भारतीय नौसेना की ताकत अब और बढ़ गई है। बुधवार को देश में बने पहले हैवीवेट एंटी सबमरीन टॉरपीडो 'वरुणास्त्र' को नौसेना में शामिल किया गया। 'वरुणास्त्र' पानी में 40 नॉटिकल माइल/घंटे की स्पीड से दुश्मन के जंगी जहाज (पानी में चलने वाले लड़ाकू जहाज) और सबमरीन (पनडुब्बी) पर हमला करने में समर्थ है। तस्वीरों में जानें, नौसेना के इस नए हथियार के बारे में..
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चीन की चुनौती से निपटने के लिए भारतीय नौसेना में शामिल हुआ 'वरुणास्त्र'
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- फोटो : drdo
इस मिसाइल (टारपीडो) को भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) ने डीआरडीओ की नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी (NSTL) में इसे विकसित किया गया है। बीडीएल के मुताबिक, 'यह मेक इन इंडिया लाइटवेट फाइटर प्लेन तेजस बनाने के बाद स्वदेशी हथियार विकसित करने की दिशा में देश की एक बड़ी कामयाबी है।
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'वरुणास्त्र' के हाल ही में बंगाल की खाड़ी में किए गए परीक्षण में पूरी तरह से सफल रहा था। परीक्षण के दौरान यह समंदर के भीतर सैकड़ों किलोमीटर दूर तक मार करने में सफल रहा। कामयाब परीक्षण के बाद इसे नौसेना में शामिल करने का फैसला लिया गया था।
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वरुणास्त्र की खासियत यह है कि यह पानी में 40 नॉटिकल माइल/घंटे की रफ्तार से 250 किलोग्राम विस्फोटक के साथ दुश्मन के वारशिप (पानी में चलने वाले लड़ाकू जहाज) और सबमरीन पर हमला कर सकता है। इस टॉरपीडो के निर्माण का 95 प्रतिशत हिस्सा स्वदेशी है।
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भारतीय नौसेना में वरुणास्त्र शामिल होने के साथ ही भारत उन आठ देशों की जमात में शामिल हो गया है, जिनके पास इस तरह की टॉरपीडो मिसाइल बनाने की क्षमता है।