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बरसाना के हुरियारों पर बरसीं प्रेम पगी लाठियां

Sat, 19 Mar 2016 01:06 AM IST
जितेंद्र पुजारी/ अमर उजाला, नंदगांव
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लठमार होली - फोटो : amar ujala
बरसाना की रंगीली होली के अगले ही दिन श्रीराधारानी और उनकी सखियां होली का फगुवा (नेग) मांगने नंदभवन (नंदगांव) में पहुंच गई। बहाना फगुवा और मन में लालसा कन्हैया से एक बार और होली खेलने की थी। इधर नंदगांव के हुरियारे भी बरसाने में हार का बदला लेने की मंशा लिए थे। होली के लिए दोनों ही तरफ बेताबी रही। शाम होते-होते होली का ये उल्लास अपने शिखर पर पहुंच गया। प्रेम पगी लाठियों ने अलौकिक प्रेम बरसाया।
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नंदभवन में पीला पटुका लपेटे पहुंचा गोस्वामी बालक

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बरसाना
दोपहर के ढाई बजे नंदभवन में एक हाथ में पिचकारी लिए और गले में पीला पटुका लपेटे गोस्वामी बालक पहुंचा और खबर दी कि बरसाने वाले यशोदाकुंड स्थित गोशाला में आ चुके हैं। 
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गोप-ग्वाले बरसाना से आए हुरियारों को रंग से सराबोर ‌‌करते हैं

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हुरियारे
रंग-बिरंगी पागों और दुपट्टों से हुरियारों का सिर सजा हुआ है। नंदगांव के गोप-ग्वाले बरसाना से आए हुरियारों को टेसू के फूलों के रंग से सराबोर करने लगते हैं। होली के पदों के साथ अबीर-गुलाल हवाओं में तैरने लगता है। सभी समाजी एकत्रित होते हैं और पारंपरिक वेशभूषा से सुसज्जित नंदगांव, बरसाना के ग्वालवालों के मध्य अष्टछाप के कवियों के पदों का संयुक्त समाज गायन शुरू करते हैं। 

महिलाएं सितारे जड़े लहंगा-चुनरी पहन दरवाजे पर खड़ी होने लगीं

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म‌हिलाएं
समाज गायन में ठाकुरजी को अनुराग युक्त गालियां भी सुनाई जाती हैं। इधर महिलाएं सितारे जड़े लहंगा-चुनरी पहन लंबा घूंघट काढ़कर अपने-अपने दरवाजे पर खड़ी होने लगीं। वहीं नंदभवन में करीब एक घंटे तक रंगों से सराबोर होने के बाद बरसाने के हुरियारे नंदगांव की गोपियों से हंसी-मजाक करते हुए रंगीली गली से निकलने लगे। 
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इत आईं ब्रजबाल, मृगनैनी गज गामिनी...

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होली
गोपियों के साथ होली के रसियों का गायन कर नृत्य किया। सोलह शृंगार से सजी ग्वालिन लाठी लिए तैयार थीं। इत आईं ब्रजबाल, मृगनैनी गज गामिनी, टेके हैं मदन गुपाल, घन घेरयौ जनौं दामिनी। गोपियों को उकसाने के लिए हुरियारे उनको प्रेम पगी गालियां सुनाते हुए होली चौक पर एकत्र होने लगे। 
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रियारिनों ने जमकर लाठियां बरसाईं,हुरियारे उनको फूलों की टहनियां मान, मार खाते रहे

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हुरियारे
समाज का इशारा मिलते ही हुरियारिनों ने जमकर लाठियां बरसाईं और प्रेम में मगन हुरियारे उनको फूलों की टहनियां मान, मार खा-खाकर निहाल हुए। सांझ ढलने लगी। समाज का आदेश हुआ कि सूर्यदेव छिप गए हैं, लठमार बंद की जाए। बरसाना के हुरियारे गोपियों के चरणस्पर्श कर बरसाने को कूच कर गए। 
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