लोकसभा चुनाव 2019 अपना आधा सफर तय कर चुका है। कई दिग्गजों की किस्मत मतदाताओं ने ईवीएम में बंद कर दी है। देश की कई ऐसी सीटों पर अभी मतदान होना बाकी है, जिनपर देश के दिग्गज नेता चुनावी ताल ठोक रहे हैं। कोई अपनी पुरानी सीट से चुनाव लड़ रहा है, तो कोई पहली बार चुनावी मैदान में अपना भाग्य आजमा रहा है। देश की इन हाई प्रोफाइल सीटों पर टक्कर जबरदस्त है। वोटरों को साधने के लिए प्रत्याशियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अब नतीजे तय करेंगे कि इन हॉट सीटों के सुपरहिट मुकाबले में बाजी किसने मारी। देखिए किन-किन हॉट सीटों पर स्टार उम्मीदवारों के बीच है कांटे की टक्कर। (सभी ग्राफिक्स- रोहित झा)
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सोनिया गांधी -दिनेश प्रताप सिंह
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रायबरेली
कांग्रेस का अभेद्य किला कही जाने वाली रायबरेली लोकसभा सीट देश की हॉट सीटों में से एक है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी एक बार फिर से यहां से चुनावी मैदान में हैं। भाजपा ने सोनिया के सामने कांग्रेस के पूर्व नेता दिनेश प्रताप सिंह को उतारा है। जबकि सपा-बसपा ने यहां से अपने प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है। रायबरेली सीट पर मुकाबला दिलचस्प है। सोनिया गांधी यहां से 2004 से सांसद हैं।
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शत्रुघ्न सिन्हा-रविशंकर प्रसाद
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पटना साहिब
बिहार की पटना साहिब लोकसभा सीट शत्रुघ्न सिन्हा की वजह से चर्चित है। लेकिन इस बार शत्रुघ्न सिन्हा पटना साहिब से लोकसभा चुनाव भाजपा नहीं कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे हैं। उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा था। इस बार भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। यहां उन्हें चुनौती दे रहे हैं भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद। दो दिग्गज नेताओं की बीच पटना साहिब की हॉट सीट पर मुकाबला तगड़ा है।
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नरेंद्र मोदी-अजय राय
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वाराणसी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने की वजह से वाराणसी लोकसभा सीट देश की हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है। इस सीट से पीएम मोदी एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस ने पिछले चुनाव के प्रत्याशी अजय राय पर एक बार फिर से दांव खेला है। सपा-बसपा गठबंधन ने बीएसएफ से बर्खास्त सिपाही तेजबहादुर को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन उनके नामंकन पत्र में कुछ दास्तावेज शामिल नहीं होने के कारण उनका नामांकन रद्द हो गया। अब गठबंधन की और से शालिनी यादव चुनाव लड़ेंगी।
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मुलायम सिंह यादव- प्रेम सिंह शाक्य
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मैनपुरी
उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाती है। यहां से मुलायम सिंह यादव 2004 के लोकसभा चुनाव से लगातार जीतते आ रहे हैं। भाजपा ने मुलायम सिंह को चुनौती देने के लिए प्रेम सिंह शाक्य को मैनपुरी से मैदान में उतारा है। इस बार के चुनाव में मुलायम की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। मुलायम सिंह ने 2014 के चुनाव में यहां से जीत हासिल की थी, लेकिन बाद उन्होंने ये सीट छोड़ दी थी। इसके बाद हुए उपचुनाव में उनके पोते तेज प्रताप सिंह यहां से जीतकर संसद पहुंचे थे।
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मीसा भारती- रामकृपाल यादव
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पाटलिपुत्र
पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पर इस बार भी मुकाबला साख का है। इस सीट पर एक बार फिर से लड़ाई चाचा-भतीजी के बीच है। दोनों में इस सीट से जीत का सेहरा बांधने के लिए जबरदस्त टक्कर है। कभी लालू के करीबी रहे रामकृपाल यादव भाजपा से और लालू यादव की बेटी मीसा भारती महागठबंधन की प्रत्याशी के रुप में पाटलिपुत्र से चुनावी रण में आमने-सामने हैं। दोनों ही और से मजबूत उम्मीदवार के चुनावी मैदान में होने से मुकाबला दिलचस्प है। पिछले आम चुनाव में रामकृपाल ने मीसा को मात दी थी। लेकिन इस बार समीकरण बदले हैं। राजद को कांग्रेस के साथ-साथ वामदलों का भी समर्थन मिला है।
