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बाढ़ से बिगड़े हालात, कहीं कार तो कहीं डूबी नाव, तस्वीरें

Wed, 24 Aug 2016 05:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो: वाराणसी/मिर्जापुर/भदोही/इलाहाबाद
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बाढ़
पूर्वांचल में गंगा के जलस्तर में बढ़ाव लगातार जारी है। इसके चलते कई जिलों में हालात कल से बदतर हो गए हैं। बलिया, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही, चंदौली में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। विंध्याचल बस स्टाप के पानी में डूब जाने से उसे बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही मिर्जापुर-इलाहाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर अकोही के पास पानी आ जाने से इस राजमार्ग पर आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया है। ऐसी ही स्थिति दुद्धी-लुम्बिनी राष्ट्रीय राजमार्ग (मिर्जापुर-औराई मार्ग) की है। इस पर टेढ़वा पुलिस चौकी के समीप पानी सड़क पर पहुंच गया। इसके बाद इस मार्ग पर वाराणसी-मिर्जापुर-जौनपुर जाने और आने वाले बड़े वाहनों पर रोक लगा दी गई। इस मार्ग पर रोडवेज प्रबंधन ने अपनी बसें वापस बुला लीं। चंदौली में वाराणसी मुगलसराय राजमार्ग पर भी पानी आ गया है। दूसरी तरफ, गोमती और घाघरा के जल स्तर में कमी दर्ज की गई।
 
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बाढ़
बलिया में मंगलवार देर रात तक गंगा के जलस्तर में आधे सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से वृद्धि जारी थी। एनएच-31 पर पचरूखिया मझौंवा के डेंजर जोन स्पर संख्या 17 के सामने मंगलवार सुबह बंधे से रिसाव शुरू हो गया था जिस पर करीब चार की घंटे मशक्कत के बाद काबू पाया जा सका। बैरिया के नरही के पास एनएच पर गंगा का दबाव बढ़ गया है। इससे बक्सर बलिया मार्ग को कभी बंद किया जा सकता है। बैरिया में हालत अधिक खराब है। सोवनथा, चांदनाला और सोहाव में पानी सड़क पर बह रहा था। बैरिया और लालगंज के क्षेत्रों में बाढ़ पीड़ितों को प्रभावित क्षेत्रों से निकालने का काम शुरू हो गया है। 486 पीड़ितों को बाहर निकाला है।
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बाढ़
गाजीपुर में एनडीआरएफ तथा फ्लड पीएसी ने बाढ़ग्रस्त इलाकों में मोर्चा संभाल लिया है। करीमद्दीनपुर क्षेत्र में पिछले 24 घंटे के दौरान सैकड़ों एकड़ धान की फसल डूब गई। बलिया-गाजीपुर मार्ग पर कभी भी आवागमन अवरुद्ध हो सकता है। बारा के पास कई मार्ग पानी में डूब गए हैं। जिले में ढाई लाख से अधिक की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। रेवतीपुर क्षेत्र के गोपालपुर गांव के समीप मंगलवार की दोपहर बाढ़ राहत में लगी नाव अचानक डूब गई। हालांकि नाव में सवार सभी लोगों को बचा लिया गया।

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बाढ़
मिर्जापुर में गंगा का जलस्तर सुबह आठ से शाम चार बजे तक थमा हुआ था। उसके बाद एक सेंटीमीटर घंटे की दर से बढ़ोतरी शुरू हो गई। बाढ़ से जिले के 300 से ज्यादा गांव प्रभावित हैं जबकि 100 गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है। बाढ़ के चलते जहरीले जानवरों का भी उत्पात बढ़ा है, जिले में तीन लोगों को सांप ने काट लिया हालांकि उन्हें बचा लिया गया। 
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बाढ़
भदोही में दोपहर तक स्थिर रहने के बाद गंगा के जलस्तर में फिर बढ़ोतरी शुरू हो गई। प्रशासन ने तीनों तहसीलों में कंट्रोल रूम बनाकर हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। चंदौली में पिछले 24 घंटे में गंगा में एक सेमी प्रति घंटे का बढ़ाव जारी था। 122 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। वाराणसी- मुगलसराय जीटी रोड पर पानी बह रहा है। जौनपुर में गोमती घटाव पर है। पिछले 24 घंटे में गोमती का जलस्तर 6 इंच घटा है। चंदवक, बलुआ और बरइछ सहित कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। आजमगढ़ में एक माह से खतरे के निशान से ऊपर बह रही घाघरा का जलस्तर मंगलवार को खतरा बिंदु से नीचे आ गया। मैरुंड हो चुके गांव चक्की से बाढ़ का पानी हट चुका है। जमा पानी और गंदगी के चलते संक्रामक बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया हैं। 
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बाढ़

मऊ के दोहरीघाट में घाघरा नदी के कटान से तटवर्ती इलाकों में लोग परेशान हैं। दिन प्रतिदिन नदी का जलस्तर घट रहा है लेकिन कटान में तेजी आई है। उधर, मध्यप्रदेश के शहडोल में सोन नदी पर निर्मित बाणसागर बांध का जलस्तर बढ़ने से बांध के 18 में से छह फाटक खोल दिए गए हैँ। रिहंद, ओबरा डैम के साथ बाणसागर बांध से भी पानी छोड़़े जाने से सोन में जबरदस्त उफान की संभावना बन गई है। बांध प्रबंधन ने उत्तर प्रदेश और बिहार को एलर्ट जारी कर दिया है। प्रशासनिक अमले की तरफ से सोन नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में स्थिति की निगरानी शुरू हो गई है। उधर रिहंद डैम का जलस्तर मंगलवार को काबू में आ गया है। जलस्तर 870 फीट पर पहुंचने के बाद, खोले गए नौ फाटकों में से चार को दोपहर बारह बजे के करीब बंद कर दिया गया। अब पांच गेटों से पानी रेणु नदी में छोड़ा जा रहा है।  
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बाढ़
वाराणसी में विकराल रूप ले चुकी गंगा का जलस्तर मंगलवार को दोपहर तक स्थिर हो चुका था पर शाम सात बजे तक इसमें एक सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। वरुणा के भी उफान पर रहने से काशी में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रहीं। प्रभावित क्षेत्रों की बिजली एहतियातन काट दी गई है। करीब चार से पांच लाख लोग बाढ़ में घिरे हुए हैं। प्रधानमंत्री के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय में मंगलवार को करीब 150 से अधिक फोन आए और इनमें से अधिकांश लोगों ने प्रभावित क्षेत्रों में नाव भेजने की मांग की। उधर, मध्यप्रदेश के शहडोल से बाणसागर बांध से पानी छोड़े जाने से सोन नदी में उफान की संभावना है। बांध प्रबंधन ने उत्तर प्रदेश और बिहार को एलर्ट जारी कर दिया है। सोन नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में स्थिति की निगरानी शुरू हो गई है। बलिया में नाव न पहुंच पाने से एक बीमार बालिका की इलाज के अभाव में मौत हो गई तो गाजीपुर में बाढ़ राहत में लगी एक नाव अचानक डूब गई पर नाव में सवार सभी लोगों को बचा लिया गया।
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