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5 राज्यों में इन बड़े चेहरों के इर्द-गिर्द बिछी है चुनाव बिसात

Sat, 11 Mar 2017 05:16 PM IST
amarujala.com- presented by: हर्षित गौतम
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नारों की गूंज, प्रचार में फैला जनसैलाब, और गलियों में राजनीतिक बैनर और पोस्टर गवाह हैं 2017 विधानसभा चुनावों प्रचार के, लेकिन अब वक्त परिणाम का है। धड़कने तेज हैं और रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। जहां इन चुनावों में हार-जीत से राजनीतिक पार्टियों की सत्ता तय होगी वहीं दूसरी ओर कुछ दिग्गजों की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। रानियों ने महल और राजशी वेशभूषा छोड़कर राजनीतिक चोला ओढ़ा और गलियों की सैर की। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर के गली-मुहल्लों में चुनावी हुजूम ने चुनावी फिजां को रंगीन कर दिया। जानिए 5 राज्यों के उन 50 चेहरों के बारे में जिनके पास चुनौती पार्टी की सत्ता को बचाने की तो है ही, इसके साथ ही व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को बचाने पर भी दांव लगा है।
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यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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शिवपाल सिंह यादव
शिवपाल सिंह यादव
यूपी विधानसभा चुनावों से पहले सपा कुनबे की रार के बाद शिवपाल सिंह के पास कुछ बचा है तो वो है व्यक्तिगत साख्‍ा जो मौजूदा चुनाव में दांव पर लगी है। ऐसे में शिवपाल की सबसे बड़ी चुनौती उनकी खुद की सीट और उस साख को बचाना है। शिवपाल जसवंतनगर विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर पांचवी बार चुनाव लड़ रहे हैं।
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यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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रीता बहुगुणा जोशी - फोटो : amar ujala
रीता बहुगुणा जोशी
कांग्रेस को अलविदा कह भाजपा का दामन थामने वाली दिग्गज नेता रीता बहुगुणा जोशी लखनऊ कैंट से चुनाव मैदान में हैं। वो इस सीट पर निवर्तमान विधायक भी हैं। ऐसे में इस सीट को बचाना उनकी प्रतिष्ठा की वजह बन गया है। हालांकि इस सीट का इतिहास हमेशा बीजेपी के पक्ष में ही रहा है। 2012 के चुनाव में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने इस सीट पर बीजेपी प्रत्याशी को हराकर ही जीत हासिल की थी। ऐसे में खुद के राजनीतिक तिलिस्म को बचाना रीता बहुगुणा जोशी के लिए सबसे अहम है।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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- फोटो : amar ujala
अपर्णा यादव
हाईप्रोफाइल चेहरों में समाजवादी पार्टी का सबसे ज्यादा चर्चित चेहरा हैं अपर्णा यादव। 26 साल की अपर्णा मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधु हैं और पार्टी की प्रतिष्ठित सीट लखनऊ कैंट से चुनाव मैदान में हैं। अपर्णा यादव बीजेपी की दिग्गज नेता रीता बहुगुणा जोशी के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। अपर्णा ने अन्तरराष्ट्रीय संबंध और राजनीति में परास्नातक की डिग्री ली है। वो उस वक्त चर्चा में आईं जब उन्होंने पीएम मोदी के साथ सेल्फी खींची थी।
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यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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स्वाति सिंह
स्वाति सिंह