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दिग्विजय सिंह-साध्वी प्रज्ञा
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भोपाल
भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह और भाजपा की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा के चुनावी रण में उतरने से भोपाल की सियासत गरमा गई है। भोपाल सीट पर कांग्रेस साल 1984 के बाद जीत नहीं दर्ज कर पाई है। जबकि भाजपा के लिए भोपाल सीट गढ़ मानी जाती है। साध्वी प्रज्ञा को यहां से उतारकर भाजपा ने यहां से हिंदुत्व कार्ड का चला है। जो कांग्रेस के साफ्ट हिंदुत्व पर हाल के चुनावों में हावी रहा है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री छवि भाजपा और संघ के कट्टर विरोधी की है। दोनों प्रत्याशीयों के बीच मुकाबला कांटे का है। देखना होगा कि कांग्रेस का सुखा इस सीट पर समाप्त होगा या भगवा ओढ़े साध्वी प्रज्ञा भोपाल से जीतकर पहली बार संसद पहुंचेगी।
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राहुल गांधी-स्मृति इरानी
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अमेठी
उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट देश की हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है। अमेठी की चार और रायबरेली जिले की एक विधानसभा की सीटों को मिलाकर बनी अमेठी लोकसभा से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर से चुनावी मैदान में हैं। भाजपा ने दोबारा केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर दांव खेला है। इस सीट पर मुस्लिम और पिछड़े वर्ग के मतदाता निर्णायक साबित होते रहे हैं। यहा ं4 लाख के करीब मुस्लिम मतदाता हैं तो वहीं तकरीबन साढ़े तीन लाख पिछड़े जाति के वोटर हैं। 2014 के आम चुनाव में भी स्मृति ईरानी ने यहां से चुनाव लड़ा था, लेकिन वो करीब एक लाख वोटों से हार गई थीं।
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संजय सिंह-मेनका गांधी
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सुल्तानपुर
मोदी सरकार की केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की सीट इस बार उनके बेटे वरुण गांधी से बदल दी गई है। उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर लोकसभा सीट से मेनका गांधाी अब मैदान में हैं। इससे पहले वरुण गांधी यहां से जीतकर संसद पहुंचे थे। लेकिन वो इस बार मेनका की सीट पीलीभीत से चुनाव लड़ रहे हैं। मेनका गांधी के लिए सुल्तानपुर सीट आसान नहीं हैं। कांग्रेस ने उनके खिलाफ संजय सिंह को मैदान में उतारा हैं। इस सीट पर अनुसूचित जाति, जनजाति के अलावा ब्राह्मण, ठाकुर और ओबीसी के मतदाता की बड़ी आबादी है जो इस सीट पर हार जीत का फॉर्मूला तय करते हैं।
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हेमराज वर्मा-वरुण गांधी
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पीलीभीत
उत्तर प्रदेश की पीलीभीत लोकसभा सीट को अमेठी और रायबरेली के बाद गांधी परिवार का गढ़ माना जाता है। इस सीट से इस बार वरुण गांधी मैदान में हैं। 2014 में उनकी मां मेनका गांधी यहां से चुनाव जीती थीं। इस बार मां-बेटे की संसदीय सीट आपस में बदल दी गई है। इसकी वजह से वरुण यहां चुनावी मैदान में हैं और उनके सामने सपा ने हेमराज वर्मा को टिकट दिया है। मेनका गांधी की संसदीय सीट होेने की वजह से ये सीट सुर्खियों में रहती है। इस बार वरुण के यहां से लड़ने की वजह से इस सीट पर देश की नजरें टिकी हैं।
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Kanhaiya Kumar-Giriraj Singh
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बेगूसराय
लोकसभा चुनाव 2019 में देश की जो लोकसभा सीटें सुर्खियों में हैं उनमें से एक बिहार की बेगूसराय सीट भी है। बेगूसराय क्षेत्र से सीपीआई के पोस्टर बॉय कन्हैया कुमार और भाजपा के केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह चुनावी मैदान में हैं। दोनों ही प्रत्याशी भूमिहार जाति से आते हैं। राजद की ओर से यहां से चुनाव लड़ रहे तनवीर हसन बेगूसराय के दिग्गज नेता रहे हैं। बेगूसराय के 19 लाख वोटरों में से ऊंची जाति के भूमिहारों की संख्या लगभग 19 फीसदी है, वहीं, दूसरे नंबर पर 15 फीसदी मतदाता मुसलमान हैं। 12 फीसदी यादव और 7 फीसदी कुर्मी जाति के मतदाता हैं।
