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बाघ के मुंह से पत्नी को बचा लाया बहादूर पति

Mon, 06 Feb 2017 07:22 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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बाघ द्वारा कल धनीराम की मौत के बाद वहां से दो किलोमीटर दूर जस्सा सिंह के घर पर उसकी पत्नी मंजीत कौर पर काल बनकर झपटा मंजीत के साहस व परिवार के लोगों की दिलेरी के चलते मंजीत कौर को खींच कर तो नहीं ले जा सका लेकिन बुरी तरह घायल कर दिया। उन्हें जिला चिक्तसालय भर्ती कराया गया हैं इस घटना से वन विभाग के पिंझड़ा लगाने और कड़ी चौकसी करने की पोल खुल गयी अक्रोष में लोगों ने वन विभाग के खिलाफ प्रर्दशन किया।
 

 
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बाघ के मुंह से पत्नी को बचा लाया बहादूर पति

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कल कुंवरपुर निवासी धनीराम की बाघ के हमले से हुई मौत के बाद पूरा इलाका सतर्क था। वन विभाग ने भी अक्रोष को शांत करने के लिये गन्ने के खेत में पिंझड़ा लगा कर एक पड्डा बांध दिया लेजर कैमरे भी लगाये गये और कड़ी चौकसी की बात कही गयी।

लेकिन इस चौकसी को धता बताते हुए खूनी बाघ वहां से दो किलोमीटर दूर उसी इलाके के ग्राम करनापुर शाहगढ़ की आबादी से सटे जस्सा सिंह के फार्म पर रात दो बजे जा पहुंचा फार्म के पिछले हिस्से से घुस कर जहां पूरा परिवार सो रहा था।
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जस्सा सिंह अपनी पहली पत्नी के मायेके रूद्रपुर गये हुए थे घर में उनकी दूसरी पत्नी मंजीत कौर व आठ सदस्य सो रहे थे बाघ ने चारपाई पर मच्छरदानी लगाकर सो रही मंजीत पर हमला कर खीचनें की कोशिश की जिसपर मंजीत कौर ने चीख कर शोर मचाया मंजीत कौर के पुत्र बलवंत ने बताया कि हम सभी लोग शोर मचाते हुए लाठी डंडे लेकर बाघ पर टूट पड़े जिसकी वजह से बाघ घबराकर उनकी माता को खींच कर नहीं ले जा सका।

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बुरी तरह घायल हो गई बलवंत ने यह भी बताया कि बाघ ने उसके बाद भी दो बार फार्म के निकट आने की कोशिश की लेकिन उन लोगों की चौकसी के चलते कामयाब नहीं हो सका। उनका प्राइवेट चिकित्स से प्राथमिक उपचार कराया और हालत नाजुक देख 108 एंबुलेंस को फोन कर बुलाकर जिला अस्पाताल पहुंचाया जहां पिता जस्सा सिंह सहित परिवार के लोग मौजूद हैं उसने यह भी बताया कि आग जलाने व शोर मचाने के बावजूद फार्म हाउस के नजदीक ही बाघ के पैरों के निशान मिले हैं।
 
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वन विभाग के मुताबिक गन्ने के खेत के चारों ओर पघमार्क ट्रेस करने से गन्ने के खेत तक पघमार्क मिले हैं, लेकिन उसके आगे पघमार्क नहीं मिले हैं, लेकिन समाचार भेजे जाने तक गन्ने के खेत के चारो ओर न तो लेजर कैमरे लगाये गए और ना ही पिंझड़ा रखा गया खेत के चारो ओर बड़ी संख्या में ग्रामीणो की भीड़ मौजूद हैं सामाजिक वानिकि एंव टाडगर रिर्जव के वन कर्मी भी मौजूद हैं।
 
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इधर लगातार हो रही घटनाओ को लेकर इलाके के ग्रामीणों व किसानों का गुस्सा चौथे आसमान पर पहुंच गया उनमें काफी दहशत दिखाई दे रही हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ प्रर्दशन भी किया उनका कहना था कि वन विभाग यदि चाहे तो बाघ को ट्रंकूलाइज कर पकड़ सकता है लेकिन यहां पकड़ने के नाम पर महज खानापूर्ती की जा रही है।
 
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इधर आज की घटना को लेकर कुंवरपुर व करनापुर शाहगढ़ सहित इलाके में सन्नाटा छाया हुआ हैं और लोग बाघ को पकड़े जाने तक अपने खेतों की ओर भी दहशत की वजह से नहीं जा रहे हैं क्योंकि लोगों का कहना है कि बाघ जिस तरह से हमला कर रहा है उससे लगता है कि वह खूनी व शातिर हो गया हैं। इस मौके पर लोगों का जन-प्रतिनिधियो के प्रति भी आक्रोष दिखायी दिया। यदि घायल मंजीत कौर साहस का परिचय देते हुये अपना हाथ ना चलाती तो शायद बाघ से उसकी जान न बच पाती।
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