फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Draupadi Murmu: मुर्मू की जीत से भाजपा को कितना फायदा होगा, पांच बिंदुओं में जानें आगे की राजनीति पर इसका असर

Thu, 21 Jul 2022 08:14 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

25 जुलाई को मुर्मू राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मुर्मू के राष्ट्रपति बनने के बाद भाजपा को इसका सियासी फायदा मिल सकता है।  
विज्ञापन
1 of 7
द्रौपदी मुर्मू - फोटो : अमर उजाला
द्रौपदी मुर्मू देश की नई राष्ट्रपति होंगी। वोटों की तीन दौर की गिनती के बाद ही उन्होंने निर्णायक बढ़त ले ली।  इसी के साथ देश को मुर्मू के रूप में पहला आदिवासी राष्ट्रपति भी मिलना तय हो गया। अब 25 जुलाई को मुर्मू राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मुर्मू के राष्ट्रपति बनने के बाद भाजपा को इसका सियासी फायदा मिल सकता है।  

आइए जानते हैं मुर्मू की जीत के राजनीतिक मायने क्या हैं? भाजपा को आने वाले चुनावों में द्रौपदी की जीत से भाजपा को कितना फायदा मिलेगा?  
 
विज्ञापन

2 of 7
द्रौपदी मुर्मू - फोटो : अमर उजाला
हमने ये समझने के लिए राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर प्रो. प्रवीण मिश्रा से संपर्क किया। उन्होंने द्रौपदी मुर्मू और भाजपा के इस सियासी कदम के बारे में जानकारी दी। प्रो. प्रवीण कहते हैं, 'जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं तब से देश की सियासत में कई नई चीजें देखने को मिली हैं। द्रौपदी मुर्मू के रूप में पहली बार कोई आदिवासी राष्ट्रपति मिला है। भाजपा उम्मीद करेगी की उसे इसका सियासी फायदा भी हो।' उन्होंने कहा कि द्रौपदी के राष्ट्रपति बनने पर भाजपा को पांच बड़े फायदे हो सकते हैं।  
 
विज्ञापन

3 of 7
द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समाज से आती हैं। - फोटो : अमर उजाला
1. अनुसूचित जनजाति पर फोकस : द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समाज से आती हैं। ये पहली बार है जब कोई आदिवासी देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होगा। इसका संदेश देश के 8.9 फीसदी अनुसूचित जनजाति के वोटर्स को जाएगा। कई राज्यों की कई सीटों पर आदिवासी वोटर्स निर्णायक हैं। ऐसे में भाजपा ने द्रौपदी को राष्ट्रपति पद तक पहुंचाकर अनुसूचित जनजाति के वोटर्स को अपनी ओर करने की कोशिश की है।

2017 का राष्ट्रपति चुनाव भी एक उदाहरण है। तब दलित समाज से आने वाले रामनाथ कोविंद को भाजपा ने राष्ट्रपति बनवाया था। इसके बाद दलित वोटर्स का भाजपा पर भरोसा बढ़ा। 2014 के मुकाबले 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की। हाल ही में हुए यूपी विधानसभा चुनाव के आंकड़े भी इसके गवाह हैं। जब बसपा के कोर वोटर्स भाजपा की ओर शिफ्ट हुए। 
 

4 of 7
द्रौपदी मुर्मू - फोटो : अमर उजाला
2.  महिला शक्ति का भी एहसास : द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति बनने वाली दूसरी महिला होंगी। भारत में महिलाओं की आबादी पुरुषों के बराबर है। द्रौपदी की जीत से महिलाओं में भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा। द्रौपदी के संघर्ष की कहानी भी लोग जानते हैं। प्रोफेसर प्रवीण कहते हैं, ‘महिला वोटरों का झुकाव भाजपा की ओर माना जाता है। खुद प्रधानमंत्री कई बार इसका जिक्र कर चुके हैं। ऐसे में एक महिला के राष्ट्रपति बनने से भाजपा को महिला वोटर्स में अपनी पकड़ को और मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।’ 
 
विज्ञापन

5 of 7
आदिवासी समाज - फोटो : अमर उजाला
3. आदिवासी बाहुल राज्यों पर फोकस : अगले दो सालों में 18 राज्यों में चुनाव होने हैं। इनमें चार बड़े  ओडिशा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। वहीं, पांच राज्य ऐसे हैं जहां अनुसूचित जनजाति और आदिवासी वोटर्स की संख्या काफी अधिक है। इनमें झारखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र शामिल हैं। इन सभी राज्यों की 350 से ज्यादा सीटों पर मुर्मू फैक्टर भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। 
 
विज्ञापन

6 of 7
प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष नड्डा के साथ द्रौपदी मुर्मू। - फोटो : अमर उजाला
4. लोकसभा चुनाव : 2024 में ही लोकसभा चुनाव भी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में 47 लोकसभा और 487 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। हालांकि, अनुसूचित जनजाति और आदिवासी वोटर्स का प्रभाव इनसे कहीं ज्यादा सीटों पर है। 2019 लोकसभा चुनाव में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 47 सीटों में 31 पर भाजपा ने जीत हासिल की थी।
विधानसभा चुनावों में जरूर भाजपा को आदिवासी इलाकों में हार का सामना करना पड़ा था। खासतौर पर छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और राजस्थान में। ऐसे में अब मुर्मू के फैक्टर से भाजपा को इन इलाकों में जीत हासिल करने की कोशिश करेगी। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
द्रौपदी मुर्मू - फोटो : अमर उजाला
5. समानता और एकता का संदेश: प्रो. प्रवीण कहते हैं, ‘द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। ऐसे में यहां से किसी आदिवासी महिला को राष्ट्रपति पद पर ले जाने से समानता और एकता का बड़ा संदेश जा रहा है।’
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें