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Elections In 2025: दिल्ली-बिहार में विधानसभा तो छह राज्यों में उपचुनाव, 2025 में कितनी बदलेगी देश की सियासत?

Wed, 01 Jan 2025 12:23 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

2025 में कई ऐसे सियासी घटनाक्रम होंगे, जिस पर पूरे देश की नजर होगी। साल की शुरुआत में ही दिल्ली विधानसभा चुनाव होंगे, जबकि साल के अंत में बिहार में चुनावी लड़ाई होगी। आइए जानते हैं ऐसी कुछ बड़ी सियासी घटनाओं को जो 2025 में घटेंगी...
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चुनाव और उपचुनाव - फोटो : Amar Ujala
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आज की सुबह कुछ खास रही। पुरानी यादों को पीछे छोड़कर हमने नए साल में कदम रखा। जहां 2024 का कभी गम, कभी खुशी में बीता तो अब नए साल से बहुत कुछ अच्छे की उम्मीद है। 2025 में कई ऐसी सियासी घटनाएं होने वाली हैं, जिन पर हर भारतवासी की नजर रहेगी। जहां साल की शुरुआत में ही दिल्ली में जनता अपने पांच वर्षों का भविष्य तय करेगी तो वहीं साल के अंत में बिहार चुनाव में दो गठबंधनों का सियासी भाग्य तय होगा। इसके अलावा भी राजनीति के क्षेत्र में बहुत कुछ होने वाला है। आइए जानते हैं कुछ बड़ी सियासी घटनाओं को जो 2025 में घटेंगी...

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दिल्ली विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला

किसके लिए दूर किसके लिए पास दिल्ली?
साल के अंत होते-होते दिल्ली विधानसभा चुनाव की सरगर्मी शुरू हो गई है। राजधानी में इस साल फरवरी में चुनाव होने हैं। यह चुनाव इसलिए बड़ा अहम होने जा रहा है, क्योंकि दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी आप के कई बड़े नेता भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में रहे। खुद पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल कथित दिल्ली शराब घोटाले में करीब पांच महीने जेल में रहे। इस चुनाव में आप दिल्ली में जीत का चौका लगाने चाहेगी तो भाजपा भी दशकों बाद दिल्ली में वापसी के लिए प्रयास करेगी। पिछले दो बार से खाता न खोलने वाली कांग्रेस ने भी इस बार बड़े चेहरों को चुनाव मैदान में उतारकर कड़ी टक्कर देने की कोशिश करेगी।

बता दें कि पिछला विधानसभा चुनाव फरवरी 2020 में हुआ था। चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ राज्य में सरकार बनाई थी। आप को 70 में से 62 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि आठ सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार को सफलता मिली थी। इसके साथ ही अरविंद केजरीवाल लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बने थे। दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 15 फरवरी 2025 को समाप्त होने वाला है।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

बिहार चुनाव में एनडीए बनाम इंडिया की अग्निपरीक्षा
इस साल के सबसे बड़े घटनाक्रमों में बिहार विधानसभा चुनाव भी होगा। सभी 243 विधानसभा सीटों के लिए अक्तूबर या नवंबर 2025 में चुनाव होने वाले हैं। जहां सत्ता में काबिज नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला एनडीए सरकार में वापसी की उम्मीद करेगा तो वहीं दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन इंडिया भी अपना दम दिखाने की कोशिश करेगा।

बिहार में पिछली बार विधानसभा चुनाव अक्तूबर-नवंबर 2020 में तीन चरणों में हुए थे। 243 में से 125 सीटों के साथ एनडीए सत्ता में काबिज हुआ था। वहीं दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी महागठबंधन ने 110 सीटें जीती थीं। चुनावों के बाद मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार में एनडीए के नेता के रूप में चुना गया और उन्हें फिर से मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। नीतीश के साथ दो उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को भी कैबिनेट में शामिल किया गया था।