स्वाति सिंह बीजेपी के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह की पत्नी हैं। जिन्हें बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में बीजेपी ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। स्वाति राज्य में पार्टी की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष हैं। पार्टी ने उन्हें लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से उम्‍मीदवार बनाया है। 
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यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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पक्षालिका सिंह
रानी पक्षालिका सिंह
रानी पक्षालिका सिंह अपने पति अरिदमन सिंह की जगह बीजेपी के टिकट पर आगरा की बाह सीट से चुनाव लड़ रही हैं। वो अखिलेश कैबिनेट में भी रहे हैं, लेकिन इस बार वो चुनाव मैदान में नहीं हैं।
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यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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मुख्तार अंसारी
मुख्तार अंसारी
यूं तो मऊ जिले की चारों विधानसभा सीटों पर कांटे की टक्कर है, पर मुख्तार फैक्टर मुकाबले को थोड़ा दिलचस्प बना रहा है। मऊ जिले की सदर सीट पर मुख्य लड़ाई बसपा के प्रत्याशी और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी, सपा के अल्ताफ अंसारी और भाजपा-भारतीय समाज पार्टी (भासपा) गठबंधन के प्रत्याशी महेंद्र राजभर के बीच है। मुख्तार 1996 से यहां से लगातार चार बार विधायक चुने जा चुके हैं।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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अमनमणि त्रिपाठी
अमनमणि त्रिपाठी
नेपाल सीमा से सटे महराजगंज जिले की नौतनवां विधानसभा सीट सजायाफ्ता पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के बेटे और पत्नी की हत्या के आरोपी अमनमणि त्रिपाठी के मैदान में होने से सुर्खियों में है। पूर्वांचल की यह सीट इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यहां अमनमणि और सपा प्रत्याशी कुंवर कौशल किशोर सिंह उर्फ मुन्ना के बीच की सियासी जंग दोनों प्रतिद्वंदी परिवारों का भविष्य तय करने वाली साबित होगी।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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स्वामी प्रसाद मौर्या
स्वामी प्रसाद मौर्य
बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए दिग्गज नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को भाजपा ने पडरौना सीट से प्रत्याशी बनाया है। पडरौना से भाजपा से बागी परशुराम मिश्र, मौर्य के सामने निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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अंबिका चौधरी
अंबिका चौधरी
बलिया जिले की फेफना विधानसभा सीट से अंबिका चौधरी इस बार बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वह इस सीट पर पिछले दो दशक से अधिक समय से चुनाव लड़ रहे हैं, जिसमें लगातार चार बार विधायक भी रहे हैं। सपा-कांग्रेस गठबंधन में फेफना विस सीट से प्रत्याशी संग्राम सिंह यादव ताल ठोंक रहे हैं, जो चिलकहर विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं। वह भी पिछले दो दशक से ज्यादा वक्त से राजनीति कर रहे हैं।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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अमिता सिंह गरिमा सिंह
अमिता सिंह और गरिमा सिंह
अमेठी विधानसभा सीट पर सबकी निगाहें टिकी हुई है, क्योंकि यहां दो रानियों की लड़ाई हो रही है। भाजपा ने राज्यसभा सदस्य डॉ. संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा सिंह को प्रत्याशी बनाया है, तो उनकी मौजूदा पत्नी अमीता सिंह कांग्रेस से मैदान में हैं।  

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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गायत्री प्रजापति
गायत्री प्रजापति
अमेठी सीट से ही सूबे के चर्चित मंत्रियों में शुमार यहां के मौजूदा विधायक गायत्री प्रसाद प्रजापति फिर सपा से प्रत्याशी हैं। सपा-कांग्रेस में गठबंधन के बावजूद यहां दोनों पार्टियों के बीच दोस्ताना मुकाबला हो रहा है।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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- फोटो : amar ujala
आजम खान
तमाम सियासी गठजोड़ के बीच समाजवादी पार्टी में एक शख्स ऐसा रहा जिसका जलवा कभी कम नहीं हुआ। पार्टी के लिए आजम ट्रंप कार्ड हैं और उन्होंने इस बात को हमेशा सिद्ध भी किया है। रामपुर की सीट पर वो लगातार चुनाव जीतते आए हैं। वो सात बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। अब अपने जलवे को अपनी सीट पर फिर से कायम रखना आजम के लिए बेहद जरूरी है।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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संपत पाल
संपत पाल
महिलाओं की आवाज बनने वाली गुलाबी गैंग की कमांडर संपत पाल तीसरी बार विधानसभा मैदान में हैं। 2006 में संपत पाल ने महिलाओं की समस्याओं पर आंदोलन शुरू किया और गुलाबी गैंग बनाया था। एक बार फिर से कांग्रेस ने संपत पाल को उम्मीदवार बनाया है। इससे पहले वे 2012 में मानिकपुर सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ीं, लेकिन हार गईं।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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आराधना मिश्रा
आराधना मिश्रा
रामपुर खास से एक ही पार्टी से लगातार नौ बार विधायक के रूप में रिकॉर्ड बनाने वाले दिग्गज कांग्रेसी नेता प्रमोद तिवारी की विरासत अब उनकी बेटी आराधना मिश्रा मोना संभाल रही हैं। वह 2014 में हुए उपचुनाव में पहली बार मैदान में उतरी थीं। इस बार वह कांग्रेस-सपा गठबंधन की उम्मीदवार हैं। भाजपा ने नागेश प्रताप सिंह तो बसपा ने अशोक सिंह को मैदान में उतारा है।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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राजा भैया
राजाभैया पर निगाहें
सुखियों में रहने वाले कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह ऊर्फ राजा भैया फिर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। सन 1993 से ही लगातार विधायकी जीतते आए राजा भैया के गढ़ में उन्हें चुनौती देना भाजपा और बसपा के लिए आसान नहीं है। लगभग हर सरकार में मंत्री रहे राजा भैया के सामने भाजपा से जानकी प्रसाद पांडेय और बसपा से परवेज अख्तर अंसारी ताल ठोक रहे हैं।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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पंकज सिंह
पंकज सिंह
वेस्ट यूपी की नोएडा सीट सबसे ज्यादा हॉट बनी हुई है। उसकी वजह है केंद्रीय गृहमंत्री और मोदी सरकार में नंबर दो माने जाने वाले राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने मौजूदा विधायक विमला बाथम का टिकट काटकर प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह को यहां से टिकट दिया है। उनका मुकाबला सपा के सुनील चौधरी से है जो पंकज को कड़ी टक्‍कर दे रहे हैं। इस सीट को लेकर भाजपा की बेचैनी इसी बात से समझी जा सकती है कि केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा सहित कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने पंकज को जीत दिलाने के लिए यहां डेरा डाल रखा है।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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लक्ष्मीकांत बाजपेयी
लक्ष्मीकांत बाजपेयी
वेस्ट यूपी के प्रमुख शहर मेरठ सीट पर भाजपा के दिग्गज और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी लगातार आठवीं बार चुनावी मैदान में हैं। यहां से चार बार विधायक रह चुके वाजपेयी इस बार कड़े मुकाबले में हैं। सपा के रफीक अंसारी और बसपा के पंकज जौली उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। पिछले चुनावों में भी मुख्य मुकाबला रफीक अंसारी और वाजपेयी के बीच हुआ था, जिसमें वाजपेयी को जीत मिली थी। 2007 के चुनावों में वाजपेयी यहां नजदीकी मुकाबले में हाजी याकूब कुरैशी से हार गए थे ऐसे में इस सीट पर भाजपा खासतौर से नजरे गड़ाए हुए है।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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- फोटो : getty
संगीत सोम
मेरठ जिले की ही सरधना विधानसभा सीट इन चुनावों में हॉट सीट के तौर पर सामने आई है। उसकी वजह है भाजपा के फायर ब्रांड नेता और मौजूदा विधायक संगीत सोम और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नजदीकी अतुल प्रधान के बीच यहां कड़ी टक्कर। मुजफ्फरनगर दंगों में भड़काऊ बयान देकर चर्चा में आए संगीत सोम ने इसके बाद से खुद को लगातार भाजपा के फायर ब्रांड नेता के तौर पर स्‍थापित किया है। उनके सामने लड़ रहे अतुल प्रधान की छवि जन नेता की मानी जाती है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का भी उन्हें वरदहस्त प्राप्त है।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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मृगांका सिंह
मृगांका
शामली जिले की कैराना सीट पर भी इस बार सबकी निगाहें टिकी हैं। कैराना से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाकर भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने इस सीट को खास बना दिया है। भाजपा ने हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को इस सीट से टिकट देकर इस मुद्दे को और हवा देने का ही काम किया है। यहां से सात बार के विधायक रहे हुकुम सिंह ने बेटी को टिकट दिलाकर अपने साथ-साथ इस सीट को भाजपा की प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया है। खास बात ये है कि बेटी के सामने उनके ही परिवार के अनिल चौहान मजबूती से ताल ठोक रहे हैं।

