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Ganesh Chaturthi Photos: लालबागचा राजा समेत देशभर में गणपति बप्पा की पूजा, श्रद्धालुओं के बीच आस्था-भक्ति...

Wed, 27 Aug 2025 12:01 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ...आज से पूरे देश में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व शुरू हो गया है। श्रद्धा और भक्ति में डूबे श्रद्धालु बप्पा का धूमधाम से स्वागत कर रहे हैं। मुंबई के लालबागचा राजा से लेकर देश के कई राज्यों में गणपति प्रतिमाओं की स्थापना कर भक्त पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की कतार दिख रही है। भक्तों की धूम और उल्लास देख कर ये कहना गलत नहीं होगा कि इस साल गणेशोत्सव का रंग कुछ खास और गहरा दिखाई दे रहा है। आइए तस्वीरों के माध्यम से देखते है कि भारतवर्ष में गणेश चतुर्थी को लेकर कैसा माहौल है। खास तस्वीरों में देखिए

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मुंबई के लालबागचा राजा में गणेश उत्सव की तैयारी - फोटो : PTI

पूरे देश में आज से गणपति बप्पा की उपासना शुरू होगी। गणेश चतुर्थी के इस पावन अवसर पर भक्ति में डूबे भक्त पंडालों में उमड़ेंगे। मुंबई के लालबागचा राजा से लेकर देश के कई हिस्से में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। हर पंडाल, हर घर और तमाम भक्त पूरे श्रद्धाभाव से हर साल की तरह इस वर्ष भी गणेश चतुर्थी मनाएंगे। देश के अलग-अलग हिस्सों से आई तस्वीरों को देखकर ये कहना गलत नहीं होगा कि इस साल गणेशोत्सव का रंग कुछ खास और गहरा दिखाई दे रहा है।

मुंबई का सबसे प्रसिद्ध गणेशोत्सव लालबागचा राजा के बैनर तले होता है। हर साल की तरह इस वर्ष भी यहां का विशेष आकर्षण श्रद्धालुओं को अपनी तरफ खींच रहा है। लालबागचा राजा में इस बार बप्पा को राजसी पोशाक पहनाकर राजदरबार में विराजमान किया गया है, जो परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम है। पंडाल की सजावट में शुद्ध पर्यावरणीय सामग्री का उपयोग कर इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया जा रहा है।

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जयपुर में गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे भक्त। - फोटो : PTI

इको-फ्रेंडली मूर्तियों की बढ़ी मांग
इस साल विशेष बात यह है कि लोग प्राकृतिक और मिट्टी से बनी गणेश मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह शुद्ध मिट्टी, बीज गणेश और पौधों के साथ आने वाले ‘हरित बप्पा’ लोगों के दिलों में जगह बना रहे हैं। यह पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।

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हैदराबाद में गणेश चतुर्थी उत्सव पर एक कलाकार ऑपरेशन सिंदूर थीम पर आधारित 'पंडाल' तैयार किया। - फोटो : PTI

देशभर में विविध रूपों में दिखे गणपति
देशभर के हर राज्य, हर शहर में बप्पा का अलग-अलग रूप देखने को मिल रहा है। कहीं बाल गणेश, तो कहीं महाकाय गणपति, कहीं स्वर्ण आभूषणों से सजे गणराज, तो कहीं कागज और मिट्टी से बने पर्यावरण-संरक्षक बप्पा। दिल्ली, पुणे, नागपुर, बेंगलुरु, कोलकाता, और अहमदाबाद में भी भव्य झांकियों और सजावटों के साथ गणपति बप्पा का स्वागत किया गया। इसी दौरान हैदराबाद में गणपति का अलग अंदाज देखा गया। गणेश चतुर्थी उत्सव पर एक कलाकार ऑपरेशन सिंदूर थीम पर आधारित 'पंडाल' तैयार किया, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल को भी दिखाया गया। 

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सोमवार को मुंबई में 'गणेश चतुर्थी' उत्सव की पूर्व संध्या पर तैयारियों में लगे श्रद्धालु। - फोटो : PTI

