सेना का 'समुद्र प्रदक्षिणा' अभियान
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अभियान की खास बातें
यह यात्रा विश्व नौकायन गति रिकॉर्ड परिषद के सख्त नियमों के तहत होगी। जहाज सिर्फ पाल से चलेगा, इंजन का इस्तेमाल नहीं होगा। कम से कम 21,600 समुद्री मील की दूरी पूरी करनी होगी। कोई नहर या कृत्रिम रास्ता इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। टीम चार-चार घंटे की शिफ्ट में काम करेगी- नौवहन, पाल संभालना, मरम्मत, खाना बनाना, और बाकी समय आराम करेगी।
दक्षिणी महासागर - सबसे कठिन चरण
यात्रा का सबसे कठिन समय दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच होगा, जब टीम केप हॉर्न को पार करेगी। इस दौरान समुद्र में बहुत ऊंची लहरें, कड़कड़ाती ठंड और तेज तूफान रहेंगे। इसे नौकायन की अंतिम परीक्षा माना जाता है।
वैज्ञानिक शोध भी करेगा सैन्य दल
यात्रा के दौरान यह टीम नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी के साथ मिलकर वैज्ञानिक शोध करेगी। इसमें समुद्र में माइक्रोप्लास्टिक की जांच, समुद्री जीवन का दस्तावेजीकरण और समुद्री पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाना शामिल है।
भारत के पिछले अभियान
- कैप्टन दिलीप डोंडे (रिटायर्ड)- पहले भारतीय जिन्होंने 2009-10 में अकेले दुनिया का चक्कर लगाया।
- कमांडर अभिलाष टोमी (रिटायर्ड)- 2012-13 में बिना रुके अकेले यात्रा करने वाले पहले भारतीय।
- नाविका सागर परिक्रमा (2017-18)- भारतीय नौसेना की छह महिला अधिकारियों की टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया।
- नाविका सागर परिक्रमा-II (2024-25)- हाल ही में पूरा हुआ।