यूपी के इन खास चेहरों के सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती

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श्रीकांत सिंह
श्रीकांत सिंह
मथुरा जिले को यूं तो रालोद का गढ़ माना जाता है, लेकिन बीते लोकसभा चुनावों में मोदी लहर में भाजपा की हेमा मालिनी ने यहां से बड़ी जीत दर्ज की थी। इसके बाद से ही भाजपा इस जिले में अपनी बढ़त बनाने में जुटी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मथुरा सदर सीट से भाजपा ने राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा को टिकट दिया है। उनका मुकाबला कांग्रेस के दिग्‍गज नेता और विधायक दल के प्रमुख प्रदीप माथुर से है। मथुरा का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एक चुनावी रैली के दौरान इस बात की घोषणा कर दी थी कि यहां से ही पार्टी के कई मंत्री और मुख्यमंत्री बनेंगे।

ये हैं उत्तराखंड के बड़े दिग्गज जिनकी साख है दांव पर

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हरीश रावत
सीएम हरीश रावत
सीएम हरीश खुद शह मात के खेल में फंसे हैं। खुद को खांटी पहाड़ी कहने वाले हरीश रावत मैदानी क्षेत्र की दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे है। हरीश रावत के राजनीतिक कौशल से कांग्रेस मुकाबले में तो है लेकिन सत्ता वापसी की चुनौती के अलावा अपने गढ़ कुमाऊं में खुद को साबित करने की परीक्षा में भी पासिंग मार्क्स से काम नहीं चलेगा।

ये हैं उत्तराखंड के बड़े दिग्गज जिनकी साख है दांव पर

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इंदिरा ह्दयेश
इंदिरा हृदयेश
कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदेश कांग्रेस ही नहीं राज्य में अकेली महिला राजनीतिज्ञ हैं, जो अपने दम पर सियासत करती है। चुनाव जीत और संख्याबल बहुमत की कसौटी पर खरी उतरीं तो वह मुख्यमंत्री  पद की दावेदार होंगी और चुनाव हार गईं तो यह उनका आखिरी चुनावी रण साबित होगा।

ये हैं उत्तराखंड के बड़े दिग्गज जिनकी साख है दांव पर

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प्रीतम सिंह
प्रीतम सिंह
जनजाति बाहुल्य सीट चकराता प्रीतम सिंह की परंपरागत सीट मानी जाती है। वह पिछले दो दशक से लगातार विधायक है। प्रीतम सिंह के सामने मधु चौहान भाजपा के टिकट पर मैदान में है। चकराता क्षेत्र में मंदिर में दलितों को प्रवेश करने से रोकने का मामला उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।

ये हैं उत्तराखंड के बड़े दिग्गज जिनकी साख है दांव पर

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ऋतु खंडूड़ी
ऋतु खंडूड़ी
पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी अपने राजनीतिक जीवन की बड़ी पारी खेल रहे हैं। खंडूड़ी ने अपनी बेटी ऋतु खंडूड़ी को गढ़वाल मंडल के पौड़ी जिले की यमकेश्वर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा है। खंडूड़ी अपनी राजनीतिक विरासत अपनी संतान को सौंपना चाहते हैं।

ये हैं उत्तराखंड के बड़े दिग्गज जिनकी साख है दांव पर

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सतपाल महाराज
सतपाल महाराज
केंद्र की राजनीति छोड़ प्रदेश की सियासत में कूदे पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री सतपाल महाराज की भूमिका इस चुनाव से तय होगी। सीएम की रेस में माने जा रहे महाराज पर चौबट्टाखाल से जीतने का दबाव है। वो बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।

ये हैं उत्तराखंड के बड़े दिग्गज जिनकी साख है दांव पर

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यशपाल आर्या
यशपाल आर्य
कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए कैबिनेट मंत्री यशपाल के परिवार की साख इस चुनाव से जुड़ी है। उनके बेटे संजीव आर्य भी रानीखेत से प्रत्याशी हैं, अपने साथ बेटे को जिता कर आर्य अपना कद बढ़ा कर पाते हैं या नहीं, यह 11 मार्च को तय होगा।

ये हैं उत्तराखंड के बड़े दिग्गज जिनकी साख है दांव पर

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हरक सिंह रावत
हरक सिंह रावत
कोटद्वार सीट पर गढ़वाल के शेर कहे जाने वाले भाजपा नेता हरक सिंह को अपनी साख बचाने की चुनौती है। हरक सिंह रावत दावा करते हैं कि वे जहां भी जाएंगे जीतकर आएंगे, लेकिन इस बार कोटद्वार में हरक सिंह के लिए अग्निपरीक्षा है। आज तक हरक सिंह रावत ने पहाड़ की विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार वो मैदानी सीट पर मुकाबले के लिए उतरे हैं।

ये हैं उत्तराखंड के बड़े दिग्गज जिनकी साख है दांव पर

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किशोर उपाध्याय
किशोर उपाध्याय
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और दिग्गज नेता किशोर उपाध्याय सहसपुर से चुनावी मैदान में हैं। 2002 और 2007 में टिहरी विधानसभा सीट से चुनाव जीते थे, लेकिन 2012 का चुनाव उनके लिए खास नहीं रहा। इस बार उनका मुकाबला उन्हीं की पार्टी के बागी अर्येंद्र शर्मा से है। ऐसे में खुद की प्रतिष्ठा बचाना उनके लिए जरूरी है।

ये हैं उत्तराखंड के बड़े दिग्गज जिनकी साख है दांव पर

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अजय भट्ट
अजय भट्ट
ऐसा माना जाता है कि राज्य की रानीखेत सीट से जिस पार्टी का उम्मीदवार जीतता है उस पार्टी की सरकार कभी नहीं बनी है। 2002 और 2012 में जीत दर्ज करने वाले अजय भट्ट को इस सीट पर जीतना स्वयं की प्रतिष्ठा के लिए ज्यादा जरूरी है।

ये हैं उत्तराखंड के बड़े दिग्गज जिनकी साख है दांव पर

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सौरभ बहुगुणा
सौरभ बहुगुणा
इस बार विजय बहुगुणा के बेटे सौरभ बहुगुणा के पास पिता की प्रतिष्ठा को बचाना बड़ी चुनौती हैं। सौरभ सितारगंज से बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। सितारगंज से पिछले विधानसभा में विजय बहुगुणा ने चुनाव लड़ रहा था। अब इस सीट पर सौरभ उनकी विरासत संभाल रहे हैं।

पंजाब की सियासी हस्तियां जिन्हें साबित करना है अपने व्यक्तित्व का तिलिस्म

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अमरिंदर सिंह
कैप्टन अमरिंदर सिंह
पंजाब में कांग्रेस के सीएम पद के उम्मीदवार कैप्टन अमरिंद सिंह, पटियाला की दो विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। इन सीटों पर अमरिंदर सिंह के सामने पार्टी के भरोसे समेत खुद की राजनीतिक साख को कायम रखना है। पटियाला में अमरिंदर सिंह का घर है वहीं उनकी दूसरी सीट लांबी भी पटियाला से महज चार घंटे की दूरी पर है। लंबी सीट पर अमरिंदर, प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं। बादल इस सीट पर 1997 के बाद से कभी नहीं हारे हैं।

पंजाब की सियासी हस्तियां जिन्हें साबित करना है अपने व्यक्तित्व का तिलिस्म

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सुखबीर बादल
सुखबीर बादल
जलालाबाद में सुखबीर का मुकाबला कांग्रेस के रवनीत बिट्टू और आप के भगवंत मान से है। मजीठा में बिक्रम को कांग्रेस के लाली मजीठिया और आप के हिम्मत शेरगिल चुनौती दे रहे हैं। पहली बार दोनों दिग्गजों को इतनी कड़ी चुनौती मिल रही है।

पंजाब की सियासी हस्तियां जिन्हें साबित करना है अपने व्यक्तित्व का तिलिस्म

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भगवंत मान
भगवंत मान
आम आदमी पार्टी के पंजाब में बड़े चेहरे भगवंत मान जलालाबाद सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। भगवंत मान की सीट आप समेत उनके खुद के लिए नाक का सवाल है। हालांकि वो इस सीट पर सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। 2009 के बाद से सुखबीर सिंह बादल इस सीट पर लगातार विधायक रहे हैं।

पंजाब की सियासी हस्तियां जिन्हें साबित करना है अपने व्यक्तित्व का तिलिस्म

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रजिंदर कौर भट्ठल
पूर्व सीएम रजिंदर कौर भट्ठल
लहरागागा की सीट पर अकाली दल ने पूरी ताकत लगा दी है, वहीं कांग्रेस ने भी इस सीट पर कोई कसर नहीं छोड़ी। पूर्व सीएम और कांग्रेसी नेता रजिंदर कौर भट्ठल भी इस बर लहरागागा में घिरी नजर आ रही हैं। उनका मुकाबला वित्तमंत्री परमिंदर ढींढसा से है।

पंजाब की सियासी हस्तियां जिन्हें साबित करना है अपने व्यक्तित्व का तिलिस्म

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नवजोत सिंह सिद्धू
नवजोत सिद्धू
अमृतसर ईस्ट से चुनावी मैदान में मौजूद नवजोत सिद्धू सेलिब्रिटी स्टेटस की वजह से अपने हलके में वक्त नहीं दे पाए। भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाले सिद्धू इस चुनाव में बड़े हाईप्रोफाइल चेहरे के रूप में उभरे हैं। उनकी जीत के लिए पूरी कांग्रेस जुटी है।

