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सुपुर्द-ए-खाक हुए मशहूर हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद, तस्वीरें

Thu, 21 Jul 2016 04:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
मशहूर हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद को गुरुवार को इस्लामिक रस्मों रिवाज के साथ सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। इसके पहले उनके शव को कचहरी के पास स्थित उनके पुश्तैनी मकान पर ले जाया गया। उनके शव को टकटकपुर स्थित कब्रिस्तान में दफनाया गया। इस मौके पर खेल से जुड़ी कई हस्तियां मौजूद रहीं।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
मोहम्मद शाहिद देश की ओर से हॉकी खेलने वालों में बेहतरीन 'ड्रिब्लर' के रूप में याद किए जाते हैं और वर्ष 1980 के मॉस्को ओलंपिक में भारतीय टीम के स्वर्ण पदक जीतने में उनकी अहम भूमिका रही थी। उसके बाद भारतीय टीम अभी तक ओलंपिक में स्वर्ण या कोई भी पदक नहीं जीत सकी है। उन्होंने बुधवार की सुबह 10:41 बजे मेदांता अस्पताल में आखिरी सांस ली थी। 
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
हॉकी के सुपर स्टार मोहम्मद शाहिद के देहांत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त किया। बुधवार को देहांत की खबर के बाद केंद्रीय खेल एवं युवा मामले के मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विजय गोयल प्रधानमंत्री का शोक संदेश लेकर पहुंचे और उनके परिवार को सांत्वना दी। करीब 30 मिनट तक वो उनके परिवार के साथ रहे और उसके बाद दिल्ली लौट गए। हॉकी में ध्यानचंद के बाद शाहिद ही इकलौते हॉकी सुपर स्टार मौजूद थे। उनकी कमी को पूरा नहीं किया जा सकता है। वे हॉकी को बुलंदी तक ले गए थे।

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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
1979 में फ्रांस में हुए जूनियर विश्व कप हॉकी में मोहम्मद शाहिद ने असाधारण खेल से तहलका मचा दिया था। डेढ़ दशक तक भारतीय हॉकी की पहचान रहे शाहिद को भारतीय हॉकी के उत्थान में उनकी अग्रणी भूमिका के लिए सरकार ने उन्हें अर्जुन अवार्ड और पद्मश्री सम्मान से नवाजा।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ध्यानचंद निर्विवाद रूप से भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के बेहतरीन हॉकी ड्रिब्लर रहे। उनकी परंपरा को उनके पुत्र अशोक कुमार ने आगे बढ़ाया। इसी परंपरा को और आगे बढ़ाने वाले मोहम्मद शाहिद का 56 बरस की उम्र में बुधवार को इंतकाल हो गया।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
मोहम्मद शाहिद की शैली का पूरा विश्व दिवाना हुआ करता था। कोई उनके स्टिकवर्क का कायल था, तो कोई उनकी फिनशिंग का।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
गेंद पर गजब का कंट्रोल रखने वाले शाहिद से गेंद छीनना लगभग असंभव हुआ करता था। ऊपर से स्पीड उनके खेल में चार चांद लगा देती थी। मैदान के बाहर भी शाहिद जिंदादिल इंसान थे और साथियों का मन भी बहलाया करते थे।
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