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सरकारी वकील ने तर्क दिया कि लड़की ने बयान दिया था कि आरोपी ने उसका यौन उत्पीड़न किया, इसलिए नकारात्मक डीएनए रिपोर्ट आने के बावजूद मुकदमे को जारी रखना पड़ेगा। इसके बाद 15 सितंबर को न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने 15 सितंबर को फैसला सुनाते हुए कहा था कि डीएनए विश्लेषण बताता है कि आरोपी जैविक भ्रूण का जैविक पिता नहीं है, लेकिन यह (डीएनए रिपोर्ट) याचिकाकर्ता को कथित अपराधों के लिए पूरी तरह से दोषमुक्त नहीं करेगा।