पंजाब की सियासी हस्तियां जिन्हें साबित करना है अपने व्यक्तित्व का तिलिस्म

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प्रकाश सिंह बादल
प्रकाश सिंह बादल
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल कह चुके हैं कि यह उनका आखिरी चुनाव है। पांच बार सीएम रह चुके बादल इस बार अपने ही घर में घिरे नजर आ रहे हैं। लंबी में उन्हें कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह और आप के जरनैल सिंह से तगड़ी चुनौती मिल रही है।

पंजाब की सियासी हस्तियां जिन्हें साबित करना है अपने व्यक्तित्व का तिलिस्म

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गुरजीत सिंह औजला
गुरजीत सिंह औजला
कांग्रेस ने अमृतसर विधानसभा सीट के लिए जिला कांग्रेस शहरी प्रधान गुरजीत सिंह औजला को चुनाव मैदान में उतारा है। 44 वर्षीय औजला 1997 में यूथ कांग्रेस से जुड़े थे।

पंजाब की सियासी हस्तियां जिन्हें साबित करना है अपने व्यक्तित्व का तिलिस्म

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बिक्रम मजीठिया
बिक्रम मजीठिया 
विधानसभा हलका मजीठा को हमेशा पंजाब की राजनीति की धुरी समझा जाता रहा है। यह हलका प्रकाश सिंह बादल मजीठा के नाम से साथ जाना जाता था। अब यह हलका बिक्रम सिंह मजीठिया के कारण माझे का हब बन चुका है। इस सीट पर उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है, क्योंकि आम आदमी पार्टी बिक्रम मजीठिया के खिलाफ बड़ा अभियान चला चुकी है। मजीठिया मजीठा सीट से दो बार विधायक रहे हैं। मजीठिया सुखबीर सिंह बादल के साले भी हैं।

पंजाब की सियासी हस्तियां जिन्हें साबित करना है अपने व्यक्तित्व का तिलिस्म

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मनप्रीत बादल
मनप्रीत बादल
बठिंडा सीट से कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ रहे मनप्रीत बादल के लिए अपनी साख बचाना अहम है, क्योंकि उनका मुकाबला उनकी भाभी हरसिमरत कौर से है। हालांकि हरसिमरत कौर चुनाव मैदान में नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अकाली प्रत्याशियों के प्रचार के लिए जमकर मेहनत की है। मनप्रीत ने क्षेत्र बठिंडा शहरी के साथ ही जिले की अन्य सीटों पर भी कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए पूरा जोर लगा दिया था।

पंजाब की सियासी हस्तियां जिन्हें साबित करना है अपने व्यक्तित्व का तिलिस्म

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जरनैल सिंह
जरनैल सिंह
पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल की विधानसभा सीट लंबी से दिल्ली के आप विधायक जरनैल सिंह विधानसभा चुनाव मैदान में हैं। जरनैल सिंह आप की पंजाब इकाई के सह प्रभारी हैं। पार्टी का भरोसा बचाना जरनैल सिंह की निजी प्रतिष्ठा की वजह बन गया है।

मणिपुर में इन्हें है साख बचाने की चुनौती

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इरोम शर्मिला
मणिपुर विधानसभा की थौबल विधानसभा सीट के परिणाम पर सबकी निगाहे हैं। क्योंकि इस सीट पर अफस्पा के खिलाफ 16 साल की लंबी लड़ाई लडने वाली इरोम शर्मिला चुनाव मैदान में हैं। उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी पीआरजेए बनाई है। ऐसे में उनकी जीत ही उनके आने वाले राजनीतिक करियर को तय करने वाली हो सकती है। इरोम मणिपुर के सीएम ओकराम इबोबी के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं।

मणिपुर में इन्हें है साख बचाने की चुनौती

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ओकराम इबोबी सिंह
ओकराम इबोबी सिंह
मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी को अपनी सीट बचाना साख बचाने जैसा है। उनकी थौबल सीट से उनके खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला मैदान में हैं। इन्हें इबोबी का तगड़ा प्रतिद्वंदी माना जा रहा है।

