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क्या देवेंद्र फडणवीस भी नहीं तोड़ पाएंगे महाराष्ट्र में सीएम पद का ये तिलिस्म

Fri, 08 Nov 2019 08:51 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वसंतराव नाइक, देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो)
देवेंद्र फडणवीस ने पांच साल तक अपना कार्यकाल पूरा कर इतिहास बना दिया है। पिछले 48 सालों में कोई भी मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के पांच साल पूरे नहीं कर पाया है। लेकिन वो कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री वसंतराव नाइक का दोबारा सीएम बनने के रिकॉर्ड की बराबरी करने से चूक गए।
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वसंतराव नाइक (फाइल फोटो)
वसंतराव नाइक ने न सिर्फ 1963 से 1967 तक अपना कार्यकाल पूरा किया बल्कि 1967 में दोबारा मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रच दिया। उन्होंने अपना दूसरा कार्यकाल भी पूरा किया लेकिन तीसरी बार वो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। 1972 से लेकर फडणवीस से पहले तक कोई भी सीएम दो बार मुख्यमंत्री बनना तो दूर वो अपना कार्यकाल भी पूरा नहीं कर सका। 
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देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो) - फोटो : Amar Ujala
माना जा रहा था कि फडणवीस दोबारा सीएम बन सकते हैं लेकिन भाजपा-शिवसेना तकरार के बाद आज उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, अगर भाजपा और शिवसेना गठबंधन की सरकार बनती है और फडणवीस सीएम होते हैं तो वह नाइक के रिकॉर्ड की बराबरी कर सकते हैं। 

1960 से 2014 तक महाराष्ट्र में 26 मुख्यमंत्रियों ने शपथ ली। लेकिन नाइक के बाद कोई भी मुख्यमंत्री दोबारा दोबारा सीएम नहीं बन सका। 

आपातकाल में गंवाया पद  

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शंकरराव चव्हाण (फाइल फोटो)
नाइक ने 1967 से 1972 तक अपना सीएम कार्यकाल पूरा किया था। वसंतराव नाइक दोबारा जीतकर आए और फिर से मुख्यमंत्री बने। मगर 1975 में आपातकाल के दौरान उन्हें पद से हटाकर शंकरराव चव्हाण को सीएम बना दिया गया। माना जाता था कि चव्हाण इंदिरा गांधी के वफादारों में से एक थे। मगर आपातकाल हटने के बाद वसंतदादा पाटिल सीएम बन गए। 
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महाराष्ट्र को मिला सबसे युवा सीएम 

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शरद पवार (फाइल फोटो) - फोटो : फेसबुक
आपातकाल के बाद कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में वापसी की कोशिशें कीं और पाटिल ने गठबंधन की सरकार बनाई। मगर पार्टी के भीतर उपजे मतभेदों के चलते उन्हें पद गंवाना पड़ा। उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने वाला शख्स उन्हीं की पार्टी का एक युवा नेता था। जिसका नाम था शरदराव गोविंदराव पवार। महज 37 साल की उम्र में यहां तक पहुंच शरद पवार राज्य के सबसे युवा सीएम बन गए। मगर 1980 में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। 
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जबरन वसूली के केस ने ली बलि 

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अब्दुल रहमान अंतुले (फाइल फोटो)
वर्ष 1980 में महाराष्ट्र को अब्दुल रहमान अंतुले के रूप में पहला मुस्लिम मुख्यमंत्री मिला। मगर दो साल के बाद ही उन्हें पद गंवाना पड़ा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें जबरन वसूली के एक मामले में दोषी ठहराया। 
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'पार्ट टाइम' बनकर रह गया पद 

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वसंतदादा पाटिल (फाइल फोटो)
इसके बाद महाराष्ट्र अपने सबसे बुरे दौर से गुजरा। मुख्यमंत्री का पद एक तरह से 'पार्ट टाइम' नौकरी हो गया था। इंदिरा गांधी ने अंतुले के विकल्प के तौर पर बाबासाहेब भोसले को सीएम बनाया। मगर 1983 में वसंतदादा पाटिल फिर से मुख्यमंत्री बन गए।

घोटाले में फंसे मुख्यमंत्री 

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शिवाजीराव पाटिल निलांगेकर (फाइल फोटो)
1985 में वसंतदादा पाटिल की जगह शिवाजीराव पाटिल निलांगेकर मुख्यमंत्री बने। मगर एक साल बाद ही मेडिकल परीक्षा घोटाले में नाम आने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। कांग्रेस ने फिर से शंकरराव चव्हाण पर भरोसा जताया। मगर दो साल बाद शरद पवार फिर से मुख्यमंत्री पद पर काबिज हो गए। 

मुंबई दंगों के बाद दिया इस्तीफा 

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सुधाकरराव नाइक (फाइल फोटो)
शरद पवार के केंद्रीय राजनीति में जाने के बाद सुधाकरराव नाइक मुख्यमंत्री बने। मगर 1993 के दंगों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। पवार फिर से सीएम बन गए। 
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गठबंधन का दौर शुरू 

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मनोहर जोशी (फाइल फोटो)
1995 में राज्य को पहला गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री मिला। शिवसेना-भाजपा गठबंधन में मनोहर जोशी सीएम बने। मगर जमीन घोटाले के चलते उन्हें चार साल में इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद नारायण राणे, विलासराव देशमुख, सुशील शिंदे, अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण भी सीएम बने, लेकिन कोई भी पांच साल पूरे नहीं कर पाया। 
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