आईटीबीपी का कहना है कि ग्रामीणों ने आजादी के बाद पहली बार अपने गांव में वोट डाला है, लिहाजा वे काफी खुश हैं। इससे पहले जितने भी चुनाव हुए हैं, यहां के ग्रामीण वोट डालने से वंचित रह जाते थे। वजह, मतदान केंद्र 40-50 किलोमीटर दूर बनता था। सभी लोगों तक उसकी सूचना भी नहीं पहुंच पाती थी। अगर किसी को मतदान केंद्र की सूचना मिल भी गई तो वे पहाड़ी रास्ता तय कर वहां तक पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे।