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मनसुख मंडाविया बोले: 'एक दुनिया-एक स्वास्थ्य' के नजरिए को साकार करने का बीड़ा उठाए भारत, यह सामूहिक जिम्मेदारी

Wed, 15 Mar 2023 04:53 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सक्रिय वैश्विक सहयोग से ही 'एक धरती, एक स्वास्थ्य' के दृष्टिकोण को हकीकत बनाया जा सकता है, जहां देश केवल अपने बारे में नहीं बल्कि सामूहिक वैश्विक परिणामों के बारे में सोचते हैं।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया - फोटो : ट्विटर/डॉ. मनसुख मंडाविया
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बुधवार को कहा कि अब समय आ गया है कि भारत 'एक धरती, एक स्वास्थ्य' के दृष्टिकोण को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाए और इसे 'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन के अनुरूप बनाए। 'भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) भागीदारी शिखर सम्मेलन-2023' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के पास नए अनुसंधान और प्रौद्योगिकी समर्थित समाधानों का नेतृत्व करने की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति है, जो सार्वभौमिक स्वीकार्यता के साथ व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक हैं। शिखर सम्मेलन की थीम "एक स्वास्थ्य:  सर्वोत्तम के लिए एकीकृत, सहयोगात्मक और बहुक्षेत्रीय दृष्टिकोण' है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया - फोटो : ट्विटर/डॉ.मनसुख मंडाविया
'एक देश तक सीमित नहीं स्वास्थ्य क्षेत्र'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सक्रिय वैश्विक सहयोग से ही 'एक धरती, एक स्वास्थ्य' के दृष्टिकोण को हकीकत बनाया जा सकता है, जहां देश केवल अपने बारे में नहीं बल्कि सामूहिक वैश्विक परिणामों के बारे में सोचते हैं। मंडाविया ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र को एक देश तक सीमित नहीं किया जा सकता है क्योंकि एक देश का स्वास्थ्य और कल्याण दूसरे देश को प्रभावित करता है। हम एक अंतर-निर्भर दुनिया (इंटर-डिपेंडेंट वर्ल्ड) में रहते हैं, जिसमें न केवल देश बल्कि मानव आबादी का स्वास्थ्य आसपास के पर्यावरण और जानवरों के स्वास्थ्य से समान रूप से प्रभावित होता है।

यह भी पढ़ें: Kerala: कोच्चि डंपिंग यार्ड में लगी आग पर केंद्र ने राज्य से मांगी रिपोर्ट, स्वास्थ्य उपायों का करेंगे समर्थन

 
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया - फोटो : ट्विटर/डॉ.मनसुख मंडाविया
'स्वास्थ्य और कल्याण के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करते हैं हमारे कार्य'
वैश्विक महामारी ने दिखाया है कि कोई भी देश किसी भी देश में प्रतिकूल विकास से अछूता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे काम हमारे स्वास्थ्य और कल्याण के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, एक मानव जाति के रूप में यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम न केवल खुद की रक्षा करें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि हमारे कामों का परिणाम उस पर्यावरण की रक्षा करना है जिसमें हम सह-अस्तित्व में रहते हैं। उन्होंने कहा कि 'एक धरती, एक स्वास्थ्य' का नजरिया हमारे कार्यों और पर्यावरण के अनुकूल नीतियों के महत्व पर ध्यान केंद्रित करता है।
 
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया - फोटो : ट्विटर/डॉ.मनसुख मंडाविया
'एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखना जरूरी'
स्वदेशी अनुसंधान और पारंपरिक उपचारों के क्षेत्र में भारत की अग्रणी भूमिका की सराहना करते हुए मंडाविया ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रत्येक देश के पास नजरिया प्राप्त करने का अपना मॉडल हो सकता है। उन्होंने कहा कि अपने मॉडल को समृद्ध करने के लिए एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखना और एक-दूसरे के साथ काम में तालमेल करना महत्वपूर्ण है। आयुष्मान भारत जैसी पहलों की प्रगति और को-विन प्लेटफॉर्म की सफलता की सराहना करते हुए मंडाविया ने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य को 'सेवा' (दूसरों की सेवा) के रूप में माना जाता है। मंत्री ने राष्ट्र के अनुसंधान संस्थानों  पर भरोसा जताया और अनुसंधान में योगदान देने के लिए शिक्षाविदों और निजी क्षेत्र की भागीदारी का आह्वान किया।

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