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अपने कार्यकाल के बाद दोबारा संसद नहीं लौट पाए हैं लोकसभा स्पीकर, 20 सालों का है रिकॉर्ड

Fri, 03 May 2019 08:09 AM IST
Prachi Priyam चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लोकसभा स्पीकर भी अपने कार्यकाल के बाद नहीं पहुंच पाए हैं संसद - फोटो : अमर उजाला
लोकसभा स्पीकर के पद को संसद भवन में सबसे उंचा और प्रतिष्ठित माना जाता है। वर्तमान में सुमित्रा महाजन लोकसभा की स्पीकर हैं। इस पद के बारे में यह एक दिलचस्प तथ्य है कि पिछले 20 सालों में एक बार भी लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी संभालने वाले नेता को दोबारा संसद में आने का मौका नहीं मिला है। कारण चाहे जो भी हों, लेकिन सच यही है।

आगे पढ़िए इस कड़ी में किन लोकसभा स्पीकरों के नाम शामिल हैं-
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सुमित्रा महाजन

सुमित्रा महाजन - 16 वीं लोकसभा स्पीकर

सुमित्रा महाजन पिछले 67 सालों में लोकसभा की दूसरी महिला स्पीकर हैं। मूलतः महाराष्ट्र से संबंध रखने वाली सुमित्रा महाजन भाजपा के टिकट पर लगातार पिछले आठ चुनावों में इंदौर लोकसभा सीट से जीत हासिल करती आई हैं। जून 2014 में उन्हें सर्वसम्मति के साथ अध्यक्ष पद के लिए चुना गया था, लेकिन 2019 लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा की तरफ से इंदौर से उन्हें टिकट देने के दौरान कई तरह की अड़चनें आ रही थीं। इस बीच उन्होंने खुद ही चुनाव नहीं लड़ने का एलान कर दिया।
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मीरा कुमार - फोटो : SELF

मीरा कुमार- 15वीं लोकसभा स्पीकर

कांग्रेस नेत्री मीरा कुमार देश की पहली महिला लोकसभा स्पीकर के साथ ही उस पद पर बैठने वाली पहली दलित महिला भी हैं। 2009 में वो बिहार के सासाराम से जीत कर लोकसभा पहुंची थीं। 2014 तक लोकसभा अध्यक्ष पद संभालने के बाद मीरा भाजपा के छेदी पासवान से चुनाव हार गई थीं। मीरा की छवि भी सुमित्रा महाजन की एक नर्म व्यवहार वाली नेता की है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा को सख्ती के साथ और कुशल अंदाज में चलाया था। इस बार मीरा दोबारा सासाराम लोकसभा सीट से ही मैदान में हैं और उन्हें अपनी जीत का भरोसा है।

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सोमनाथ चटर्जी

सोमनाथ चटर्जी- 14वीं लोकसभा के स्पीकर

सोमनाथ चटर्जी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता थे और साल 2004 में 14वीं लोकसभा के स्पीकर चुने गए थे। वे पश्चिम बंगाल के बोलपुर लोकसभा सीट से जीत कर संसद पहुंचे थे। इस दौरान केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। केंद्र के खिलाफ वामपंथी पार्टियों ने मोर्चा खोल दिया था। चटर्जी पर पार्टी का दबाव था कि वो अपने पद से इस्तीफा दे कर बतौर सांसद सरकार के खिलाफ अपना मत रखें। इसमें पार्टी का साथ नहीं देने के फैसले के कारण सोमनाथ चटर्जी को सीपीएम से निष्कासित कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने अपने राजनीतिक करियर पर विराम लगा दिया। उन्होंने आगे भी चुनाव नहीं लड़ने का फैसला ले लिया।

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मनोहर जोशी - फोटो : Social media

मनोहर जोशी- 13 वीं लोकसभा के स्पीकर

शिवसेना के मनोहर जोशी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। वे 1999 के आम चुनावों में जीत कर लोकसभा पहुंचे थे, लेकिन एक विमान दुर्घटना में अध्यक्ष जीएमसी बालयोगी के असामयिक निधन के बाद सर्वसम्मती से स्पीकर पद के लिए चुने गए। मजबूत राजनीतिक करियर और सियासी पकड़ के बावजूद 2004 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
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मीरा कुमार - फोटो : SELF

मीरा जीतीं, तो टूट जाएगा 20 सालों का रिकॉर्ड

इस तरह देखा जाए तो दो दशकों के यही होता आया है कि लोकसभा अध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद कोई नेता संसद नहीं पाए हैं। ऐसे में इस बार देखना दिलचस्प होगा कि क्या मीरा कुमार चुनाव जीतकर पिछले दो दशक का रिकॉर्ड तोड़ पाती हैं या नहीं।
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