भारत और चीन के सैनिकों के बीच लद्दाख की गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से ही एशिया के दो सबसे बड़े देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। चीन ने कहा है कि वह अपने सैनिकों को प्रशिक्षण देने के लिए बीस मार्शल आर्ट ट्रेनर तिब्बत भेज रहा है।
हांगकांग की मीडिया के अनुसार, चीनी मीडिया में तिब्बत भेजे जा रहे सेना के खास मार्शल आर्ट ट्रेनरों की खबरें सुर्खियों में बनी हुई हैं। सरकारी चैनल सीसीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि एंबो फाइट क्लब से जुड़े बीस फाइटर तिब्बत की राजधानी ल्हासा में रहेंगे।
हालांकि, चीनी मीडिया ने यह नहीं बताया कि ये ट्रेनर भारत से लगी सीमा पर तैनात सैनिकों को भी प्रशिक्षण देंगे या नहीं। लेकिन भारत में इस बात की चर्चा हो रही है कि क्या मार्शल आर्ट ट्रेंड चीनी जवानों से लड़ने के लिए हमारे जवानों के पास ट्रेनिंग है?
विशेषज्ञों ने बताया है कि भारतीय सेना की हर इंफेंट्री में ऐसे जवान मौजूद हैं, जिन्हें बिना हथियारों के लड़ने का प्रशिक्षण दिया गया है और वो मार्शल आर्ट जैसी विधाओं में भी पारंगत हैं। सैनिकों के इस समूह को 'घातक प्लाटून' के नाम से जाना जाता है।
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