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बातों का बाजीगर है ये कर्नल, हथियारों से लैस पाक फौज से बचाई थी शेख हसीना की जान

Sun, 09 Apr 2017 11:26 AM IST
amarujala.com- Written by: राघवेंद्र मिश्र
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आशोक तारा (फाइल)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने साल 1971 के युद्ध में शहीद भारतीय सैनिकों के परिवारों को सम्मानति किया। इस दौरान बांग्लादेश के प्रथम परिवार को पाकिस्तानी सैनिकों से बचाने नवाले कर्नल (रिटायर्ड) अशोक तारा सबसे खास रहें। बताते चलें कि साल 2012 में उन्हें शेख हसीना ने 'फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश' का अवार्ड भी दिया था।
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अशोक तारा को सम्मानित करते।
साल 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना के 93 हजार सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने सरेंडर कर दिया था। लेकिन, इस बीच बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के परिवार को पाकिस्तानी फौज ने ढाका एयरपोर्ट के पास धानमंधी इलाके में बंधक बनाकर रखा था। इसमें उनकी 24 साल की उनकी बेटी शेख हसीना और उनका बच्चा भी शामिल था। इसकी जानकारी होने पर तत्कालीन मेजर अशोक तारा को उनके परिवार को बचाने की जिम्मेदारी दी गई। 
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अशोक तारा
अशोक तारा अपने तीन साथियों के साथ उन्हें बचाने के लिए धानमंडी पहुंचे। हथियारों से लैस पाकिस्तानी फौजियों से बिना डरे हुए वह अपने साथियों और हथियारों को बाहर ही छोड़ कर घर में घुस गए। पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें गोली मारने की चेतावनी दी, लेकिन वह बिना डरे हुए अंदर घुस गए।

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शेख हसीना की फैमिली के साथ अशोक तारा
अशोक तारा ने हिंदी और पंजाबी में पाकिस्तानी सैनिकों को समझाने की कोशिश की। तारा ने कहा, 'उन्हें नहीं मालूम था कि पाकिस्तानी सेना के सरेंडर के बाद युद्ध खत्म हो चुका है। मैंने उन्हें कहा कि यह सच नहीं होता तो मैं यहां निहत्था नहीं खड़ा होता। इस बीच आसमान में भारतीय हेलिकॉप्टर दिखे, जिससे मेरी बात की पुष्टि हुई। मैं पाकिस्तानी सैनिकों को भरोसा दिलाया कि उन्हें सुरक्षित जाने दिया जाएगा। मेरे समझाने के बाद उन्होंने बंगबंधु के परिवार को छोड़ दिया।'
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मोदी और शेख हसीना
अशोक तारा साल 1963 में भारतीय सेना के 14 गार्ड में कमीशंड हुए थे। वह साल 1994 में कर्नल पद से रिटायर हुए। बताते चलें कि साल 1971 का युद्ध 13 दिन तक चला था और इसमें भारत के 3842 सैनिक शहीद हुए थे। 
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