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बिहार की इस सीट पर मंडल बनाम मंडल, 30 साल में पहली बार मैदान से गायब हुआ 'कमंडल'

Wed, 17 Apr 2019 07:58 AM IST
Nilesh Kumar चुनाव डेस्क, अमर उजाला
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भागलपुर में इस बार दिलचस्प होगी लड़ाई
लोकसभा चुनाव में बिहार की भागलपुर सीट पर मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल के शैलेश कुमार ऊर्फ बूलो मंडल तथा जदयू के अजय मंडल के बीच है। साल 2014 में भाजपा के शाहनवाज हुसैन मोदी लहर में भी यहां कमल नहीं खिला पाए थे, जिसका खामियाजा उन्हें इस बार टिकट कटने के रूप में भुगतना पड़ा।  इस तरह भागलपुर में लोकसभा चुनाव के दौरान ‘मंडल फैक्टर’ मुख्य हो गया है। 1989 के बाद यह पहली बार है, जब भारतीय जनता पार्टी सीधे तौर पर यहां उम्मीदवारी से बाहर है। 
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Bhagwat jha azad(File photo) - फोटो : Social Media
साल 1989 में जनता दल से चुनचुन प्रसाद यादव, जबकि कांग्रेस से भगवत झा आजाद चुनाव लड़े थे। 1989 तक भाजपा दौड़ से बाहर रही थी। साल 1991 में बिजॉय कुमार मित्रा भारतीय जनता पार्टी की ओर से चुनावी मैदान में उतरे और 11 फीसदी वोट पाकर तीसरे नंबर पर रहे। इस बार चुनचुन प्रसाद जनता दल से एक बार फिर विजयी हुए। 1996 में भी जीते चुनचुन ही, लेकिन प्रभाष चंद्र तिवारी भाजपा का वोट फीसदी(17%) बढ़ाने में कामयाब रहे थे और 1998 में उन्होंने आखिरकार जीत का स्वाद चखा। 1999 में प्रभाष सीपीएम के सुबोध सिंह से हार गए। साल 2004 में भाजपा की ओर से सुशील कुमार मोदी और 2009 में शाहनवाज हुसैन भागलपुर के सांसद बने। इस बार गठबंधन के समीकरण में तीर कमल पर भारी पड़ गया और सीट जदयू के खाते में चली गई। 
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Bulo Mandal, Shahanawaz hussain(File photo) - फोटो : Social Media
इस सीट का एक जमाने में प्रतिनिधित्व कर चुकीं कांग्रेस और भाजपा इस चुनाव में सहयोगी दल की भूमिका में हैं। हालांकि किसी भी गठबंधन की जीत में इन दोनों दलों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के सैयद शाहनवाज हुसैन करीब नौ हजार वोटों के अंतर से राजद के बुलो मंडल से हार गए थे। जदयू ने इस बार नाथनगर के अपने विधायक अजय मंडल को टिकट दिया है।

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Bulo Mandal(File Photo) - फोटो : Social Media
बुलो मंडल का कहना है कि केंद्र और राज्य की सरकारें जनविरोधी हैं। मोदी सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनाव में जनता से जो भी वादे किए थे, सब जुमले साबित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रत्येक वर्ष दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने, विदेशों से कालाधन वापस लाकर प्रत्येक परिवार के बैंक खाते में 15-15 लाख रुपए जमा कराने और महंगाई कम करने जैसे प्रमुख वादे पूरे नहीं किये गए। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीबों की बात करने वाले लालू यादव को षड्यंत्र के तहत जेल में बंद किया गया है।

वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता मंगल पांडे ने कहा कि राजग गठबंधन एक इकाई के रूप में काम कर रहा है, सभी एकजुट हैं और नरेन्द्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिये पूरी ताकत से काम कर रहे हैं।
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Bhagwat jha azad(File photo) - फोटो : Social Media
साल 1952 के लोकसभा चुनाव में भागलपुर सीट, पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र के तहत थी। 1975 में आपातकाल से पहले इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा था। इस सीट पर 1957, 1962, 1967 और 1971 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, लेकिन आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में समीकरण बदल गए। भारतीय लोकदल के उम्मीदवार डॉ. रामजी सिंह ने कांग्रेस के भागवत झा आजाद को हरा दिया था। आपातकाल के बाद कांग्रेस इस सीट पर सिर्फ दो बार जीत सकी। 1998 में हुए चुनाव में भागलपुर सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की। वर्ष 1999 में हुए आम चुनाव में भाजपा चुनाव हार गई। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री भागवत झा आजाद भागलपुर सीट से पांच बार सांसद चुने गए। 
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shahnawaz Hussain - फोटो : अमर उजाला
इस बार शाहनवाज हुसैन का टिकट कटने से न केवल पार्टी के कुछ कार्यकर्ता, बल्कि समर्थक भी नाराज चल रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस बार भी शाहनवाज को मौका दिया जाना चाहिए था।

भागलपुर को बिहार की सिल्क सिटी के रूप में जाना जाता है। इसमें छह विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें 16 प्रखंड और 1,515 गांव हैं। यहां कुल मतदाता 18 लाख 19 हजार 243 हैं जिनमें पुरूष मतदाताओं की संख्या नौ लाख 62 हजार352 और महिला मतदाताओं की संख्या आठ लाख 56 हजार 824 है।  
 
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पहले चरण का मतदान(File Photo) - फोटो : Amar Ujala
भागलपुर की समृद्ध संस्कृति और इतिहास
यहां का विक्रमशिला विश्वविद्यालय का प्राचीन काल में बड़ा ही महत्व रहा है। कभी विश्व के शीर्ष के विश्वविद्यालयों में इसकी गिनती रही है। भागलपुर को ‘चंपानगर’ और उससे पूर्व "चंपा" के नाम से जाना जाता था। यह शहर अंग प्रदेश की राजधानी भी थी । बौद्ध साहित्य के अनुसार पूर्व का चंपा एक बहुत ही खूबसूरत नगर था, जहां बुद्ध भी अपनी यात्रा के दौरान आए थे।

दूसरे चरण के तह भागलपुर में 18 अप्रैल को मतदान होने हैं। इसके साथ ही बांका, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज में भी इसी दिन मतदान होंगे। 
(इनपुट: भाषा से भी)
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