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भाजपा को आंख दिखाने वाली शिवसेना का इतिहास, पहली बार में ही चुने गए थे 52 विधायक

Sun, 10 Nov 2019 10:29 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शिवसेना का इतिहास
भाजपा ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने से इनकार कर दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि पार्टी महाराष्ट्र में सरकार नहीं बनाएगी। शिवसेना पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि शिवसेना ने जनादेश का अपमान किया है। 

वहीं, राज्यपाल ने शिवसेना से सरकार बनाने के बारे में पूछा है। शिवसेना में भी सरकार बनाने को लेकर उत्साह नजर आ रहा है। जो शिवसेना आज भाजपा को आंख दिखा रही है क्या आप उसके इतिहास के बारे में जानते हैं?
 
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बाल ठाकरे (फाइल फोटो)
बाला साहेब ठाकरे ने महाराष्ट्र के स्थानीय लोगों के अधिकारों के संघर्ष के लिए 19 जून 1966 को शिवसेना की नींव रखी थी। ठाकरे मूल रूप से कार्टूनिस्ट थे और राजनीतिक विषयों पर तीखे कटाक्ष करते थे। वैसे तो शिवसेना कई राज्यों में मौजूद है लेकिन इसका राजनीतिक प्रभाव महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा है।
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बाल ठाकरे (फाइल फोटो)
शिवसेना के गठन के समय बाला साहेब ठाकरे ने नारा दिया था, 'अंशी टके समाजकरण, वीस टके राजकरण' (80 प्रतिशत समाज और 20 फीसदी राजनीति)। लेकिन भूमिपुत्र का मुद्दा लंबे समय तक नहीं चल सका। इसपर समर्थन कम होने के कारण शिवसेना ने हिन्दुत्व के मुद्दे को अपना लिया, जिसपर वह अब तक कायम है।

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शिवसेना
1970 के शुरुआती दिनों में पार्टी को काफी लोकप्रियता मिली। इस दौरान दूसरे राज्यों विशेष रूप से दक्षिण भारतीय लोगों पर महाराष्ट्र में काफी हमले हुए। 1970 के बाद शिवसेना का भूमिपुत्र का दांव कमजोर होने लगा। इसपर पार्टी ने हिंदुत्व के मुद्दे पर आगे बढ़ना शुरू किया। 
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बाल ठाकरे (फाइल फोटो)
शिवसेना ने पहली बार 1971 में लोकसभा चुनाव में लड़ा था लेकिन पार्टी एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो सकी। 1989 के लोकसभा चुनाव में पहली बार शिवसेना का सांसद चुना गया। शिवसेना ने पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 1990 में लड़ा जिसमें उसके 52 विधायकों ने जीत हासिल की।
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भाजपा, शिवसेना
शिवसेना ने भाजपा के साथ 1989 में गठबंधन किया था जो 2014 तक चला। 2014 का विधानसभा चुनाव दोनों दलों ने एक दूसरे से अलग होकर लड़ा। उसके बाद दोनों पार्टियों ने मिलकर प्रदेश में सरकार बनाई। भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाया गया।
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उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
बाला साहेब के पुत्र उद्धव ठाकरे फिलहाल शिवसेना प्रमुख हैं। शिवसेना का चुनाव चिह्न धनुष-बाण है, जबकि प्रतीक चिह्न बाघ है। शिवसेना की पहचान हिन्दूवादी राजनीतिक दल के रूप में होती है। 2018 के अंत में उद्धव ठाकरे ने अयोध्या में रामलला के दर्शन कर राम जन्मभूमि मुद्दे को हवा दी थी।

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मुंबई महानगर पालिका
शिवसेना के दो नेता मनोहर जोशी और नारायण राणे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) पर भी लंबे समय से शिवसेना का कब्जा है। पार्टी के पास 16वीं लोकसभा में 18 सांसद और राज्यसभा में तीन सांसद हैं। 
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उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
शिवसेना की युवा विंग भी है। इसे युवा सेना कहा जाता है। इसके मुखिया बाल ठाकरे के पोते और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे हैं। 
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