मणिपुर में इन्हें है साख बचाने की चुनौती

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राधाबिनोद कोईजाम
राधाबिनोद कोईजाम
मणिपुर के सीएम रह चुके राधाबिनोद कोईजाम इसबार के चुनाव में बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने 2015 में भारतीय जनता पार्टी को ज्वॉइन किया। 15 फरवरी 2001 को वे मणिपुर के मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि उनकी सरकार बहुत कम वक्त ही चली।

मणिपुर में इन्हें है साख बचाने की चुनौती

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सूरजकुमार ओकराम
सूरजकुमार ओकराम
मणिपुर की खंगाबोक सीट इबोबी परिवार के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है। इस सीट से ओकराम इबोबी के 29 वर्षीय बेटे सूरजकुमार ओकराम चुनावी मैदान में हैं। इससे पहले इस सीट पर सूरज की मां ओकराम लंधोनी चुनाव लड़ चुकी हैं। लंधोनी दो बार से लगातार विधायक हैं और उन्होंने ये सीट अपने बेटे सूरजकुमार के लिए छोड़ी है। सूरज इस सीट से अपनी चुनावी पारी शुरू कर रहे हैं।

मणिपुर में इन्हें है साख बचाने की चुनौती

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बिरेन सिंह
नोंगथोमबम बिरेन सिंह
कभी कांग्रेसी रहे नोंगथोमबम बिरेन सिंह इस बार बीजेपी के टिकट पर मणिपुर विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। फुटबॉल प्लेयर से पत्रकार और पत्रकार से राजनेता बने बिरेन सिंह के लिए ये चुनाव बेहद खास है। बिरेन सिंह को बीजेपी ने हेनगेंग विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है।

गोवा में इन पर टिकी होंगी सबकी निगाहें

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सिद्धार्थ कुनकोलिअंकर
सिद्धार्थ कुनकोलिअंकर
गोवा की पणजी सीट बीजेपी और रक्षामंत्री मनोहर परिकर दोनों के लिए बेहद अहम है। ये बीजेपी की वो घरेलू सीट है जिस पर पार्टी ने 1994 से लगातार कब्जा कायम रखा है। इसलिए इस बार भाजपा ने चौतरफा मुकाबले के बीच इस सीट पर सिद्धार्थ कुनकोलिअंकर पर दांव लगाया है।

गोवा में इन पर टिकी होंगी सबकी निगाहें

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बाबुष मोंसेरेट उर्फ अतानासियो मोंसेरेट
बाबुष मोंसेरेट उर्फ अतानासियो मोंसेरेट
पणजी की सीट कांग्रेस के लिए बेहद अहम है। कांग्रेस इस सीट पर यूनाइटेड गोवन पार्टी के बाबुष मोंसेरेट को समर्थन दे रही है। बाबुष उर्फ अतानासियो मोंसेरेट के लिए ये चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल है। हालांकि पूर्व में कांग्रेस ने बाबुष को उपचुनाव में विरोधी कुनकोलिअंकर को जिताने के आरोप में पार्टी से बाहर कर दिया था।

गोवा में इन पर टिकी होंगी सबकी निगाहें

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एल्विस गोम्स
आम आदमी पार्टी के सीएम उम्मीदवार एल्विस गोम्स
गोवा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने पूर्व नौकशाह एल्विस गोम्स पर दांव खेला है। 53 साल के गोम्स ने आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद अपनी नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है। गोम्स सेवानिवृत्ति के वक्त आईजी जेल और शहरी विकास सचिव थे। गोम्स दक्षिणी गोवा की कुनकोलिम सीट से चुनावी मैदान में हैं।

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विजय खोत
विजय खोत
भारतीय जनता पार्टी ने कानकोना सीट से इस बार खेलमंत्री रमेश तवाडकर का टिकट काटकर विजय खोत को दिया है। खोत को इस सीट पर पार्टी के लिए अपनी अहमियत साबित करनी है।
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गोवा में इन पर टिकी होंगी सबकी निगाहें

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लक्ष्मीकांत पार्सेकर
लक्ष्मीकांत पार्सेकर
मेनड्रेम विधानसभा सीट से मौजूदा मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर भाजपा उम्मीदवार हैं। लेकिन स्थानीय लोगों में उनके खिलाफ गुस्सा माना जा रहा है। यहां कई वोटर मानते हैं कि पार्सेकर ने सीएम रहने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं दिया।
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