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ढाक के तीन पातः जेएनयू हिंसा में अब तक कोई कार्रवाई नहीं, लेफ्ट ने निकाला मार्च

Tue, 12 Apr 2022 08:28 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वामपंथी छात्रों ने शाम पांच बजे अपना मार्च निकाला। मार्च के दौरान छात्र लगातार जेएनयू परिसर को हिंसा से मुक्त रखने और ‘वैचारिक आतंकवाद’ न फैलाने के नारे लगाते रहे।
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JNU - फोटो : Amar Ujala
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कावेरी हॉस्टल विवाद में एक बार फिर पुलिस अपने पुराने रवैये की ओर आगे बढ़ती दिख रही है। घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। हिंसा में शामिल जेएनयू के बाहर के लोगों की अब तक पहचान तक नहीं हो पाई है। हिंसा में शामिल छात्रों का वीडियो होने के बाद भी अब तक एक भी छात्र को गिरफ्तार नहीं किया गया है। 

इस बीच मंगलवार को वामपंथी छात्र संगठनों ने साबरमती ढाबा से जेएनयू के मुख्य द्वार तक मानव श्रृंखला बनाकर मार्च निकाला। इस मार्च को जेएनयू शिक्षक संघ और छात्र संघ ने भी अपना समर्थन दिया और उनके पदाधिकारी भी प्रदर्शन में शामिल हुए। दक्षिणपंथी एबीवीपी छात्रों ने भी प्रॉक्टर ऑफिस जाकर शिकायत दर्ज कराई है। 

वामपंथी छात्रों ने शाम पांच बजे अपना मार्च निकाला। मार्च के दौरान छात्र लगातार जेएनयू परिसर को हिंसा से मुक्त रखने और ‘वैचारिक आतंकवाद’ न फैलाने के नारे लगाते रहे। छात्रों ने आरोप लगाया कि हिंदुत्व के नाम पर जेएनयू परिसर में फासिस्ट विचारधारा को स्थान दिया जा रहा है जिससे देश का भविष्य खतरे में पड़ता दिख रहा है। छात्रों ने अपने हाथों में विश्वविद्यालय परिसर में संघ के कथित हस्तक्षेप पर इकट्ठा होकर विरोध करने की अपील भी की। 
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JNU - फोटो : Amar Ujala
सर्कुलर का विरोध
छात्रों ने दो बजे वाइस चांसलर से मुलाकात की और परिसर में घटी घटना पर विरोध दर्ज कराया। छात्रों ने जेएनयू प्रशासन द्वारा जारी किए गए उस सर्कुलर का भी विरोध किया जिसमें कावेरी में हुए विवाद के पीछे रामनवमी पर पूजा को रोकने के कारण पैदा हुआ बताया गया था। छात्रों ने कहा कि पूरा विवाद मांस न खाने देने के कारण पैदा हुआ था, लेकिन प्रशासन ने जानबूझकर इस विवाद को रामनवमी पूजा से जोड़ने की कोशिश की। जबकि सच्चाई यह है कि रविवार को परिसर में रामनवमी की पूजा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई थी और सभी छात्र उसमें शामिल भी हुए थे। 

माता-पिता चिंतित
एआईएसएफ से जुड़े जेएनयू छात्र संतोष ने अमर उजाला को बताया कि यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है कि यूनिवर्सिटी कैंपस को बार-बार बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। बार-बार बाहर से गुंडों को बुलाकर छात्रों को पीटा जा रहा है, लेकिन अब तक एक भी मामले में किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि इससे पूरे जेएनयू परिसर में दहशत जैसा माहौल है। बच्चों में अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

उन्होंने कहा कि जो परिवार अपने बच्चों को यहां पढ़ने भेजते हैं, वे अपने बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं और बार-बार फोन कर बच्चों का हालचाल पूछ रहे हैं। लेकिन उनके पास अपने माता-पिता को बताने के लिए कुछ ठोस नहीं है क्योंकि जेएनयू प्रशासन या पुलिस इस मामले पर अब तक कुछ भी ठोस करने में असफल रहे हैं। यह बेहद चिंताजनक मामला है।

एबीवीपी ने की कार्रवाई की मांग
वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों ने भी प्रशासन से मुलाकात कर घटना पर अपना रोष प्रकट किया। एबीवीपी छात्रों ने शाम साढ़े चार बजे प्रॉक्टर ऑफिस पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। छात्रों ने हिंसा में शामिल छात्रों पर सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की और परिसर को शांतिपूर्ण रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा। 
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