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Jharkhand: कौन हैं DSP नूर मुस्तफा जिनपर अंकिता के आरोपियों को बचाने का आरोप, पढ़ें दुमका की बेटी की कहानी

Tue, 30 Aug 2022 03:59 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अंकिता के मामले की जांच दुमका के डीएसपी नूर मुस्तफा को मिली। नूर झारखंड पुलिस सर्विसेज के अफसर हैं। शुरुआत में नूर मुस्तफा की अगुआई में ही पुलिस ने इस मामले की जांच की। इसके बाद ही नूर मुस्तफा पर सवाल खड़े होने लगे। 
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अंकिता और उसे जिंदा जलाने वाले दोनों आरोपी। साथ में डीएसपी नूर मुस्तफा अंसारी। - फोटो : अमर उजाला
झारखंड के दुमका में कक्षा 12वीं की छात्रा को जिंदा जलाने के मामले में डीएसपी नूर मुस्तफा विवादों में हैं। नूर पर छात्रा अंकिता को जलाकर मारने वाले आरोपी को बचाने का आरोप है। मामला के तूल पकड़ने पर झारखंड सरकार ने डीएसपी नूर मुस्तफा का ट्रांसफर कर दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक बाबूलाल मरांडी ने नूर पर आदिवासी विरोधी होने का आरोप लगाया है। 

नूर मुस्तफा कौन हैं? उन पर क्या-क्या आरोप लगे हैं? अंकिता की पूरी कहानी क्या है?  आइए जानते हैं...
 
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शाहरूख ने अंकिता को जलाकर मार डाला - फोटो : अमर उजाला
पहले जानिए मामला क्या है?
मामला 23 अगस्त का है। 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली अंकिता अपने घर में सो रही थी। तड़के सुबह करीब पांच बजे उसी मोहल्ले में रहने वाला शाहरुख हुसैन उसके घर पहुंचा। उसने खिड़की के कांच तोड़कर अंकिता पर पेट्रोल डाला और माचिस जला कर उसे आग के हवाले कर दिया। 

अंकिता को गंभीर हालत में दुमका जिले के फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां से प्राथमिक इलाज के बाद 23 अगस्त को ही अंकिता को रांची के रिम्स अस्पताल रेफर कर दिया गया। अंकिता के दोनों हाथ, दोनों पैर, पीठ का हिस्सा और पेट का काफी हिस्सा बुरी तरह से जल गया था। पांच दिन तक वह जिंदगी और मौत से जूझती रही। शनिवार को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। 
 
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अंकिता को जिंदा जलाने वाला शाहरूख - फोटो : अमर उजाला
आरोपी युवक ने अंकिता को जलाया क्यों?
अंकिता के परिवार का कहना है कि शाहरुख पिछले तीन साल से उसे परेशान कर रहा था। अंकिता ने इस बात की जानकारी अपने पिता को भी दी थी। शुरुआत में उन्होंने इस पर कोई कदम नहीं उठाया। इसके बाद जब शाहरुख अंकिता का ज्यादा परेशान करने लगा तो वह पुलिस के पास शिकायत करने भी गए थे। हालांकि, शाहरुख के बड़े भाई ने माफी मांगते हुए आगे से ऐसा नहीं होने का आश्वासन दिया। 

इसके बाद शाहरुख कुछ दिन तक शांत रहा। कुछ दिनों बाद उसने फिर से वही सब करना शुरू कर दिया। घटना से करीब 15 दिन पहले से उसने अंकिता को कुछ ज्यादा ही परेशान करना शुरू कर दिया था। घटना से एक दिन पहले 22 अगस्त को ही उसने अंकिता को फोन करके धमकी दी कि अगर मुझसे बात नहीं करोगी तो जान से मार दूंगा। 
 

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अंकिता को जलाकर मारने वाले दोनों आरोपी पकड़े जा चुके हैं। - फोटो : अमर उजाला
कौन है आरोपी? 
घटना वाले दिन ही आरोपी शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने इस घटना को एकतरफा प्यार का मामला बताया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपी शाहरुख तीन साल पहले अप्रैल 2019 में छेनी हथौड़ी लेकर अंकिता के घर में घुस गया था। तब उसने घर में तोड़फोड़ की थी। लोगों ने शाहरुख को पकड़कर पीटा भी था। मामला पुलिस तक पहुंचा। हालांकि, समझौता हो गया था। इसी महीने 2 अगस्त को भी आरोपी ने पीड़िता के घर की ग्रिल तोड़कर घुसने की कोशिश की थी। 
 
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डीएसपी नूर मुस्तफा - फोटो : अमर उजाला
डीएसपी नूर मुस्तफा पर क्या आरोप है? 
अंकिता के मामले की जांच दुमका के डीएसपी नूर मुस्तफा को मिली। नूर झारखंड पुलिस सर्विसेज के अफसर हैं। शुरुआत में नूर मुस्तफा की अगुआई में ही पुलिस ने इस मामले की जांच की। इसके बाद ही नूर मुस्तफा पर सवाल खड़े होने लगे। 

आरोप है कि इस मामले में दुमका के डीएसपी नूर मुस्तफा ने षड्यंत्र रचा है। उन्होंने शुरू से ही आरोपी शाहरुख का पक्ष लिया। केस को कमजोर करने के लिए अंकिता को एफआईआर में वयस्क दिखाया दिया है। जबकि रिकॉर्ड के अनुसार अंकिता नाबालिग है। वहीं, शाहरुख की उम्र में भी खेल करने का आरोप है। ऐसा नहीं है कि नूर मुस्तफा पर ये पहला आरोप है। इसके पहले भी इस तरह के मामलों में नूर मुस्तफा पर पक्षपात करने का आरोप लग चुका है। 
 
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नूर मुस्तफा अंसारी, डीएसपी - फोटो : अमर उजाला
नूर मुस्तफा पर पहले किस तरह के आरोप लगे हैं?
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कुछ दस्तावेज साझा करते हुए दावा किया है कि नूर मुस्तफा आदिवासी विरोधी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएसपी दुमका में कोयला, बालू, पत्थर चोरी के सरगनाओं का संरक्षण देते हैं और इन सभी में उनकी हिस्सेदारी है।

 मरांडी ने एक पुराना मामला भी साझा करते हुए दावा किया कि आदिवासियों का शोषण करने वाले जुल्फिकार नाम के युवक पर एसटी एक्ट का मामला दर्ज हुआ था। वह जेल भी गया, लेकिन  डीएसपी ने जानबूझकर 90 दिन में चार्जशीट नहीं की। इसी आधार पर जुल्फिकार कार को बेल मिल गई।
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