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पप्पू यादव-शरद यादव
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मधेपुरा
यादव वोटों की निर्णायक भूमिका वाली इस सीट पर सभी पार्टियों ने यादव जाति के उम्मीदवार को ही खड़ा किया है। लेकिन माना जा रहा है कि इस बार पप्पू यादव और महागठबंधन प्रत्याशी शरद यादव के बीच सीधी टक्कर है। 2014 में राजद के टिकट पर जीत कर सांसद बने थे। बाद में पप्पू यादव पार्टी से नाराजगी के कारण अपनी अलग जन अधिकार पार्टी बना ली और इस बार वो फिर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने शरद यादव हैं, जो पिछली बार जदयू के टिकट पर पप्पू से हार गए थे।
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अखिलेश यादव-दिनेश लाल यादव निरहुआ
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आजमगढ़
उत्तर प्रदेश की आजमगढ़ लोकसभा सीट सपा का गढ़ मानी जाती है। सपा के टिकट पर पिता की विरासत को संभालने के लिए वर्तमान सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव मैदान में हैं। भाजपा ने भोजपुरी गायक और अभिनेता दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को यहां से मैदान में उतारा है। जिससे लड़ाई दिलचस्प हो गई है। भाजपा प्रत्याशी दिनेश लाल यादव के रोड शो में उमड़ रही भीड़ दूसरे दलों की परेशानी बढ़ा रही है।
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प्रमोद कृष्णम-राजनाथ सिंह
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लखनऊ
उत्तर प्रदेश की लखनऊ लोकसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। हालांकी सपा ने शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा को टिकट देकर लड़ाई त्रिकोणीय करने की कोशिश की है। यहां से भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह को उतारा है, और उनका मुकाबला करने के लिए कांग्रेस के प्रमोद कृष्णम मैदान में खड़े हैं। मौजूदा सांसद गृहमंत्री राजनाथ सिंह हैं। पिछली बार उन्होंने कांग्रेस की प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी को 2 लाख 72 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।
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मुनमुन सेन-बाबूल सुप्रियो
आसनसोल
पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट इस चुनाव में खूब चर्चा में है। यहां से भाजपा के टिकट पर गायक बाबुल सुप्रियो और तृणमूल कांग्रेस की टिकट पर मुनमुन सेन चुनावी मैदान में हैं। इस सीट पर टीएमसी और भाजपा के बीच जबरदस्त टक्कर है। सुप्रियो यहां से सांसद हैं जबकf मुनमुन सेन बांकुरा से सांसद हैं। इन दो फिल्मी हस्तियों के बीच जोरदार भिड़ंत हैं।
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डिंपल यादव-सुब्रत पाठक
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कन्नौज
उत्तर प्रदेश की कन्नौज लोकसभा सीट समाजवादी पार्टी के लिए किसी किले से कम नहीं मानी जाती है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव यहां से सांसद हैं। डिंपल यादव ने 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी सुब्रत पाठक को करीबी अंतर से हराया था। कन्नौज लोकसभा सीट से डिंपल यादव फिर से चुनावी मैदान में हैं। इसबार वो सपा- बसपा और आरएलडी की संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर वहां से चुनाव लड़ रही हैं। जबकि भाजपा ने एक बार फिर से अपने पुराने प्रत्याशी सुब्रत पाठक पर दांव खेला है।
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भूदेव चौधरी-चिराग पासवान
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जमुई
बिहार की जमुई की लोकसभा सीट से एनडीए में शामिल लोजपा के उम्मीदवार और रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान रालोसपा के भूदेव चौधरी के सामने चुनावी ताल ठोक रहे हैं। चिराग जमुई के वर्तमान सासंद भी हैं। वो अपने क्षेत्र में किए विकास कार्यों के नाम पर वोट मांग रहे हैं। उनके सामने खड़े भूदेव पासी समाज से आते हैं। जातीय समीकरण के आधार पर भूदेव का पलड़ा इस बार भारी लगता दिख रहा है, लेकिन मोदी फैक्टर की वजह से चिराग भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
