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ASER 2024: सरकारी स्कूलों में तीसरी तक पढ़ाई का स्तर बढ़ा; 14-16 साल के 80% से अधिक बच्चे स्मार्टफोन चलाते हैं

Wed, 29 Jan 2025 01:01 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (असर) 2024 के अनुसार तीसरी कक्षा के बच्चों के पढ़ने के स्तर में सुधार वर्ष 2022 के मुकाबले हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल, हरियाणा, ओडिशा व महाराष्ट्र में यह बढ़ोतरी 10 फीसदी से अधिक है। यह सुधार सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों से अधिक है। 
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सरकारी स्कूल में पढ़ते बच्चे - फोटो : एएनआई
सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और बुनियादी अंकगणित सीखने के स्तर में जबरदस्त सुधार हुआ है। सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों को भी पछाड़ दिया है। यह बदलाव काफी हद तक सरकारी विद्यालयों में नामांकित बच्चों की सीखने की क्षमता में वृद्धि के कारण है। तीसरी कक्षा के बच्चों के पढ़ने के स्तर में काफी सुधार हुआ है और यह 27.1 फीसदी तक पहुंच गया है।
 
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सरकारी स्कूल में स्मार्ट क्लास - फोटो : एएनआई
मंगलवार को जारी वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (असर) 2024 के अनुसार तीसरी कक्षा के बच्चों के पढ़ने के स्तर में सुधार वर्ष 2022 के मुकाबले हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल, हरियाणा, ओडिशा व महाराष्ट्र में यह बढ़ोतरी 10 फीसदी से अधिक है। यह सुधार सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों से अधिक है। सुधार करने वाले राज्यों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, ओडिशा और महाराष्ट्र शामिल हैं।
 
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सरकारी स्कूल में प्रार्थना करते बच्चे - फोटो : एएनआई
कक्षा 4 के बच्चों के पढ़ने का स्तर सुधरा
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले चौथी कक्षा के बच्चों के पढ़ने के स्तर में बहुत सुधार हुआ है। सरकारी स्कूलों में चौथी कक्षा के उन बच्चों का प्रतिशत, जो दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ पढ़ सकते हैं, 2018 में 50.5 प्रतिशत से घटकर 2022 में 42.8 प्रतिशत हो गया था। लेकिन 2024 में यह बढ़कर 48.8 फीसदी हो गया है। असर एक राष्ट्रव्यापी ग्रामीण घरेलू सर्वेक्षण है जिसमें भारत के 605 ग्रामीण जिलों के 17,997 गांवों के 6,49,491 बच्चों को शामिल किया गया।
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मोबाइल के जरिये पढ़ाई करते बच्चे - फोटो : एएनआई
90 फीसदी के घर में स्मार्टफोन पर यहां बेटी और बेटे में भी भेदभाव
14-16 आयु वर्ग के 90 फीसदी बच्चों ने कहा कि उनके घर में स्मार्टफोन है। 80 फीसदी प्रयोग करना जानते हैं, जिसमें 79.4 फीसदी बेटियां तो 85.5 फीसदी लड़के हैं। इसमें भी 36.2 फीसदी लड़कों और महज 26.9 फीसदी बेटियों के पास अपना स्मार्टफोन है। इसका अर्थ है कि स्मार्टफोन दिलवाने में अभिभावक बेटे और बेटी में भेदभाव करते हैं। करीब 82.2 फीसदी बच्चे स्मार्टफोन का इस्तेमाल शैक्षिक गतिविधियों के लिए करते हैं।
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