सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल की सुंदरता बचाने के लचर प्रयासों को देखते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार तथा अन्य जिम्मेदार संस्थाओं को कड़ी फटकार लगाई है। तमाम कवायदों के बावजूद ताज के रूप रंग में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा। जहाँ ताज की हालत प्रदूषण से बदतर होती जा रही है तो पूरी दुनिया में एसे कई एतिहासिक इमारत और धरोहर हैं जो प्रदूषण की वजह से अपना अस्तित्व खो सकते हैं। आइये जानते हैं एेसी वर्ल्ड हेरिटेज साइट के बारे में जिन्हें बचाने के लिए कोशिश जारी है।
ताज को प्रदूषण से बचाने की चिंता तो 70 के दशक से ही शुरू हो गई थी। तब तो आगरा से 40 किमी दूर स्थित मथुरा रिफाइनरी तक पर सवाल उठ गए थे। ताज को देखने दुनिया भर से लोग आते हैं लेकिन फैक्ट्रियों के प्रदूषण और रसायनिक वर्षा से इसमें लगे संगमरमर के पत्थर पीले पड़ रहे हैं।
लोटस टेंपल
दिल्ली में बहाई समुदाय का प्रार्थना केंद्र धीरे-धीरे सफेद से मटमैला हो रहा है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने नेहरू प्लेस पर लगने वाले भारी जाम को इसका जिम्मेदार बताया है। भारी ट्रैफिक प्रदूषण से लोटस टेंपल भी ताज की तरह पीला पड़ रहा है।
आईआईटी के एक अध्ययन से पता चला है कि दिल्ली और पंजाब के प्रदूषण ने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर को सोने की चमक को मद्धम कर दिया है। आस-पास के तंदूर भी इसके सोने से बने हिस्से पर बुरा असर डाल रहे हैं।
हैदराबाद की अनूठी चार मीनार इमारत अपनी रौनक खोती जा रही है। मीना बाजार के साथ शहर का भारी जाम इस कदर प्रदूषण पैदा कर रहा है कि चूने की मोर्टार और ग्रेनाइट से बनी चार मीनार फीकी पड़ने के साथ टूट रही है।
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इंडिया गेट
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दिल्ली के प्रदूषण का असर जहां आस-पास के राज्यों तक देखने को मिलता है वहां शहर के केंद्र में मौजूद इंडिया गेट इस असर से कैसे अछूता रह सकता है। स्मॉग और खतरनाक वायु प्रदूषण ने राजधानी के चिन्ह को काफी नुकसान पहुंचाया है।
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लेशान बुद्धा (चीन)
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लेशान बुद्ध एक अंतराष्ट्रीय धरोहर है पर चीन में एसिड रेन यानि अम्ल वर्षा से हो रही खतरा का सीधा असर इस इमारत में देखने को मिल रही है। अगर चीन ने इसके संरक्षण के लिए कुछ कारगर कदम नहीं उठाये तो ये इमारत ढहना शुरू हो जाएगी।
एथेन्स का एक्रोपोलीस (मिस्र)
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(460-430 बीसी) में बने एक्रोपोलीस को एथेंस के स्वर्णिम युग की निशानी माना जाता है। लेकिन इतिहास को समेटे इस धरोहर की हालत जर्जर हो चुकी है, प्रदूषण की वजह से पत्थर से बनी ये इमारत तबाह होने के कगार पर है।
चीन के सबसे पुरातन इमारतों में लांगमेन ग्रोट्टेस का नाम आता है। हेनन प्रोविंस के यी नदी के किनारा मौजूद ये इमारत वी और तैंग राज्य (316-907 एडी) में पत्थरों को तराश कर बनाई गई है। लेकिन प्रदूषण की वजह से ये इमारत भी जर्जर हो रही है जिसका संरक्षण बेहद जरुरी है।