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चीन-पाक की पकड़ में नहीं आएगी आईएनएस वेला, जानिए कितनी है ताकतवर

Mon, 06 May 2019 03:12 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आईएनएस वेला - फोटो : PTI
भारतीय नौसेना ने बुधवार को भारत में बनने वाली स्कॉर्पीन श्रेणी की चौथी पनडुब्बी आईएनएस वेला को पानी में उतारा। चीन और पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ाने वाली इस सबमरीन का निर्माण देश में ही निर्माण किया गया है। इसे नौसेना के आधुनिकीकरण के लिए एक बड़ी पहल माना जा रहा है। इस मौके पर जानते हैं आईएनएस वेला से जुड़ी कुछ खास बातें... 

 
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आईएनएस वेला - फोटो : ANI
वेला' एक स्वदेशी पनडुब्बी है, जो 'मेक इन इंडिया' के तहत तैयार की गई है। अपने आधुनिक फीचर्स की वजह से यह दुश्मन को ढूंढकर उस पर सटीक निशाना लगा सकती है। 



 
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आईएनएस वेला - फोटो : PTI
आईएनएस वेला स्टेल्थ और एयर इंडिपेंडेंट प्रॉपल्शन समेत कई तरह की तकनीकों से लैस है। जिससे इसका पता लगाना दुश्मनों के लिए आसान नहीं होगा।

 

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आईएनएस वेला - फोटो : PTI
आईएनएस वेला टॉरपीडो और ट्यूब लॉन्च्ड एंटी-शिप मिसाइल से हमला करने में सक्षम है।
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भारतीय पनडुब्बी (फाइल फोटो)
युद्ध की स्थिति में वेला पनडुब्बी हर तरह की अड़चनों से सुरक्षित और बड़ी आसानी से दुश्मनों को चकमा देकर बाहर निकल सकती है। 

 
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नौसेना अध्यक्ष - फोटो : PTI
वेला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी भी रडार की पकड़ में नहीं आएगी। इसके अलावा इससे जमीन पर भी आसानी से हमला किया जा सकता है। 

 
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भारतीय पनडुब्बी (फाइल फोटो) - फोटो : self
इस पनडुब्बी का इस्तेमाल हर तरह के वॉरफेयर, ऐंटी-सबमरीन वॉरफेयर और इंटेलिजेंस के काम में भी किया जा सकता है। 

 

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भारतीय पनडुब्बी (फाइल फोटो)
इस पनडुब्बी को मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड ने फ्रांसीसी कंपनी मेसर्स नेवल ग्रुप (पहले डीसीएनएस) के साथ ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के करार के तहत बनाया है।

 

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भारतीय पनडुब्बी (फाइल फोटो)
स्कॉर्पियन क्लास की छह पनडुब्बियों में से भारत को तीन पनडुब्बी आईएनएस कलवारी, खांडेरी और करंज पहले ही मिल चुकी हैं। जबकि जिन दो पनडुब्बियों का निर्माण होना बाकी है उनका नाम वागीर और वागशीर है। 
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भारतीय पनडुब्बी (फाइल फोटो) - फोटो : SELF
भारत सरकार ने 2005 में फ्रांसीसी कंपनी मेसर्स नेवल ग्रुप (पहले डीसीएनएस) के साथ ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत करार किया था। इस सौदा की कीमत 3.5 बिलियन यूएस डॉलर थी।
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