भारतीय सेना के जवान जल्द ही नई तकनीकी वाले पिठ्ठू बैग (रकसैक) से लैस दिखाई देंगे। इन बैग्स में पहले से ज्यादा जगह होगी साथ ही यह कठिन परिस्थितियों और मौसम में जवानों की मददगार भी होंगी। जो सैनिकों को बीहड़ इलाकों में सहायता प्रदान करेंगी।
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भारतीय सेना की एलीट कमांडो यूनिट और जवान लंबे मिशन पर जाने के लिए इस तरह के बैग्स का इस्तेमाल करते हैं। भारतीय रक्षा मंत्रालय लंबे समय से सेना के लिए एक उन्नत किस्म के बैग की तलाश कर रहा था।
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इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह टेंडर आउटडोर गियर और ट्रेक-ट्रैवल परिधान कंपनी वाइल्डक्राफ्ट इंडिया को मिला है। बताया जा रहा है कि बंगलूरू की यह कंपनी पिछले पांच साल से रक्षा मंत्रालय के साथ बातचीत कर रही थी।
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मार्कोज कमांडो
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वाइल्डक्राफ्ट इंडिया के कोफाउंडर सिद्धार्थ सूद के अनुसार, हमने भारतीय सेना के लिए रूकसैक बनाने का मंत्रालय से कई मिलियन डॉलर का ऑर्डर प्राप्त किया है।
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उन्होंने बताया कि इन बैग्स की मदद से भारतीय जवान चुनौतीपूर्ण इलाके में अधिक से अधिक समय बिता सकते हैं। सेना को इसकी सप्लाई 2020 से शुरू कर दी जाएगी।
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सिद्धार्थ सूद ने कहा कि भारत में बैग उद्योग दो बिलियन यूएस डॉलर का है। जो हर साल 7 से 10 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। पर्यटन के क्षेत्र में विकास की दर भी लगभग यही है।
पड़ोसी देशों के संभावित खतरों को देखते हुए रक्षा मंत्रालय सेना के आधुनिकीकरण पर जोर दे रहा है। इसी क्रम में सुरक्षाबलों के लिए उन्नत हथियार और साजो-सामान को फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत खरीदा जा रहा है।