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हजारों किलोमीटर तक देश की रक्षा करेगा INS किल्टन वॉरशिप, जानें इसकी खास बातें

Mon, 16 Oct 2017 05:05 PM IST
amarujala.com- presented by: मनीष कुमार
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- फोटो : AFP
दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सोमवार को एंटी सबमरीन वॉरशिप आईएनएस किल्टन भारतीय नौसेना का हिस्सा बन गया। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने विशाखापट्टनम में इस वॉरशिप को कमीशन किया। भारतीय सेना में हथियारों के मॉडर्नाइजेशन के बीच यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आइए आपको बताते हैं हजारों किलोमीटर तक रखवाली करने वाले आईएनएस किल्टन की क्या हैं खासियतें?
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- फोटो : AFP
आईएनएस किल्टन मॉडर्न टेक्नोलॉजी के साथ बना है। ये नेवी का पहला ऐसा वॉरशिप है जिसमें स्वीडन से आए कार्बन फाइबर का इस्तेमाल किया गया है। इसकी मदद से ‌शिप के वजन कम रखने और देखरेख में कम खर्च होता है।
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- फोटो : AFP
इस युद्धपोत को भारी-भरकम टारपीडो के साथ ही एएसडब्लू रॉकेटों से लैस किया गया है। बता दें कि आईएनएस किल्टन सभी प्रमुख हथियारों और सेंसर के समुद्री टेस्ट्स को शुरू करने वाला पहला वॉरशिप भी हैं।

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- फोटो : AFP
यह वॉरशिप 109 मीटर लंबी है। कमोटरा क्लास की कॉर्वेट आईएनएस किल्टन 5,550 किमी की रेंज की रखवाली करने की क्षमता रखता है। यही नहीं, किल्टन की स्पीड भी आम कॉर्वेट्स की तुलना में कहीं ज्यादा 46 किमी प्रतिघंटे की है।
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- फोटो : AFP
कॉर्वेट्स 4 शक्तिशाली डीजल इंजनों से लैस है, जो किसी भी मौसम और समय में कॉर्वेट्स को धीमा नहीं पड़ने देंगे। यह 13 अधिकारियों और 178 नाविकों के चालक दल द्वारा संचालित किया जाएगा।
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- फोटो : AFP
आईएनएस किल्टन के हथियारों में भारी वजन टारपीडो, एएसडब्ल्यू रॉकेट, 76 एमएम कैलिबर श्रेणी की बंदूक और दो बहु बैरल 30 एमएम बंदूकें शामिल हैं।
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- फोटो : AFP
आईएनएस किल्टन कमोटरा क्लास की कॉर्वेट है, जो 3000 टन वजनी है। हथियारों के साथ इसका वजन और बढ़ जाता है। आईएनएस किल्टन उन चार एएसडब्ल्यू कार्वेट्स में से एक है जिन पर करीब 7800 करोड़ रुपये खर्च ‌हुए हैं।
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