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कोरोना संकट के बीच निकली जगन्नाथ रथयात्रा, मौसी के घर पहुंचे भगवान, देखें तस्वीरें

Tue, 23 Jun 2020 11:09 PM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुरी
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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : पीटीआई
कोरोना महामारी के बीच मंगलवार को पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकली। सुप्रीम कोर्ट की सोशल डिस्टेंसिंग समेत तमाम निर्देशों के बीच रथयात्रा की मंजूरी मिली थी। इसलिए बिना श्रद्धालुओं की मौजूदगी में रथ यात्रा निकाली गई। रथयात्रा से पहले आज सुबह मंदिर परिसर को सैनिटाइज किया गया। कोर्ट ने कहा था कि एक रथ को 500 से ज्यादा लोग न खींचें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वहीं, सरकार ने सोमवार को हुई सुनवाई में कहा था कि यदि परंपरा टूटती है तो फिर अगले 12 साल तक रथयात्रा नहीं निकलेगी।
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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : पीटीआई
गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। यहां भगवान सात दिनों तक आराम करते हैं। इसके बाद वापसी की यात्रा शुरू होती है। एक जुलाई को भगवान जगन्नाथ फिर इन्हीं रथों में बैठकर मुख्य मंदिर पहुंचेंगे। इसे बहुड़ा यात्रा कहा जाता है। 
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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : पीटीआई
भगवान जगन्नाथ का रथ अन्य रथों कि तुलना में बड़ा होता है और रंग लाल पीला होता है। भगवान जगन्नाथ का रथ सबसे पीछे चलता है। पहले बलभद्र फिर सुभद्रा का रथ होता है। भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष कहते हैं जिसकी ऊंचाई 45.6 फुट होती है। प्रत्येक वर्ष भगवान जगन्नाथ सहित बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाएं नीम की लकड़ी से ही बनाई जाती हैं। 

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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : पीटीआई
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में सभी पुजारियों की कोरोना जांच की गई। एक पुजारी ने पॉजिटिव परीक्षण किया, उन्हें रथ यात्रा में भाग लेने की अनुमति नहीं मिली। जगन्नाथ पुरी में दोपहर 1.50 बजे भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष खींचा गया। इसके पहले 12.10 बजे पहला रथ तालध्वज खींचा गया। 
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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : पीटीआई
2500 साल से ज्यादा पुराने रथयात्रा के इतिहास में पहली बार ऐसा मौका आया, जब भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकली रही है लेकिन भक्त घरों में कैद हैं। उनसे अपील की गई है कि वो यात्रा के वक्त अपने घरों में ही रहें।
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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : पीटीआई
बलराम के रथ का नाम ताल ध्वज और उंचाई 45 फुट होती है, वहीं सुभद्रा का दर्पदलन रथ 44.6 फुट ऊंचा होता है। अक्षय तृतीया से नए रथों का निर्माण आरंभ हो जाता है। प्रतिवर्ष नए रथों का निर्माण किया जाता है। इन रथों को बनाने में किसी भी प्रकार के कील या अन्य किसी धातु का प्रयोग नहीं होता।

 
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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : पीटीआई
रथ यात्रा शुरू होने से पहले और संपूर्ण यात्रा के दौरान पूरे मार्ग को ओडिशा फायर सर्विस के जवान सैनेटाइज करते रहे। तीन फायर टेंडर की गाड़ियां लगातार यात्रा मार्ग को धो रही थीं। अधिकारियों के अनुसार यात्रा संपूर्ण विधान से हुई और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप ही हुई । 
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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : पीटीआई
अक्सर समुद्री इलाकों में हवा का रुख दिन के समय समुद्र से धरती की तरफ होता है जब कि शाम को उसका रुख बदल जाता है वह धरती से समुद्र की ओर बहने लगती है लेकिन यहां भगवान जगन्नाथ की माया इसे उल्टा कर देती है और दिन में धरती से समुद्र की ओर व शाम को हवा समुद्र से मंदिर की ओर बहती है यानि धरती की ओर हवा का बहाव होता है।
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