हालांकि, अगस्त 2022 में नीतीश ने एनडीए का साथ छोड़ा और महागठबंधन में शामिल हो गए। जनवरी 2024 में एक बार फिर नीतीश कुमार ने गठबंधन बदला। नीतीश ने महागठबंधन सरकार में बतौर सीएम पद से इस्तीफा दिया और भाजपा के साथ नई सरकार बना ली। यह पहली बार नहीं था, जब नीतीश कुमार महागठबंधन को छोड़कर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के साथ आए। इस तरह से जदयू ने चौथी बार साथी बदले लेकिन दिलचस्प है कि नीतीश कुमार हर बार मुख्यमंत्री बने। भले उनकी पार्टी के विधायकों की संख्या उनके सहयोगी से कम रही हो।

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उपचुनाव। - फोटो : amar ujala

पश्चिम बंगाल में लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव संभव
अगले साल पश्चिम बंगाल की बशीरहाट लोकसभा सीट पर उपचुनाव भी हो सकता है। बशीरहाट से तृणमूल सांसद हाजी नुरुल इस्लाम का 25 सितंबर 2024 को निधन हो गया था। 61 वर्षीय तृणमूल कांग्रेस सांसद कैंसर से पीड़ित थे। चुनाव आयोग ने एक याचिका की वजह से 2024 में इस सीट पर उपचुनाव का एलान नहीं किया था। दरअसल, भाजपा उम्मीदवार रेखा पात्रा ने तृणमूल कांग्रेस की जीत को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और मामला अभी अदालत में है।

2024 के लोकसभा चुनाव में बशीरहाट लोकसभा क्षेत्र का नतीजा टीएमसी के पक्ष में गया था। यहां उसके उम्मीदवार हाजी नूरुल इस्लाम ने भाजपा की रेखा पात्रा को 3.3 लाख से अधिक मतों से हराया था। रेखा पात्रा ने ही बशीरहाट लोकसभा क्षेत्र के संदेशखली में महिलाओं के साथ हुई ज्यादती का मुद्दा उठाया था। यह क्षेत्र 5 जनवरी 2024 को उस वक्त चर्चा में आ गया, जब निलंबित टीएमसी नेता शेख शाहजहां के परिसर के पास ईडी की टीम पर भीड़ ने हमला किया था।

