पश्चिम बंगाल में इस साल दुर्गा पूजा ममतामय हो गई है। कोलकाता समेत पूरे पश्चिम बंगाल में ज्यादातर आयोजनों पर सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की छाप साफ नजर आ रही है। कहीं उनकी कविताओं के साथ आदमकद तस्वीर लगी है, तो कहीं विशालकाय पोस्टरों में वह लोगों से सावधानी बरतने की अपील करती नजर आ रही हैं। कई जगह तो उनके आम लोगों को शुभकामना देते पोस्टर भी लगे हैं।
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दुर्गा पूजा हुई ममतामय
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ममता
ममता बनर्जी महालया के दिन से सौ से ज्यादा पूजा पंडालों का उद्घाटन कर चुकी हैं। इससे पहले पश्चिम बंगाल में शायद ही किसी राजनेता ने इतने पूजा पंडालों का उद्घाटन किया हो। महानगर में जितनी दुर्गा प्रतिमाएं नहीं बनीं, उनसे कहीं ज्यादा ममता के पोस्टर और बैनर लगे हैं। नदिया जिले के चाकदाह में तो एक पूजा समिति ने दुर्गा के तौर पर ममता की फाइबर ग्लास से बनी विशालकाय प्रतिमा लगाकर विवाद ही खड़ा कर दिया है। इसके अलावा अपने चुनाव क्षेत्र भवानीपुर के एक पंडाल में ममता मां दुर्गा के कदमों में बैठकर आशीर्वाद लेती नजर आ रही हैं। दुर्गा का एक हाथ ममता के सिर पर है।
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दुर्गा पूजा हुई ममतामय
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दुर्गा पूजा पंडाल
वैसे, पूजा-पाठ में विश्वास नहीं करने वाले वामपंथियों के शासनकाल में भी पश्चिम बंगाल के इस सबसे बड़े त्योहार में राजनीति के रंग घुले थे। लेकिन पूजा पर ममता का रंग अबकी कुछ ज्यादा ही चटख नजर आ रहा है। इसकी शुरुआत साल 2011 में ममता के सत्ता में आने के बाद हुई। इसके बाद महानगर की तमाम प्रमुख समितियों के अध्यक्ष या संरक्षक पदों पर धीरे-धीरे तृणमूल कांग्रेस के नेता और मंत्री काबिज होने लगे।
दुर्गा पूजा हुई ममतामय
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दुर्गा जी
नतीजतन पहले छोटे सत्र पर आयोजन करने वाली समितियों का बजट देखते ही देखते करोड़ों में पहुंच गया।
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दुर्गा पूजा हुई ममतामय
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दुर्गा मां
सत्ता में आने के बाद ममता ने अपनी और पार्टी की छवि चमकाने के लिए दुर्गा पूजा का जमकर इस्तेमाल किया।
बीते साल उन्होंने राज्य के छोटे-बड़े सात हजार क्लबों को 100 करोड़ रुपये का अनुदान दिया था। इस साल विधानसभा चुनाव में उनकी भारी जीत में इस अनुदान की भी अहम भूमिका रही है। एक क्लब के सदस्य ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि हमने सरकार से पैसे लिए हैं। हमारे समक्ष ममता की तस्वीरें और पोस्टर लगाने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।