ब्रिटेन में मध्यावधि चुनावों का शोर थम चुका है और देश हंग असेंबली की ओर हैं। पूरी दुनिया की निगाहें इन चुनावों पर जमी हुई थी। हर कोई इसके परिणामों का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। लेकिन क्या आप इंग्लैंड के लोकतंत्र के बारे में कुछ जानते हैं। नहीं, तो हम आपको बताते हैं दुनिया की सबसे रोचक लोकतांत्रिक व्यवस्था के बारे में जहां आज भी राजशाही है और यहां की महारानी दर्जनों देशों की राष्ट्राध्यक्ष हैं। जिन्हें बिना किसी वीजा और रोकटोक दर्जनों देशों में कभी भी आने जाने की आजादी है, उनमें अपना देश भारत भी है।
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ब्रिटेन की संसद को पार्लियामेंट ऑफ यूनाइटेड किंगडम या ब्रिटिश संसद भी कहते हैं। मूलतः यह चार देशों इंग्लैंड, उत्तरी आयरलैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स की संयुक्त संसद है, जिसकी स्थापना 1 मई 1707 को हुई थी।
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ब्रिटेन की संसद में दो सदन हैं, जिन्हें भारत की तरह उच्च और निम्न सदन के रूप में जाना जाता है। उच्च सदन हाउस ऑफ लार्डस और निम्न सदन हाउस ऑफ कॉमंस कहलाता है। हाउस ऑफ लार्डस के सदस्यों की संख्या 100 जबकि निम्न सदन यान हाउस हॉफ कॉमंस के सदस्यों 650 होती है।
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पिछले चुनावों तक इन सीटों की संख्या 646 थी जिनमें से इंग्लैंड में 529, उत्तरी आयरलैंड में 18, स्कॉटलैंड में 59 और वेल्स में 40 सीटें हैं।
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ब्रिटेन की लोकतंत्र की प्रमुख यानि राष्ट्रप्रमुख वहां की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय हैं। लोकतांत्रिक रूप से वहां की जनता निम्न सदन के सांसदों का चुनाव करती है। बहुमत वाला दल अपने नेता यानि देश के प्रधानमंत्री का चुनाव करते हैं।
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theresa me
- फोटो : theresa me
फिलहाल ब्रिटेन की संसद में प्रमुख राजनीतिक दल के रूप में कंजरवेटिव पार्टी जिसकी नेता थेरेसा मे (मौजूदा प्रधानमंत्री), लेबर पार्टी जिसके नेता जेरेमी कार्बिन, स्कॉटिश नेशनल पार्टी जिसके नेता निकोला स्टर्जन, लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी जिसके नेता टिम फेरोन, और डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी है जिसके नेता अरलेन फोस्टर हैं। हालांकि मुख्य चुनावी दल लेबर और कंजरवेटिव पार्टी हैं। बाकी दलों की नुमांइदगी तो नाममात्र की है।
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अब कुछ बातें वहां की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के बारे में। भारत में जो भूमिका है राष्ट्रपति की है इंग्लैंड में उन तमाम भूमिकाओं को वहां की महारानी पूरा करती हैं। मसलन राष्ट्राध्यक्ष होने के साथ साथ वह सेनाओं की भी प्रमुख हैं।
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- फोटो : demo pics
खास बात ये है कि महारानी एलिजाबेथ ब्रिटेन के साथ साथ राष्ट्रमंडल समूह की भी प्रमुख हैं इसके अलावा आस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड सहित दर्जनभर देशों की राष्ट्राध्यक्ष हैं। कुल मिलाकर वह राष्ट्रमण्डल के सोलह स्वतन्त्र सम्प्रभु देशों की संवैधानिक महारानी हैं।
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एक रोचक तथ्य ये भी है कि कॉमनवेलथ देशों (जो कभी इंग्लैंड का उपनिवेश रहे हैं) में महारानी को आने जाने के लिए किसी वीजा या पासपोर्ट की जरूरत नहीं है। वह जब चाहे जहां चाहे किसी भी देश की यात्रा कर सकती हैं।
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इन देशों में कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान, कीनिया, एंटीगुआ, बारबडोस, ब्रुनेई, सिंगापुर और मालदीव जैसे देश कभी इंग्लैंड के गुलाम रहे हैं और ये आज भी कॉमनवेल्थ का हिस्सा हैं। इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को आज भी यहां आने जाने के लिए वीजा की जरूरत नहीं पड़ती।
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खास बात ये है कि भारत भी उन देशों में शामिल है जहां की यात्रा के लिए महारानी एलिजाबेथ को वीजा या पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती और वो जब चाहें भारत आ सकती हैं।
ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ अभी तक बिना वीजा और पासपोर्ट के कुल 116 देशों की यात्राएं कर चुकी हैं। पूरी दुनिया में उनका जन्मदिन साल में दो बार मनाया जाता है। कनाडा आस्टेलिया जैसे देश अलग अलग तिथि को और इंग्लैंड एक अन्य तिथि में महारानी का जन्मदिन मनाते हैं।