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प्रमोद सिंह-दुष्यत सिंह
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झालावाड़
राजस्थान के झालावाड़-बारां लोकसभा सीट का नाम लेते ही वसुंधरा राजे का चेहरा सामने आता है। इस बार फिर से राजे की जगह उनके बेटे और वर्तमान सांसद दुष्यंत सिंह यहां से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनावों में भी दुष्यंत ने यहां से जीत हासिल की थी। इस बार भाजपा ने दुष्यंत पर भरोसा जताते हुए उन्हें दोबारा टिकट दिया है। उनका मुकाबला भाजपा के बागी नेता और कांग्रेस के प्रत्याशी प्रमोद शर्मा से होगा। इस सीट की गिनती भाजपा के गढ़ के रूप में होती है।
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मानवेंद्र सिंह-कैलाश चौधरी
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बाड़मेर
राजस्थान की बाड़मेर लोकसभा सीट पर भाजपा के पूर्व नेता रहे व पूर्व विदेश मंत्री जसंवत सिंह की राजनीतिक पगड़ी दांव पर लगी हुई है। यहां से उनके बेटे मानवेंद्र सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने भाजपा ने पूर्व नेता कैलाश चौधरी को मैदान में उतारा है।बाड़मेर लोकसभा सीट पर करीब 17 लाख मतदाताओं में से 3.5 लाख जाट, 2.5 लाख राजपूत, 4 लाख एससी-एसटी, 3 लाख अल्पसंख्यक और शेष अन्य जातियों के मतदाता हैं।
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पंकज संघवी-शंकर लालवानी
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इंदौर
इंदौर से सुमित्रा महाजन के चुनाव लड़ने से इनकार करने के बाद भाजपा ने शंकर लालवानी को टिकट दिया है। उनके सामने कांग्रेस के पंकज संघवी खड़े हैं। शंकर लालवानी का नाम भाजपा के सदाबहार नेताओं की सूची में आता है। वो इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी पंकज संघवी की इंदौर में अच्छी पकड़ मानी जाती है। इंदौर के गुजराती समाज का भी मजबूत समर्थन उनके साथ माना जाता है। वैसे पंकज संघवी 1998 में भी ताई के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। तब ताई को 4 लाख 40 हज़ार 47 वोट मिले थे और पंकज संघवी को 3 लाख 90 हजार 195।
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लोकसभा चुनाव 2019- हॉट सीट जयपुर ग्रामीण
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जयपुर ग्रामीण
लोकसभा चुनाव 2019 की जंग के दौरान जिस एक सीट पर पूरे देश की नजर रहेगी वो है जयपुर ग्रामीण सीट। ये सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी।इसमें कुल आठ विधानसभा सीटें आती हैं जिनमें कोटपुतली, विराटनगर, शाहपुरा, फुलेरा, झोटवारा, जामवा रामगढ़ और बनसुर शामिल हैं। ये सीट अपने उम्मीदवारों की वजह से बेहद खास बन गई है। यहां से भाजपा उम्मीदवार हैं केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर जबकि कांग्रेस ने कृष्णा पुनिया को मैदान में उतारा है।
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अनंतनाग लोकसभा सीट
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अनंतनाग
इस सीट से इस बार पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती मैदान में हैं। उनका मुकाबला नेशनल कॉन्फ्रेंस के हसनैन मसूदी से होगा। वहीं कांग्रेस ने गुलाम अहमद मीर तो वहीं बीजेपी ने सोफी यूसुफ को खड़ा किया है।
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चंडीगढ़ लोकसभा सीट
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चंडीगढ़
चंडीगढ़ लोकसभा सीट से इस बार फिर भाजपा ने किरण खेर को उम्मीदवार बनाया है। उनके सामने होंगे कांग्रेस उम्मीदवार पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल। भाजपा ने लंबी माथापच्ची के बाद इस सीट पर दोबारा किरण खेर को टिकट दिया है। यहां कड़ा मुकाबला होने के आसार हैं।
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लोकसभा चुनाव 2019- गुना संसदीय सीट