भक्ति के साथ तकनीक का मेल
इस बार कई पंडालों में डिजिटल दर्शन की सुविधा भी दी गई है। भक्त ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए भी अपने आराध्य के दर्शन कर पा रहे हैं। कई मंदिरों और मंडलों ने एआर/वीआर तकनीक का इस्तेमाल कर श्रद्धालुओं को अनोखा अनुभव दिया है।
 

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कोलकाता में गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर भगवान गणेश की मूर्ति ले जाते श्रद्धालु - फोटो : PTI

भावना और आस्था का उत्सव
गणेश चतुर्थी सिर्फ एक पर्व नहीं, भावना और आस्था का पर्व है। यह वह समय होता है जब लोग गिले-शिकवे भुलाकर एक साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं। बप्पा को ‘विघ्नहर्ता’ और ‘मंगलकर्ता’ माना जाता है, जो दुखों को हरते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

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मुंबई में गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर भगवान गणेश की मूर्ति ले जाते श्रद्धालु। - फोटो : PTI

क्या है इस बार की खास थीम?
कई मंडलों ने इस बार राष्ट्रीय एकता, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता अभियान, और जल संरक्षण जैसे सामाजिक संदेशों को भी अपनी झांकी का हिस्सा बनाया है। यह दिखाता है कि भक्ति के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी भी निभाई जा रही है।

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पश्चिम बंगाल के बालुरघाट में भी गणेश चतुर्थी का उल्लास। नाव पर भगवान गणेश की मूर्ति ले जाते लोग। - फोटो : PTI
भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष को मनाई जाती है गणेश चतुर्थी 
वैसे तो रोजाना ही भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन भादों माह प्रभु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था, जिसकी खुशी में देशभर में गणेश चतुर्थी मनाई जाती है।

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नागपुर में गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर श्रद्धालु। बारिश से बचाने के लिए प्लास्टिक शीट से भगवान गणेश की मूर्ति ढकते लोग। - फोटो : PTI
10 दिनों तक भक्त करते है विधिनुसार बप्पा की उपासना
इस दौरान भक्तजन घरों, दफ्तरों, दुकानों और मंदिरों में गणपति जी की मूर्ति को स्थापित करते हैं और 10 दिनों तक उनकी विधिनुसार उपासना करते हैं। इसके अलावा प्रभु की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए मोदक, मोतीचूर लड्डू, खीर और मालपुआ जैस भोग लगाए जाते हैं, जिसे बेहद शुभ माना जाता है। इस वर्ष 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। 

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नागपुर में गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर गणपति बप्पा की मूर्ति ले जाते श्रद्धालु। बारिश से बचाव के लिए प्लास्टिक शीट से ढका। - फोटो : PTI
क्या है गणेश चतुर्थी दुर्लभ संयोग 
देखा जाए तो इस बार गणेश चतुर्थी पर प्रीति, सर्वार्थ सिद्धि, रवि के साथ इंद्र-ब्रह्म योग का संयोग बना रहेगा। वहीं कर्क में बुध और शुक्र के होने से लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण होगा। इसके अलावा गणेश चतुर्थी पर बुधवार का महासंयोग तिथि की महत्ता को गई गुना बढ़ा रहा है।

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ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर सुदर्शन पटनायक का सैंड आर्ट - फोटो : एएनआई

गणेश चतुर्थी पर सुदर्शन पटनायक ने अनोखे अंदाज में दिया आत्मनिर्भर भारत का संदेश
गणेश चतुर्थी पर इस बार मशहूर रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने अनोखी रचना बनाई है। हर साल की तरह इस बार भी उन्होंने बालू से गणेश जी की मूर्ति बनाई, लेकिन खास बात यह है कि इसमें 1500 नींबुओं का उपयोग किया गया है। अपनी इस रचना के बारे में पटनायक ने बताया कि हम हर साल गणेश चतुर्थी के मौके पर कुछ नया करते हैं। इस बार हमने नींबुओं के साथ एक विशेष प्रतिमा बनाई है। इसके साथ ही, इस रचना के जरिए हम प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संदेश को भी आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस मूर्ति के माध्यम से “मेक इन इंडिया, वोकल फॉर लोकल और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे अभियानों” को भी दर्शाया गया है। साथ ही भगवान गणेश का आशीर्वाद आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रतीक रूप में दिखाया गया है।

