फोटो : amar ujala
सावित्री बाई फुले
बहराइच लोकसभा सीट से भाजपा सांसद रहते हुए ही सावित्री बाई फुले ने भाजपा छोड़ कर कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया था। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें यहां से मैदान में उतारा, लेकिन सावित्री बाई को ऐसी हार का सामना करना पड़ा कि महज 34 हजार वोटों के साथ तीसरे नंबर पर चली गईं।
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कैशर जहां
- फोटो : Social Media
कैसर जहां
लोकसभा का टिकट कट जाने के कारण सीतापुर से बहुजन समाज पार्टी की पूर्व सांसद कैसर जहां कांग्रेस मेें शामिल हो गई थीं, लेकिन वहां की जनता को शायद यह फैसला पसंद नहीं आया। कैसर जहां इस बार सीतापुर से कांग्रेस उम्मीदवार थीं। उन्हें मात्र 96 हजार वोट मिल पाए और करारी हार का सामना करना पड़ा।
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कीर्ति आजाद
कीर्ति आजाद
कभी भाजपा के दिग्गज माने जाने वाले कीर्ति आजाद ने इसी साल फरवरी में कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। इसके बाद कांग्रेस ने तो उन्हें झारखंड की धनबाद लोकसभा सीट से मैदान में उतारा, लेकिन जनता ने नकार दिया। कीर्ति आजाद को चार लाख 86 हजार वोटों से भाजपा के पशुपतिनाथ सिंह ने मात दे दी।
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जय पांडा
- फोटो : ANI
जय पांडा
बैजयंत जय पांडा, नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल के जाने-माने और विश्वसनीय नेता थे। उन्हें मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का करीबी माना जाता था, लेकिन चुनाव से पहले उन्होंने बीजद छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया था। उन्होंने भाजपा के टिकट पर केंद्रपाड़ा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन कमल नहीं खिला पाए। बीजद प्रत्याशी अनुभव मोहंती ने उन्हें करीब एक लाख 52 हजार वोटों से हरा कर यह सीट बीजद के खाते में डाल दिया।
जया प्रदा
जया प्रदा पहले तो अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी में थीं, लेकिन बाद में उन्हें भी भाजपा फायदेमंद लगी। इस बार जया प्रदा भाजपा के टिकट पर उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट से अपनी पुरानी पार्टी सपा के प्रत्याशी आजम खान के खिलाफ चुनाव लड़ रही थीं। यहां आजम खान ने उन्हें एक लाख से भी ज्यादा वोटों से मात दी।