टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रहे सायरस मिस्त्री की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। महाराष्ट्र के पालघर में हुए इस हादसे में 54 साल के सायरस ने दम तोड़ दिया। सायरस की गिनती देश के बड़े उद्योगपतियों में होती थी। अचानक आए इस खबर ने हर किसी को हैरान कर दिया है।
सायरस मिस्त्री के पिता पलोनजी मिस्त्री भी देश के दिग्गज अरबपतियों में शुमार रहे। हालांकि, वह हमेशा गुमनाम ही रहे। उन्होंने कभी भी मीडिया में शोहरत हासिल करने की कोशिश नहीं की। यही कारण है कि उन्हें हमेशा गुमनाम अरबपति के नाम से जाना जाता रहा है।
आज हम आपको बताएंगे कि कैसे सायरस मिस्त्री ने उद्योग जगह में अपनी एक अलग पहचान बनाई। टाटा ग्रुप के चेयरमैन तक कैसे पहुंचे? टाटा परिवार से उनके क्या रिश्ते हैं और बाद में टाटा के साथ उनका क्या विवाद हुआ? आइए जानते हैं पूरी कहानी...
परिवार से शुरुआत करते हैं
सायरस मिस्त्री के पिता पलोनजी मिस्त्री को दुनिया का सबसे गुमनाम अरबपति कहा जाता था। वह बहुत कम ही सार्वजनिक जगहों पर दिखते थे। 1929 में पलोनजी मिस्त्री का जन्म एक पारसी परिवार में हुआ था। यहां से उच्च शिक्षा के लिए वह लंदन के इंपीरियल कॉलेज गए। हालांकि, इसके पहले उन्होंने मुंबई के कैथेड्रल और जॉन केनन स्कूल में पढ़ाई की।
उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत 18 साल की उम्र में पारिवारिक बिजनेस से ही की। 1865 में स्थापित अपनी पिता की कंपनी के लिए उन्होंने कई देशों में सेवाएं दीं। 1970 के दशक में उन्होंने मध्य पूर्व के देशों, अबू धाबी, दुबई और कतर तक अपने व्यापार को बढ़ा लिया। उनकी कंपनी ने ओमान के सुल्तान के महल के साथ बहुत सी वीआईपी इमारतों का निर्माण किया।
पलोनजी ने 2003 में पात्सी पेरिन दुबाशो से शादी की। पात्सी आयरिश थीं। शादी के बाद पलोनजी को भी आयरिश नागरिकता मिल गई। लेकिन ज्यादातर वह मुंबई में रहते थे। उनकी कंपनी ने ही भारतीय रिजर्व बैंक की बिल्डिंग और ताज महल पैलेस होटल जैसी अन्य इमारतें बनाईं।
पलोनजी के दो बेटे और दो बेटियां हुईं
पलोनजी मिस्त्री के दो बेटे हुए। शापूर और सायरस मिस्त्री। इसके अलावा दो बेटियां हैं। लैला और अल्लू। सायरस का जन्म मुंबई में चार जुलाई 1968 को हुआ था। सायरस ने लंदन बिजनेस स्कूल और इंपीरियल कॉलेज से पढ़ाई की थी। सायरस मिस्त्री के पास भी आयरिश नागरिकता थी।
टाटा परिवार से क्या है रिश्ता?
सायरस मिस्त्री की बहन यानी अल्लू की शादी नोएल टाटा से हुई है। नोएल रतन टाटा के सौतेले भाई हैं। इस तरह से मिस्त्री परिवार का रिश्ता टाटा परिवार से जुड़ गया।
ऐसे व्यापारिक सफर की शुरुआत की
सायरस के दादा शपूरजी मिस्त्री भी देश के बड़े उद्योगपति रहे। उन्होंने कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में काम शुरू किया था। मुंबई स्थित रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और होटल ताल की बिल्डिंग भी मिस्त्री की कंपनी ने ही बनाई है। 1991 में पढ़ाई पूरी करने के बाद सायरस भी पिता-दादा के व्यापार में उतर गए। वह शापूरजी पलोनजी एंड कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर रहे। मिस्त्री की कंपनी ने टाटा ग्रुप में करीब 18.5 फीसदी हिस्सेदारी खरीद रखी थी। ऐसे में 2006 में सायरस बतौर बोर्ड मेंबर के टाटा एंड संस ग्रुप में शामिल हुए। उसी दौरान उनके पिता यानी पलोनजी मिस्त्री ने रिटायरमेंट लिया था। इसके पहले 1990 से 2009 तक वह टाटा एलेक्सी के डायरेक्टर भी रहे। वहीं, 2006 तक टाटा पॉवर कॉरपोरेशन के निदेशक भी रहे।
2013 में टाटा संस के चेयरमैन बने
टाटा संस ने 2013 में सायरस मिस्त्री को चेयरमैन बनाया। इसके साथ वह टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा कंसल्टेंसी, टाटा पॉवर, टाटा टेलीसर्विसेज, इंडियन होटल्स, टाटा ग्लोबल बेवरेज, टाटा केमिकल्स के भी चेयरमैन बन गए। 2016 में सायरस मिस्त्री और टाटा ग्रुप के बीच अनबन शुरू हुई। तब टाटा संस के बोर्ड ने सायरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटा दिया। इसके बाद ये मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में चला गया। पहले तो ट्रिब्यूनल ने टाटा संस के फैसले को सही ठहराया। हालांकि, बाद में सायरस ने फिर अपील दायर की। 2019 में इस मामले में फैसला आया और तब ट्रिब्यूनल का फैसला सायरस के पक्ष में आया। ट्रिब्यूनल ने टाटा संस के नए चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को अवैध बताया। ट्रिब्यूनल के इस फैसले के खिलाफ टाटा संस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, बाद में सायरस ने एलान कर दिया कि वह टाटा संस के दोबारा चेयरमैन नहीं बनेंगे।