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Year Ender 2019: चंद कदम पहले टूटा चांद छूने का सपना, डेढ़ मिनट में टूटे करोड़ों दिल

Mon, 09 Dec 2019 12:48 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इसरो सेंटर में चंद्रयान-2 - फोटो : ISRO
दिल दुखा है लेकिन टूटा तो नहीं है, उम्मीद का दामन छूटा तो नहीं है...

हम भारतीयों ने साल 2019 में एक सपना देखा और अपनी मेहनत के दम पर उसे साकार करने के बेहद करीब भी पहुंचे। सात सितंबर 2019 की रात को हम बस चांद छूने ही वाले थे, लेकिन आखिरी क्षणों में चंद्रयान—2 की क्रैश लैंडिंग से सपना टूट गया। इस एक घटना से करोड़ों भारतीयों का दिल दुखा जरूर, लेकिन हौसला नहीं टूटा। और हमने चंद्रयान—3 की तैयारियां शुरू कर दी हैं। 

साल 2019 को चंद्रयान-2 की वजह से याद किया जाएगा। 2019 में कई बड़ी घटनाएं घटीं जिनमें भारत का मिशन चंद्रयान-2 भी शामिल है। इतिहास रचने से चंद कदम पहले यानी विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग से सिर्फ डेढ़ मिनट पहले भारत का सपना अधूरा रह गया था।  
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विक्रम लैंडर - फोटो : ISRO

आखिरी डेढ़ मिनट में इतिहास बनाने से चूका भारत

सात सितंबर 2019 को भारत के चंद्रयान-2 मिशन को उस समय झटका लगा जब 2.1 किलोमीटर पहले रात के लगभग 1:55 बजे इसरो का लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया। 13 मिनट 48 सेकंड तक सब कुछ बिल्कुल इसरो की योजनानुसार चल रहा था लेकिन आखिरी डेढ़ मिनट ने भारत के इस मिशन को इतिहास बनने से रोक दिया। 

करोड़ों भारतवासी चांद पर भारत के पहुंचने का इंतजार कर रहे थे लेकिन दुर्भाग्यवश उनके हाथ मायूसी लगी। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बंगलूरू स्थित इसरो सेंटर में मौजूद थे। उन्होंने वैज्ञानिकों को हौसला न खोने की सलाह दी और उनकी पीठ थपथपाई।
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विक्रम लैंडर - फोटो : ISRO

पूरे देश ने किया इसरो के जज्बे को सलाम

यह मिशन बेशक सफलता के इतने करीब पहुंचकर चूक गया हो लेकिन पूरे देश ने इसरो के जज्बे को सलाम किया। विक्रम को सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी, मगर उसे हार्ड लैंडिंग का शिकार होना पड़ा।

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इसरो

इसरो को थी दोबारा संपर्क की उम्मीद

हार्ड लैंडिंग पर इसरो के एक वैज्ञानिक ने कहा था कि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगे कैमरे ने जो तस्वीरें भेजी हैं, उससे यह पता चला है कि विक्रम की हार्ड लैंडिंग हुई थी। इससे विक्रम में कोई टूट-फूट नहीं हुई है। मेरा मानना है कि विक्रम से अब भी संपर्क हो सकता है।
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के. सिवन - फोटो : ISRO

95 फीसदी सफल था चंद्रयान-2

चंद्रयान 2 का विक्रम लैंडर चांद की सतह पर लैंडिंग से चूक गया हो लेकिन इसरो के हौसले बुलंद थे। इसरो प्रमुख के सिवन ने चंद्रयान 2 मिशन को 95 फीसदी सफल बताया था। उन्होंने कहा था कि आखिरी चरण ठीक से पूरा नहीं किया जा सका, उसी चरण में हमने विक्रम से संपर्क खो दिया। 
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इसरो में पीएम मोदी - फोटो : PTI

पीएम मोदी ने की थी हौसलाअफजाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हौसलाअफजाई करने पर सिवन ने कहा था कि प्रधानमंत्री प्रेरणा और समर्थन का स्रोत रहे। उनका भाषण प्रेरणादायक था। उनके भाषण में मुझे वो लाइन खास लगी जिसमें उन्होंने कहा कि विज्ञान को परिणाम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, प्रयोग के तौर पर देखा जाना चाहिए और इसी से नतीजा मिलता है।
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इसरो ने ट्वीट कर धन्यवाद किया - फोटो : Twitter

इसरो ने अदा किया पीएम मोदी का शुक्रिया

पीएम मोदी द्वारा तारीफ किए जाने पर इसरो ने कहा था कि 'हमारे साथ खड़े रहने के लिए आपका शुक्रिया। हम दुनियाभर में सभी भारतीयों की आशाओं और सपनों को पूरा करने की कोशिश करते रहेंगे। हमें प्रेरित करने के लिए शुक्रिया।’

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विक्रम लैंडर

आखिरी चंद पलों में टूटा सपना

अपनी 47 दिनों की यात्रा के दौरान चंद्रयान-2 ने कई मुश्किल पड़ाव पार किए थे। आखिर में उसे लैंडर विक्रम के जरिए रोवर प्रज्ञान को चांद की सतह पर उतारना था। इस प्रक्रिया के तहत विक्रम की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराई जानी थी लेकिन गति अनियंत्रित होने के कारण उसने हार्ड लैंडिंग की और वैज्ञानिकों का उससे संपर्क टूट गया।

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सांकेतिक तस्वीर

दुनिया ने माना इसरो का लोहा

चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने बाद में चांद की सतह पर तिरछे पड़े लैंडर विक्रम की तस्वीर भेजी थी जिसके बाद उससे दोबारा संपर्क स्थापित करने की उम्मीद जाग गई थी। इसरो ने भी उससे संपर्क स्थापित करने की कई कोशिशें कीं लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।

इससे रोवर प्रज्ञान के जरिए चांद की सतह की जानकारी इकट्ठा करने में बेशक बाधा आई लेकिन दुनिया ने न केवल इसरो का लोहा माना बल्कि उसकी प्रशंसा भी की।

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नासा

नासा ने की इसरो की तारीफ

चंद्रयान 2 मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की नासा भी तारीफ की थी। नासा ने कहा था कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम’ की सॉफ्ट लैंडिंग कराने की भारत की कोशिश ने उसे ‘प्रेरित’ किया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि वह भारतीय एजेंसी के साथ सौर प्रणाली पर अन्वेषण करना चाहती है।

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चंद्रयान 2 का ऑर्बिटर - फोटो : ISRO

अमेरिका के कार्यवाहक सहायक मंत्री ने की तारीफ

दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए अमेरिका के कार्यवाहक सहायक मंत्री एलिस जी वेल्स ने ट्वीट किया था, हम चंद्रयान 2 के संबंध में इसरो के बेहतरीन प्रयास के लिए उसे बधाई देते हैं। यह मिशन भारत के लिए एक बड़ा कदम है और वैज्ञानिक खोज को आगे बढ़ाने के लिए मूल्यवान आंकड़े मुहैया कराता रहेगा। हमें कोई शक नहीं है कि भारत अंतरिक्ष संबंधी अपनी महत्वकांक्षाओं को पूरा करेगा।

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नासा

नासा ने ढूंढ निकाला विक्रम लैंडर का मलबा

भारत के महत्वकांक्षी चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर के मलबे को करीब तीन महीने बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने ढूंढ निकाला। नासा ने मंगलवार सुबह अपने लूनर रेकॉन्सेन्स ऑर्बिटर (एलआरओ) से ली गई एक तस्वीर जारी की है। जिसमें विक्रम लैंडर से प्रभावित स्थान दिखाई दे रहा है। नासा ने एक बयान जारी करते हुए कहा चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर मिल गया है। 

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सांकेतिक तस्वीर

52 फीसदी मिशन ही हुए कामयाब

अब तक चंद्रमा पर दुनिया के सिर्फ छह देशों या एजेंसियों ने सैटेलाइट यान भेजे हैं। कामयाबी सिर्फ पांच को ही मिली है। चंद्रमा पर जाने के 38 प्रयास किए गए जिनमें से सिर्फ 52 प्रतिशत ही सफल रहे हैं। 

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इसरो

चंद्रयान-3 की तैयारियां शुरू

2019 में मिशन चंद्रयान-2 में विफल होने के बाद भी भारत की उम्मीदें कम नहीं हुई हैं। अब इसरों अपने नए प्रोजेक्ट च्रंदयान-3 की तैयारी में जुट गया है। सरकार ने भी चंद्रयान-3 प्रोजेक्ट की तैयारी शुरू कर दी है और इसके लिए संसद से 75 करोड़ रुपये आवंटित करने की मंजूरी मांगी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर

75 करोड़ की धनराशि आवंटित करने की मंजूरी

संसद में पेश वर्ष 2019-20 की पूरक अनुदान मांगों के दस्तावेज से यह जानकारी प्राप्त हुई है। चालू वित्त वर्ष के लिए अनुदान मांगों के पहले बैच के तहत सरकार ने अंतरिक्ष विभाग के मद में नई परियोजना चंद्रयान-3 के लिए 75 करोड़ धनराशि आवंटित करने की संसद से मंजूरी मांगी है। ये धनराशि दो श्रेणियों में मांगी गई है।
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