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नवी मुंबई में गणेश चतुर्थी उत्सव की पूर्व संध्या पर लोग भगवान गणेश की मूर्ति ले जाते हुए। - फोटो : PTI
जानिए क्या है पूजा मुहूर्त
चलिए अब आपको इस बार गणेश चतुर्थी के पूजा मुहर्त के बारे में बताते है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने का सबसे शुभ समय मध्याह्न काल होता है, क्योंकि मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म इसी समय हुआ था। इसलिए इस दिन पूजा-अर्चना के लिए मध्याह्न का मुहूर्त सबसे उत्तम माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, 27 अगस्त 2025 को सुबह 11:06 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक का समय गणेश पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ रहेगा। इस समय में पूजा करने से गणपति बप्पा की कृपा अधिक प्रबल होती है और व्रत तथा अनुष्ठान फलदायी माने जाते हैं।
 

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हैदराबाद में गणेश चतुर्थी की धूम। भगवान गणेश की 69 फुट ऊंची इको फ्रेंडली मूर्ति। मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से निर्माण। - फोटो : PTI

गणेश मंत्र जाप
गणेश चतुर्थी 2025 पर भगवान गणेश की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से उनकी कृपा बनी रहती है और सभी विघ्न दूर होते हैं। आप निम्नलिखित मंत्रों का ध्यान लगाकर उच्चारण कर सकते हैं-

  • ॐ गं गणपतये नमः
  • ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
  • ॐ एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्। विघ्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥

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महाराष्ट्र में गणपति बप्पा की प्रतिमा ले जाते श्रद्धालु। - फोटो : PTI
गणेश चतुर्थी के दिन घर लाए खास चिजें
शास्त्रों के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन कुछ खास चीजें घर में लाना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन चीजों से भगवान गणेश जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं  गणेश चतुर्थी के दिन किन वस्तुओं को घर लाने से शुभफल मिलता है। 

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महाराष्ट्र में गणपति बप्पा की उपासना के लिए प्रतिमा ले जातीं श्रद्धालु। - फोटो : PTI
बप्पा विध्नहर्ता और बुद्धि के देवता
इस अवसर पर भक्तगण अपने घरों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित करते हैं और दस दिनों तक विधि विधान के साथ उनकी पूजा करते हैं। गणेश जी को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माना जाता है, इसलिए उनका यह पर्व सभी बाधाओं को दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक है।
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महाराष्ट्र के नागपुर में गणेश चतुर्थी उत्सव की पूर्व संध्या पर भगवान गणेश की मूर्ति ले जाते श्रद्धालु। - फोटो : PTI

जानें क्या है गणेश स्थापना विधि 
अब अंतिम में बात अगर गणेश स्थापना विधि की करे तो गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की स्थापना करना एक पवित्र और शुभ कार्य माना जाता है, जिसे खासतौर पर मध्याह्न मुहूर्त में किया जाता है क्योंकि यह समय पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। सबसे पहले, एक साफ-सुथरी चौकी लेकर उस पर पीला या लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर अक्षत (चावल), हल्दी, कुमकुम और सुपारी अर्पित करें। इसके बाद फिर गणपति जी की मूर्ति के दाहिनी ओर तांबे या पीतल के कलश में शुद्ध जल भरकर रखें।

ऋद्धि-सिद्धि के स्वरूप दो सुपारियां भी स्थापित करें
इस दौरान गणेश जी के साथ ऋद्धि-सिद्धि के स्वरूप दो सुपारियां भी स्थापित करें। स्थापना के समय ‘अस्य प्राण प्रतिष्ठां तु, अस्य प्राणा: क्षरंतु च। श्री गणपते त्वं सुप्रतिष्ठ वरदे भवेताम॥’ इस मंत्र का जाप करें, जिससे गणपति जी की पूजा प्रभावशाली हो। इसके बाद भगवान गणेश को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं और उन्हें ताजे फूल, दूर्वा की पत्तियां, माला, मोदक और अन्य भोग अर्पित करें। पूजा समाप्ति पर उनकी आरती करें और गणेश चतुर्थी की कथा का पाठ करके इस शुभ अवसर को पूर्ण करें। 

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