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चमोली में टूटा ग्लेशियर, इन 10 तस्वीरों से समझिए उत्तराखंड की आपदा

Sun, 07 Feb 2021 08:12 PM IST
स्वाति सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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उत्तराखंड - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के चमोली जिले के रैनी में रविवार सुबह ग्लेशियर फट गया। ग्लेशियर फटने से धौली नदी में बाढ़ आ गई। इससे चमोली से हरिद्वार तक खतरा बढ़ गया। सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम मौके के लिए रवाना हो गई। वहीं, चमोली जिले के नदी किनारे की बस्तियों को पुलिस लाउडस्पीकर से अलर्ट किया गया।
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उत्तराखंड - फोटो : अमर उजाला
कर्णप्रयाग में अलकनंदा नदी किनारे बसे लोग मकान खाली करने में जुटे। ऋषि गंगा और तपोवन हाइड्रो प्रोजेक्ट पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। वहीं, आपदा के दौरान रैणी  में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला पुल क्षतिग्रस्त, सीमा पर आवाजाही ठप हो गई है। 
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उत्तराखंड - फोटो : अमर उजाला
तपोवन हाइड्रो प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई मजदूर भी सुरंग में फंसे हैं। वहीं, सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आपदा में मृतकों के परिवार को चार-चार लाख रुपये देने की घोषणा की है। वहीं, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, अगर आप प्रभावित क्षेत्र में फंसे हैं, आपको किसी तरह की मदद की जरूरत है तो कृपया आपदा परिचालन केंद्र के नंबर 1070 या 9557444486 पर संपर्क करें। कृपया घटना के बारे में पुराने वीडियो से अफवाह न फैलाएं। सीएम ने चमोली का दौरा किया। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, आप सभी धैर्य बनाए रखें। लोगों की मदद के लिए जो भी जरूरी कदम हैं वो सरकार उठा रही है।

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उत्तराखंड - फोटो : अमर उजाला
अपर जिलाधिकारी टिहरी शिव चरण द्विवेदी ने बताया कि धौली नदी में बाढ़ आने की सूचना मिलने के बाद जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही हरिद्वार जिला प्रशासन ने भी अलर्ट जारी कर दिया है। सभी थानों और नदी किनारे बसी आबादी को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। ऋषिकेश में भी अलर्ट जारी किया गया है। नदी से बोट संचालन और राफ्टिंग संचालकों को तुरंत हटाने के निर्देश  दिए गए हैं।
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उत्तराखंड - फोटो : फाइल
उत्तराखंड में चमोली जिले के रैनी में आई आपदा के दौरान तपोवन सुरंग में काम कर रहे कुछ मजदूरों के फंसे होने की जानकारी मिली तो आईटीबीपी के जवान देवदूत बनकर उतरे। गहरी खाई में रस्सियों के सहारे उतरकर टीम मजदूरों को बचाने में जुट गई। जवानों ने अब तक करीब 12 मजदूरों को सकुशल बचा लिया है। 
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उत्तराखंड - फोटो : अमर उजाला
ऋषिगंगा नदी में जैसे ही बाढ़ आई सुरंग में भी नदी का पानी और मलबा घुस गया। इस दौरान वहां काम कर रहे करीब 16 से 17 मजदूर मलबे में फंस गए। आपदा की सूचना पर आईटीबीपी, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ टीमें बचाव कार्य में जुट गईं। 
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उत्तराखंड - फोटो : अमर उजाला
ऋषि गंगा में ग्लेशियर टूटने के कारण इसके किनारे पर जो भी निर्माण कार्य किया गया था, वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। रैनी गांव के निकट बना ऋषि गंगा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पूर तरह तबाह हो चुका था। जोशीमठ और मलरिया हाईवे पर बीआरओ द्वारा बनाया गया पुल बह गया था। वहां का रास्ता अब पूरी तरह बंद हो चुका था। वहां पर छह गड़रिये जो कि अपने पशुओं के साथ रहते थे, वे भी बाढ़ की चपेट में आ गए।

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उत्तराखंड - फोटो : अमर उजाला
बताया जा रहा है कि तपोवन टनल के भीतर की स्थिति बहुत खराब थी। वहां काम करने वाले कई श्रमिक टनल की दीवार के साथ चिपके हुए थे।उनके शरीर का पूरा हिस्सा रेत में धंसा हुआ था। आईटीबीपी ने यहां से 17 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हिमवीरों ने इस दौरान टनल में से तीन शवों को भी बाहर निकाला।

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उत्तराखंड - फोटो : अमर उजाला
बताया जा रहा है कि ग्लेशियर फटने के बाद बांध क्षतिग्रस्त हुआ। जिससे नदियों में बाढ़ आ गई है। तपोवन बैराज पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। श्रीनगर में प्रशासन ने नदी किनारे बस्तियों में रह रहे लोगों से सुरक्षित स्थानों में जाने की अपील की है। वहीं, नदी में काम कर रहे मजदूरों को भी हटाया जा रहा है।
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उत्तराखंड - फोटो : अमर उजाला
ऋषि गंगा में ग्लेशियर टूटने के कारण इसके किनारे पर जो भी निर्माण कार्य किया गया था, वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। रैनी गांव के निकट बना ऋषि गंगा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पूर तरह तबाह हो चुका था। जोशीमठ और मलरिया हाईवे पर बीआरओ द्वारा बनाया गया पुल बह गया था। वहां का रास्ता अब पूरी तरह बंद हो चुका था। वहां पर छह गड़रिये जो कि अपने पशुओं के साथ रहते थे, वे भी बाढ़ की चपेट में आ गए।
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