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उपचुनाव - फोटो : अमर उजाला

अयोध्या की मिल्कीपुर जैसे कई विधानसभा सीटों पर उपचुनाव

  1. मिल्कीपुर: उत्तर प्रदेश की मिल्कीपुर (एससी) विधानसभा सीट पर इस साल होने वाले उपचुनाव पर भी सबकी निगाहें टिकी होंगी। यह सीट अयोध्या जिले में आती है जहां के 2024 लोकसभा चुनाव नतीजे की खूब चर्चा रही। यूपी में भाजपा की सीटें कम होने के साथ अयोध्या जिले की फैजाबाद लोकसभा सीट पर भी हार का सामना करना पड़ा था। सपा उम्मीदवार अवधेश प्रसाद यहां से करीब 54 हजार मतों से जीत गए थे।
  2. लोकसभा चुनाव जीतने वाले अवधेश 2022 में मिल्कीपुर सीट से जीते थे। उन्होंने भाजपा के गोरखनाथ को हराया था। हालांकि, पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा ने 2022 विधानसभा चुनाव को लेकर हाइकोर्ट में अवधेश प्रसाद के चुनाव जीतने को लेकर एक याचिका दायर की थी। अदालत में मामला लंबित होने के कारण 2024 में मिल्कीपुर सीट पर उपचुनाव नहीं हो सका। अब याचिका वापस ले ली गई है, जिससे उपचुनाव का रास्ता साफ हो गया है। उधर, उपचुनाव के लिए सपा मिल्कीपुर सीट से सांसद अवधेश के बेटे अजीत प्रसाद को अपना चेहरा भी घोषित कर चुकी है।
  3. बडगाम: जम्मू कश्मीर की बडगाम विधानसभा सीट पर भी 2025 में उपचुनाव होगा। 2024 के विधानसभा चुनाव में गांदरबल के साथ बडगाम में भी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को जीत मिली थी। हालांकि, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने गांदरबल को प्रतिनिधित्व के लिए चुना और अक्तूबर 2024 में बडगाम विधायक के रूप में इस्तीफा दे दिया था।
  4. नगरोटा: जम्मू कश्मीर की नगरोटा विधानसभा सीट पर भी 2025 में उपचुनाव होगा। 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां भाजपा के देवेंद्र सिंह राणा जीते थे, लेकिन बीमारी के चलते चुनाव के कुछ दिन बाद ही राणा का निधन हो गया।
  5. देवीकुलम: केरल की रिक्त देवीकुलम विधानसभा सीट पर भी इस साल उपचुनाव हो सकता है। यहां के विधायक रहे ए राजा की अयोग्यता का मामला कोर्ट में होने के कारण इस पर 2024 में चुनाव का एलान नहीं किया था। मार्च 2023 में केरल उच्च न्यायालय ने 2021 केरल विधानसभा चुनाव के दौरान देवीकुलम आरक्षित सीट से माकपा उम्मीदवार ए राजा का निर्वाचन रद्द कर दिया था। अदालत ने राजा को अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षण के लिए अयोग्य पाया था क्योंकि उन्होंने एससी समुदाय को छोड़कर ईसाई धर्म अपना लिया था। दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस उम्मीदवार डी. कुमार ने राजा की जीत को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। माकपा नेता राजा ने उच्च न्यायालय के निर्वाचन रद्द करने के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर 2024 को माकपा नेता द्वारा उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
  6. विसावदार: गुजरात में जूनागढ़ जिले की विसावदार विधानसभा सीट पर भी इस साल उपचुनाव संभव है। विसावदार सीट पर 2024 में चुनाव का एलान नहीं किया गया। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां से आम आदमी पार्टी के भूपत भयानी जीते थे, लेकिन दिसंबर 2023 में वह भाजपा में शामिल हो गए थे। लोकसभा चुनाव 2024 के साथ गुजरात की छह खाली विधानसभा सीटों में से पांच ही के लिए उपचुनाव कराए गए थे, लेकिन चुनाव से जुड़ी याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण विसावदार में उपचुनाव नहीं हुआ था। भयानी से हारने वाले भाजपा उम्मीदवार हर्षद रिबादिया ने भयानी की जीत और रिटर्निंग अधिकारी द्वारा नामांकन पत्र स्वीकार करने को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। इसके अलावा हाईकोर्ट में चुनाव को चुनौती देते हुए इसी तरह की कुछ अन्य याचिकाएं भी दायर की गई थीं। भयानी के चुनाव को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि वह जूनागढ़ तालुका के भेंसन गांव के सरपंच थे और उन्हें 2021 में जिला विकास अधिकारी ने पद से हटा दिया था। हटाने के आदेश को राज्य सरकार के सक्षम प्राधिकारी ने भी बरकरार रखा था। इसलिए नियम के अनुसार, वह पांच साल तक विधानसभा चुनाव लड़ने से अयोग्य हैं। याचिका में आगे कहा गया है कि भयानी नामांकन पत्र में अपने बेटे की संपत्ति और व्यवसाय की घोषणा करने में विफल रहे हैं। इसलिए, उनका चुनाव शून्य घोषित किया जाना चाहिए।
  7. इरोड (पूर्व): तमिलनाडु की इरोड (पूर्व) विधानसभा सीट पर 2025 में उपचुनाव प्रस्तावित है। यहां के कांग्रेस विधायक ईवीकेएस एलंगोवन का दिसंबर 2024 में निधन हो गया। एलंगोवन तमिलनाडु कांग्रेस के तेजतर्रार नेता माने जाते थे। तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष रहे ईवीकेएस एलंगोवन ने जयललिता जैसे ताकतवर डीएमके और एआईएडीएमके नेताओं का मुकाबला किया।
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