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पटना साहिब: शत्रुघ्न-रविशंकर की लड़ाई नहीं, लालू और मोदी की साख है कसौटी पर

Fri, 10 May 2019 04:25 PM IST
Abhishek Singh चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नरेंद्र मोदी-लालू यादव-रविशंकर प्रसाद-शत्रुघ्न सिन्हा - फोटो : Social Media
पटना साहिब लोकसभा सीट पर सिर्फ शत्रुघ्न सिन्हा और रविशंकर प्रसाद की लड़ाई नहीं है। कांग्रेस उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा और भाजपा के उम्मीदवार रविशंकर प्रसाद एक ही जाति से आते हैं, इसलिए लड़ाई और भी कांटे की हो गई है। 2014 में यहां से शत्रुघ्न सिन्हा ने जीत हासिल की थी। लेकिन हालात कुछ ऐसे बने कि वह खुलकर भाजपा विरोध में आ गए। पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ उन्होंने मोर्चा खोल दिया। भाजपा ने यहां से रविशंकर प्रसाद को टिकट दे दिया। सिन्हा के सामने राजद और कांग्रेस में जाने का विकल्प था। महागठबंधन के बाद सीट कांग्रेस के खाते में आई तो वह कांग्रेस में शामिल हो गए। अब यहां राजद प्रमुख लालू प्रसाद का प्रभाव और मोदी फैक्टर की साख कसौटी पर है।
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शत्रुघ्न सिन्हा-रविशंकर प्रसाद
पटना साहिब सीट देश की उन चुनिंदा सीटों में एक हैं जहां कायस्थ मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। भाजपा ने इस सीट पर पार्टी से असंतुष्ट रहने वाले शत्रुघ्न सिन्हा का टिकट इस बार काट दिया और उन्हीं की जाति से संबंध रखने वाले केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को टिकट दिया है।
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शत्रुघ्न सिन्हा - फोटो : PTI
पटना साहिब सीट का गठन वर्ष 2008 में नए परिसीमन के तहत हुआ था। इसके बाद से यहां पर दो लोकसभा चुनाव हुए हैं। दोनों ही बार भाजपा के टिकट पर शत्रुघ्न सिन्हा सांसद चुने गए ।

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नरेंद्र मोदी-लालू यादव - फोटो : Social Media
पटना साहिब में लोगों का मानना है कि चुनाव में तो ऐसा है कि वोट पड़ने के बाद ही कुछ कह सकते हैं, लेकिन इस सीट पर फूल (भाजपा) मजबूत है । वैसे भी लालू जी बिहार के नेता हैं और मोदी जी देश के। ये राय सिर्फ कुछ लोगों की नहीं है। बांकीपुर, कुम्भरार से लेकर पटना साहिब तक एक बड़े वर्ग की यही राय है।
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लाइन में खड़ें मतदाता
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पटना साहिब सीट पर जातीय समीकरण के आधार पर कायस्थों का दबदबा रहा है। लगभग पांच लाख से ज्यादा कायस्थों के अलावा यहां यादव और राजपूत मतदाताओं की भी खासी संख्या है। सामान्य तौर पर यहां के कायस्थ वोटरों का झुकाव भाजपा की तरफ माना जाता है। 
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भाजपा-कांग्रेस - फोटो : Social Media
2008 में परिसिमन से पहले पटना सीट पर 1952 से 1962 तक कांग्रेस और 1967 व 1971, 1980 में सीपीआई ने जीत दर्ज की । 1977 में जनता दल, 1984 में कांग्रेस जीती। 1989 में पहली बार भाजपा ने इस सीट पर जीत दर्ज की। 1991 व 1996 में जनता दल और 1998 और 1999 में यह सीट भाजपा की झोली में गई। 2004 में यह सीट राजद के खाते में गई।
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