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गुना लोकसभा सीट से इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया मैदान में हैं। लोकसभा के पिछले चार चुनावों से गुना लोकसभा सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया जीतकर संसद पहुंचते रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के जयभान सिंह को 1 लाख 20 हजार के वोटों के भारी अंतर से हराया था। इस सीट से सिंधिया परिवार से राजमाता विजयाराजे सिंधिया, माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया ही ज्यादातर जीतते आए हैं। उनके सामने भाजपा ने केपी यादव को उतारा है। गुना वर्षों से सिंधिया परिवार का गढ़ रहा है और इस सीट पर ज्योतिरादित्य का पलड़ा ही भारी माना जा रहा है।
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लोकसभा चुनाव 2019- गाजीपुर संसदीय सीट
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गाजीपुर
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से एक बार फिर केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा भाग्य आजमा रहे हैं। वर्ष 2014 में गाजीपुर सीट का चुनाव काफी दिलचस्प और चुनावी पंडितों को चौंकाने वाला रहा। भाजपा उम्मीदवार मनोज सिन्हा की जीत ने सभी को चौंकाया। हालांकि मनोज सिन्हा की जीत के मतों का अंतर काफी कम रहा। 2014 में उन्होंने सपा के शिवकन्या को हराया था। इस बार उनके सामने हैं बाहुबली अफजाल अंसारी।
भाजपा ने इस बार गोरखपुर से चौंकाने वाला उम्मीदवार उतारा। पार्टी ने यहां से फिल्म अभिनेता रविकिशन को टिकट दिया। इससे पहले वह कांग्रेस के टिकट पर जौनपुर से लड़ चुके हैं। गोरखपुर सीट यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की सीट रही है। इसलिए ये सीट भाजपा, सीएम योगी और रविकिशन तीनों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गई है। लोकसभा उपचुनाव में यहां भाजपा उम्मीदवार की करारी हार हुई थी। इस बार सपा-बसपा गठबंधन की ओर से रामभुआल निषाद मैदान में हैं। यहां कांटे की टक्कर होने के आसार दिख रहे हैं।
भाजपा ने इस सीट से सनी देओल को उतारकर सियासी पंडितों को भी चौंका दिया। भाजपा में शामिल होते ही उन्हें गुरदासपुर से टिकट भी दे दिया गया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सनी को मनाने के लिए कई बार उनसे मिले थे। सनी देओल इन दिनों जबरदस्त प्रचार और रोड शो कर रहे हैं जिनमें खूब भीड़ उमड़ रही है। इस सीट से विनोद खन्ना सांसद थे, उनके देहांत के बाद भाजपा ने सनी देओल पर दांव खेला है। उनके सामने हैं कांग्रेस के सुनील जाखड़ा जिन्होंने उपचुनाव में भाजपा से ये सीट छीन ली थी। यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के आसार दिख रहे हैं।
हजारीबाग सीट से इस बार भी केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा किस्मत आजमा रहे हैं। 2014 में यहां से जीते जयंत मोदी सरकार में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री बने। दूसरी ओर, उनके सामने कांग्रेस के गोपाल साहू और भाकपा के भुवनेश्वर प्रसाद मेहता मैदान में हैं। पिछले चुनाव में मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (एजेएसयू) के बीच त्रिकोणीय था। इस बार भाजपा और एजेएसयू के साथ आने से मुकाबला एनडीए बनाम कांग्रेस गठबंधन हो गया है। यहां 16 प्रत्याशी मैदान में हैं।
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लोकसभा चुनाव 2019- उत्तर मुंबई
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उत्तर मुंबई सीट पर कांग्रेस ने फिल्म अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर को चुनाव मैदान में उतारकर हर किसी को चौंकाया। वह कुछ दिन पहले ही कांग्रेस में शामिल हुई थीं। यहां उनका मुकाबला भाजपा के गोपाल शेट्टी से है। उर्मिला ने हाल में ही कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। मुंबई में कांग्रेस के पास एक भी सीट नहीं है, ऐसे में उसकी उम्मीद उर्मिला पर टिकी हुई है।
आरएसएस के गढ़ नागपुर में भाजपा की ओर से एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी। कांग्रेस की ओर से नाना पटोले मैदान में हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन की ओर से अब्दुल करीम मैदान में हैं तो वहीं बहुजन समाज पार्टी ने यहां से मोहम्मद जमाल को टिकट दिया है।
बिहार की सारण सीट हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है। यहां से भाजपा उम्मीदवार हैं राजीव प्रताप रूडी और उनके सामने है लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप यादव के ससुर राजद के चंद्रिका राय।