JNU
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सर्कुलर का विरोध
छात्रों ने दो बजे वाइस चांसलर से मुलाकात की और परिसर में घटी घटना पर विरोध दर्ज कराया। छात्रों ने जेएनयू प्रशासन द्वारा जारी किए गए उस सर्कुलर का भी विरोध किया जिसमें कावेरी में हुए विवाद के पीछे रामनवमी पर पूजा को रोकने के कारण पैदा हुआ बताया गया था। छात्रों ने कहा कि पूरा विवाद मांस न खाने देने के कारण पैदा हुआ था, लेकिन प्रशासन ने जानबूझकर इस विवाद को रामनवमी पूजा से जोड़ने की कोशिश की। जबकि सच्चाई यह है कि रविवार को परिसर में रामनवमी की पूजा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई थी और सभी छात्र उसमें शामिल भी हुए थे।
माता-पिता चिंतित
एआईएसएफ से जुड़े जेएनयू छात्र संतोष ने अमर उजाला को बताया कि यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है कि यूनिवर्सिटी कैंपस को बार-बार बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। बार-बार बाहर से गुंडों को बुलाकर छात्रों को पीटा जा रहा है, लेकिन अब तक एक भी मामले में किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि इससे पूरे जेएनयू परिसर में दहशत जैसा माहौल है। बच्चों में अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि जो परिवार अपने बच्चों को यहां पढ़ने भेजते हैं, वे अपने बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं और बार-बार फोन कर बच्चों का हालचाल पूछ रहे हैं। लेकिन उनके पास अपने माता-पिता को बताने के लिए कुछ ठोस नहीं है क्योंकि जेएनयू प्रशासन या पुलिस इस मामले पर अब तक कुछ भी ठोस करने में असफल रहे हैं। यह बेहद चिंताजनक मामला है।
एबीवीपी ने की कार्रवाई की मांग
वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों ने भी प्रशासन से मुलाकात कर घटना पर अपना रोष प्रकट किया। एबीवीपी छात्रों ने शाम साढ़े चार बजे प्रॉक्टर ऑफिस पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। छात्रों ने हिंसा में शामिल छात्रों पर सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की और परिसर को शांतिपूर्ण रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा।