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NISAR Mission: इसरो और नासा की ऐतिहासिक साझा उड़ान, धरती के कोने-कोने से डाटा जुटाएंगे वैज्ञानिक

Wed, 30 Jul 2025 06:43 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश)

सार

NISAR Mission: भारत और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसियों ने साझा निसार मिशन लॉन्च किया है, जिससे वैज्ञानिकों को धरती में बदलती परिस्थितियों का अध्ययन करने में मदद मिलेगी। इस उपग्रह में दोनों देशों की तकनीकें शामिल हैं और यह मौसम, भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी करेगा। 
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निसार मिशन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
भारत और अमेरिका की पहली अंतरिक्ष साझेदारी की शुरुआत बुधवार को हुई, जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ‘निसार’नाम का उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा। इस उपग्रह को इसरो और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मिलकर बनाया है। इसे इसरो के जीएसएलवी एफ-16 रॉकेट के जरिए शाम 5:40 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया।

लॉन्च के करीब 19 मिनट बाद रॉकेट ने ‘निसार’ को सूरज के साथ घूमने वाली खास कक्षा (सूर्य समकालिक ध्रुवीय कक्षा) में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। ‘निसार’ एक अवलोकन उपग्रह है, जो धरती पर होने वाले भूकंप, भूस्खलन, बर्फबारी और जंगलों में बदलाव जैसी चीजों की निगरानी करेगा। इस मिशन को भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी सहयोग की एक मिसाल माना जा रहा है।
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निसार मिशन - फोटो : पीटीआई
इससे पहले 18 मई को इसरो का पीएसएलवी-सी61 मिशन असफल रहा था, जिसमें पृथ्वी पर नजर रखने वाला एक उपग्रह तय कक्षा तक नहीं पहुंच पाया था। हालांकि, इसरो इससे पहले रिसोर्ससैट और रीसैट जैसे कई उपग्रह सफलतापूर्वक लॉन्च कर चुका है, जो खासतौर पर भारत की जरूरतों के लिए बनाए गए थे। लेकिन ‘निसार’ मिशन के जरिए इसरो ने अब पूरी धरती पर नजर रखने और वैज्ञानिक जानकारी जुटाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। 

करीब 27 घंटे के काउंटडाउन के बाद 51.7 मीटर ऊंचा जीएसएलवी एफ-16 रॉकेट बुधवार शाम 5:40 बजे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया। इस रॉकेट में 2,393 किलो वजन वाला ‘निसार’ उपग्रह मौजूद था। रॉकेट से उपग्रह के अलग होने के बाद वैज्ञानिकों ने इसे पूरी तरह सक्रिय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो अगले कुछ दिनों तक चलेगी। इस प्रक्रिया के बाद उपग्रह अपने मिशन के उद्देश्य पूरे करने के लिए तैयार हो जाएगा।

इसरो ने जानकारी दी कि निसार मिशन के लिए एस-बैंड रडार सिस्टम, डेटा हैंडलिंग सिस्टम, हाई-स्पीड डाउनलिंक सिस्टम, सैटेलाइट और लॉन्च सिस्टम को भारत ने विकसित किया है। वहीं अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एल-बैंड रडार सिस्टम, हाई-स्पीड डेटा रिकॉर्डर, जीपीएस रिसीवर, 9 मीटर लंबा बूम और 12 मीटर का रडार रिफ्लेक्टर इस मिशन के लिए मुहैया कराया है।
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निसार मिशन - फोटो : पीटीआई
इसरो इस उपग्रह के संचालन और निर्देशन की जिम्मेदारी निभाएगा, जबकि नासा कक्षा में उपग्रह को चलाने और रडार संचालन की योजना बताएगा। दोनों एजेंसियां ग्राउंड स्टेशन के जरिए प्राप्त डाटा को डाउनलोड करेंगी और उसे प्रोसेस कर उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाएंगी। एक ही मंच से प्राप्त एस-बैंड और एल-बैंड के रडार डाटा की मदद से वैज्ञानिक पृथ्वी में हो रहे बदलावों को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। इसरो के अनुसार, निसार मिशन का मुख्य उद्देश्य जमीन और बर्फ की सतह में बदलाव, जमीन के पारिस्थितिकी तंत्र और समुद्री क्षेत्रों का अध्ययन करना है। यह मिशन जंगलों की संरचना, फसल क्षेत्र में बदलाव, आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) की सीमा और जैविक सामग्री की मात्रा का आकलन करने में मदद करेगा। निसार मिशन की अवधि पांच साल होगी।

नासा ने कहा कि निसार मिशन से प्राप्त डाटा प्राकृतिक और मानवीय कारणों से होने वाले खतरों की भविष्यवाणी करने में मदद करेगा और सरकारों को निर्णय लेने के लिए पर्याप्त समय दे सकेगा। यह उपग्रह धरती की जमीन और बर्फ की सतह का त्रि-आयामी (थ्रीडी) दृश्य प्रदान करेगा और बादलों व हल्की बारिश के बावजूद दिन-रात डाटा भेजने में सक्षम होगा। इससे भूकंप और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा सकेगी और ग्लेशियरों में हो रहे बदलावों का भी आकलन किया जा सकेगा।

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निसार मिशन - फोटो : पीटीआई
यह उपग्रह अंटार्कटिका का भी अभूतपूर्व डाटा देगा, जिससे यह समझने में मदद मिलेगी कि वहां की बर्फ की चादरें समय के साथ कैसे बदल रही हैं। निसार अब तक का सबसे उन्नत रडार सिस्टम है जिसे नासा और इसरो ने मिलकर लॉन्च किया है और यह हर दिन पहले के किसी भी पृथ्वी उपग्रह की तुलना में अधिक डाटा जनरेट करेगा। इस मिशन से दोनों देशों को वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी में मदद मिलेगी। एल-बैंड रडार जंगलों की गहराई तक पहुंचकर उनकी संरचना की जानकारी देगा, जबकि एस-बैंड रडार फसलों की निगरानी करेगा। निसार से प्राप्त डाटा से शोधकर्ता यह जान पाएंगे कि जंगल, वेटलैंड और कृषि क्षेत्र समय के साथ कैसे बदल रहे हैं।
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डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय मंत्री - फोटो : एएनआई
निसार दुनिया के लिए गेम चेंजर साबित होगा : जितेंद्र सिंह
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने निसार के सफल प्रक्षेपण पर कहा, निसार केवल एक उपग्रह नहीं, यह भारत की विश्व के साथ वैज्ञानिक साझेदारी है। यह दुनिया के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगा। बुधवार को मीडिया बातचीत में उन्होंने कहा, यह मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्व बंधु दृष्टिकोण को साकार करता है, जिसमें भारत मानवता के सामूहिक कल्याण में योगदान देता है। इसरो और नासा के बीच पहला संयुक्त पृथ्वी अवलोकन मिशन होने के नाते, यह भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग और इसरो के अंतरराष्ट्रीय सहयोग में एक ऐतिहासिक क्षण है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह मिशन इसरो और नासा के सहयोग की दिशा में एक निर्णायक क्षण है। सिंह ने कहा, निसार न केवल भारत और अमेरिका की सेवा करेगा, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए डाटा मुहैया कराएगा। विशेष रूप से आपदा प्रबंधन, कृषि और जलवायु निगरानी जैसे क्षेत्रों में। उन्होंने कहा कि मिशन की एक प्रमुख विशेषता यह है कि निसार में दर्ज होने वाला डाटा अवलोकन के एक से दो दिनों के भीतर स्वतंत्र रूप से सुलभ हो जाएगा। आपात स्थिति में यह लगभग वास्तविक समय (रिअल टाइम) में डाटा उपलब्ध कराएगा।
 
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इसरो प्रमुख वी. नारायणन - फोटो : एएनआई (फाइल)
सफल प्रक्षेपण पर इसरो प्रमुख ने क्या कहा
इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने श्रीहरिकोटा से 102वें प्रक्षेपण के बाद कहा, मुझे यह घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि जीएसएलवी एफ-16 ने निसार उपग्रह को इच्छित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। निसार सभी मौसमों में काम करने वाला दिन और रात में तस्वीरें ले सकने वाला उपग्रह है, जो 12 दिनों के अंतराल पर पूरी पृथ्वी को स्कैन कर सकेगा। यह उपग्रह इसरो के एस-बैंड सिंथेटिक अपर्चर रडार को नासा के एल-बैंडआर पेलोड और 12 मीटर के अनफर्लेबल एंटीना के साथ एकीकृत करता है। यह अपनी तरह का पहला दोहरी आवृत्ति वाला आर उपग्रह है।
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निसार मिशन - फोटो : एएनआई
तकनीकी सहयोग में पथप्रदर्शक : नासा
नासा की उप-सह-प्रशासक केसी स्वेल्स ने कहा, यह मिशन न केवल हमारे तकनीकी सहयोग के संदर्भ में एक पथप्रदर्शक है, बल्कि पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में भी अनूठा है। यह दुनिया को दिखाता है कि दोनों देश क्या कर सकते हैं। लेकिन इससे भी बढ़कर, यह भारत और अमेरिका के बीच दशकों से चले आ रहे सहयोग संबंधों को और आगे बढ़ाएगा।
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NISAR सैटेलाइट - फोटो : एक्स/इसरो
दुनिया का सबसे महंगा मिशन
बताया जा रहा है कि बुधवार का मिशन दुनिया का सबसे महंगा मिशन था, जिसकी अनुमानित लागत 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 13000 करोड़ रुपये) थी। साथ ही, यह एसएसपीओ के लिए पहला जीएसएलवी मिशन था। अभी तक सभी जीएसएलवी मिशन भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में ही गए हैं।

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