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चंद्रयान-2: विक्रम से संपर्क में इसरो को मिला नासा का साथ, साझा करेगा लैंडिंग की तस्वीरें

Fri, 13 Sep 2019 10:31 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नासा विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है - फोटो : Social Media
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से संपर्क को लेकर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का सहयोग मिल रहा है। नासा ने कहा है कि वह इसरो के साथ चंद्रमा के उस जगह की तस्वीरें साझा करेगा जहां सात सितंबर की अल सुबह विक्रम लैंडर ने हार्ड लैंडिंग की थी।
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चंद्रयान- 2 - फोटो : ISRO
न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि, नासा चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की लैंडिग से पहले और बाद की तस्वीरों को इसरो के साथ साझा करेगा। इससे विक्रम को लेकर किए जा रहे अध्ययन में मदद मिलेगी।
 
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विक्रम लैंडर - फोटो : isro
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी भी विक्रम लैंडर के साथ संचार को फिर से स्थापित करने का प्रयास कर रही है, जिसने 7 सितंबर से कोई संकेत प्रेषित नहीं किया है।

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moon shrinking nasa
नासा का डीप स्पेस नेटवर्क (DSN) विक्रम लैंडर के साथ संचार को फिर से स्थापित करने की उम्मीद में रेडियो सिग्नल भेज रहा है। इसरो भी लैंडर के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए बंगलूरू के पास स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (IDSN) के एंटेना का उपयोग कर रहा है।
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chandrayaan 2 journey - फोटो : पीटीआई
नासा ने चांद की सतह पर गतिहीन पड़े विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित करने के लिए उसे 'हैलो' का संदेश भेजा है। अपने डीप स्पेस ग्राउंड स्टेशन नेटवर्क के जरिए नासा के जेट प्रोपल्सन लैबोरेटरी (जेपीएल) ने लैंडर के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए विक्रम को एक रेडियो फ्रीक्वेंसी भेजी है। नासा के एक सूत्र ने इस बात की पुष्टि की।
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चंद्रयान-2 - फोटो : ISRO
विक्रम से संपर्क स्थापित करने की उम्मीदें दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही हैं। 14 पृथ्वी दिवस के बाद 20-21 सितंबर को जब चंद्रमा पर रात होगी तब विक्रम से दोबारा संपर्क स्थापित करने की सारी उम्मीदें खत्म हो जाएंगी। 

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चंद्रयान- 2 - फोटो : ANI
एक अन्य अंतरिक्ष यात्री स्कॉट टिल्ले ने भी इस बात की पुष्टि की है कि नासा के कैलिफोर्निया स्थित डीएसएन स्टेशन ने लैंडर को रेडियो फ्रीक्वेंसी भेजी है। टिल्ले उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने 2005 में गुम हुए नासा के एक जासूसी उपग्रह का पता लगाया था। 
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चंद्रयान-2 मिशन की अगली तारीख की जल्द होगी घोषण - फोटो : PTI
लैंडर को सिग्नल भेजने पर चांद रेडियो रिफ्लेक्टर के तौर पर कार्य करता है और उस सिग्नल के एक छोटे से हिस्से को वापस धरती पर भेजता है जिसे 8,00,000 किलोमीटर की यात्रा के बाद डिटेक्ट किया जा सकता है।
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