भारत देश में क्लीनिकल ट्रायल की देखरेख और उसको मंजूरी देने के लिए कुछ शीर्षस्थ नियामक संस्थान होते है, जिनकी अनुमति के बिना क्लीनिकल ट्रायल
संभव नहीं हो पाते हैं। वह शीर्षस्थ नियामक संस्थान इस प्रकार हैं-
DCGI – ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (औषधि नियंत्रक)
इस संस्था के माध्यम से भारत सरकार द्वारा सभी क्लीनिकल ट्रायल का अपनी देखरेख में नियंत्रण किया जाता है।
ICMR – (भारतीय मेडिकल रिसर्च परिषद)
यह एक सर्वोच्च संस्था है, इसका कार्य सभी जैव चिकित्सा और अनुसंधान को समन्वय कराती है।
GEAC – (जेनेटिक इंजीनियरिंग एप्रूवल कमेटी)
यह अनुमोदन संस्थान की तरह कार्य करती है। यह अनुमोदन समिति जेनेटिक इंजीनियरिंग, जीव विज्ञान, क्लीनिकल जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों के इस्तेमाल और आणविक के क्षेत्र में क्लीनिकल ट्रायल का अनुमोदन करती है।
GEAC, DCGI द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों पर अपना कार्य करती है।
DBT विभाग – (जैव प्रौद्योगिकी विभाग)
भारत में जीव विज्ञान जैव प्रौद्योगिकी विकास के लिए यह आधुनिक क्षेत्र की नई प्रेरणा की देखरेख करता है।
AERB – (परमाणु ऊर्जा समीक्षा बोर्ड)
इस प्राधिकरण का कार्य नवीन प्रकार के विकिरण उपकरण, निरीक्षण और अनुमोदन विनियामक नियंत्रण, प्रतिष्ठानों के लिए विकिरण उपकरणों के पंजीकरण का कार्य करना होता है।
BARC – (भाभा एटॉमिक अनुसंधान केंद्र)
यह सर्वोच्च संस्थान है, जो भारत में सभी विकिरण से संबंधित परियोजनाओं की मंजूरी देता है और उनकी देखरेख करता है।
DCGI -
जितने भी क्लीनिकल ट्रायल्स होते है, उनमें रेडियो फार्मेस्युटिकल के लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की विशेषज्ञ राय लेता है।
DCC – (औषध परामर्शदाता समिति)
इसका कार्य केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करता है।
CDL – (केंद्रीय औषध प्रयोगशाला)
यह भारत सरकार की राष्ट्रीय गुणवत्ता सांविधिक प्रयोगशाला है, जो दवाओं के नियंत्रण के लिए कार्य करता है।
CLAA – (सेंट्रल लाइसेंस प्राधिकरण)
CDSCO के अंतर्गत दवाओं के विनिर्माण लाइसेंस के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
DTAB – (ड्रग्स तकनीकी सलाहकार बोर्ड)
यह CDSCO को तकनीकी मार्गदर्शन देने का कार्य करता है।