राहुल गांधी शिव भक्ति में लीन हैं। राहुल गांधी की इस भक्ति पर भाजपा कटाक्ष कर रही है। भाजपा के नेता कांग्रेस अध्यक्ष की इस आस्था को उनका पाखंड बता रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत को मुसलमान काफी प्रिय लगने लगे हैं। विज्ञान भवन में तीन दिन की व्याख्यान माला में मोहन भागवत ने गुरू गोलवरकर की किताब 'बंच ऑफ थॉट्स' में बदलाव को स्वीकार करते हुए हिन्दुत्व में मुसलमान को समाहित कर लिया है। आखिर कांग्रेस और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इस विचारधारा में बदलाव का कनेक्शन क्या है?
इस हंसी का मतलब क्या है?
वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय और राहुल देव का कहना है कि राहुल गांधी मुस्लिम परस्ती की छवि से कांग्रेस को ऊबारने के लिए यह सब कर रहे हैं। लेकिन राम बहादुर राय इस सवाल पर हंस देते हैं कि आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत भी तो राष्ट्रीय सेक्युलर संघ के प्रमुख हो गए हैं। उन्होंने भी गुरू गोलवरकर की किताब में बदलाव कर दिया है।
इस पर राय का कहना है कि राहुल गांधी की आरएसएस प्रमुख से तुलना नहीं की जा सकती। संघ एक बहुत बड़ा संगठन है। राहुल देव मानते हैं कि हां, संघ ने अपने भीतर बदलाव किया है। संघ ने अपने भीतर खुलापन लाया है।
हालांकि राहुल देव का कहना है कि इंद्रेश कुमार जैसे संघ के प्रचारक काफी समय से मुस्लिम समुदाय के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, लेकिन यह एक बड़ा वैचारिक बदलाव है। देव के अनुसार इसे संघ की निचली ईकाई तक आने में समय लग सकता है।
राहुल देव एक कदम आगे बढ़कर कहते हैं कि संघ का यह बदलाव सर संघचालक का विचार नहीं है, बल्कि यह संघ की आधिकारिक नीति में परिवर्तन है। इसके लिए संघ एकजुट है।
कांग्रेस और आरएसएस दोनों में बदलाव?
इस सवाल से कांग्रेस के नेता असहमत हैं। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पार्टी की विचारधारा उदार और वसुधैव कुटुम्बकम् पर आधारित रही है। कांग्रेस के मुताबिक पार्टी ने हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण सबको बराबर का महत्व देकर भारत की अनेकता में एकता को स्थान दिया है।
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला इसकी पुरजोर वकालत करते हैं। पार्टी के प्रवक्ता डॉ. गौरव और पार्टी के सचिव विनीत पुनिया की भी यही राय है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पार्टी के पुराने दिग्गज नेताओं से लेकर वर्तमान तक किसी की आस्था पर कोई सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता।
पंडित जवाहर लाल नेहरू कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और उन्होंने हमेशा मंदिर, साधु, संत का आदर किया। मुसलमान समेत सभी संप्रदायों, धर्मों का सम्मान किए।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा और राजीव ने भी इस परंपरा को निभाया। कांग्रेस अध्यक्ष भी इसी परंपरा के अनुयायी हैं।