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Election: 2014 तक पूर्वोत्तर के एक भी राज्य में नहीं थी BJP की सरकार, नौ साल में ऐसे बदला सियासी नक्शा

Thu, 02 Mar 2023 07:17 PM IST
हिमांशु मिश्रा इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अब पूर्वोत्तर का सियासी नक्शा एकदम से बदल चुका है। आइए जानते हैं कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से पूर्वोत्तर के इन राज्यों में कैसे सियासी नक्शा बदल गया? आखिर ये राज्य भाजपा के लिए क्यों जरूरी हैं? भाजपा ने यहां कैसे कांग्रेस और लेफ्ट का समीकरण बिगाड़ दिया? 
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पूर्वोत्तर में ऐसे बदला सियासी नक्शा - फोटो : अमर उजाला
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पूर्वोत्तर भारत में आठ राज्य आते हैं। इनमें त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय, असम, अरुणाचल, मणिपुर, सिक्किम और मिजोरम शामिल हैं। इन आठ राज्यों में से तीन राज्यों के चुनाव नतीजे आज आ रहे हैं। तीनों ही राज्यों में पूर्व की सरकारें बरकरार रहने की उम्मीद है। 

त्रिपुरा और नगालैंड में भाजपा गठबंधन ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि मेघालय में एनपीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, बहुत के आंकड़े 31 से दूर है। ऐसे में संभव है कि पिछली बार की तरह यहां भी एनपीपी प्रमुख कोनराड संगमा भाजपा और यूडीपी के साथ मिलकर सरकार बना ले। इसके कयास इसलिए भी लगाए जा रहे हैं क्योंकि मतगणना से ठीक दो दिन पहले ही गठबंधन को लेकर असम के मुख्यमंत्री और भाजपा की अगुआई वाली नॉर्थ ईस्ट डेवलपमेंट अलायंस के मुखिया हिमंत बिस्व सरमा ने मेघालय के मुख्यमंत्री और NPP के मुखिया कोनराड संगमा से मुलाकात की है।  

इन चुनावी नतीजों से ये भी साफ हो गया है कि पूर्वोत्तर के आठ में से सात राज्यों में भाजपा का राज कायम रहेगा। वह राज जो 2014 से पहले तक कांग्रेस के पास था। 2014 से पहले पूर्वोत्तर के इन राज्यों में कभी भी भाजपा की सरकार नहीं बनी थी। सिर्फ 2003 में अरुणाचल प्रदेश छोड़कर। तब यहां कांग्रेस के दिग्गज नेता ने भाजपा जॉइन कर ली थी और अपने साथ कई कांग्रेस के विधायकों को भी लेकर आए थे। इससे भाजपा ने पहली बार पूर्वोत्तर के किसी राज्य में सरकार बनाई थी। 



अब पूर्वोत्तर का सियासी नक्शा एकदम से बदल चुका है। आइए जानते हैं कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से पूर्वोत्तर के इन राज्यों में कैसे सियासी नक्शा बदल गया? आखिर ये राज्य भाजपा के लिए क्यों जरूरी हैं? भाजपा ने यहां कैसे कांग्रेस और लेफ्ट का समीकरण बिगाड़ दिया? 
 
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2014 में ऐसा था पूर्वोत्तर का सियासी नक्शा - फोटो : अमर उजाला
शुरुआत 2014 से करते हैं
देश में भाजपा की अगुआई वाली एनडीए ने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की। उस वक्त पूर्वोत्तर के राज्यों में पूरी तरह से कांग्रेस का राज था। लेफ्ट की स्थिति भी मजबूत थी। पूर्वोत्तर के आठ में से पांच राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। एक-एक में लेफ्ट, एसडीएफ और एनपीएफ की सरकार थी। मसलन असम, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में कांग्रेस की सरकार थी। वहीं, त्रिपुरा में सीपीआई(एम) और सिक्किम में एसडीएफ की सरकार थी। नगालैंड में एनपीएफ का राज था। 

ये भी पढ़ें : Tripura-Nagaland-Meghalaya Result: त्रिपुरा-नगालैंड में क्यों जीता भाजपा गठबंधन, मेघालय में क्या हुआ? चार कारण
 
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2019 में ऐसा था पूर्वोत्तर का सियासी नक्शा - फोटो : अमर उजाला
2019 आते-आते पूरी तरह से बदल गया पूर्वोत्तर का सियासी नक्शा 
2014 तक पूर्वोत्तर के जिन राज्यों में कांग्रेस और लेफ्ट का राज था, वहां 2016 से सरकारें बदलने लगीं। 2019 आते-आते पूरी तरह से पूर्वोत्तर का सियासी नक्शा बदल गया। आठ में से पूर्वोत्तर के सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने सरकार बना ली। भाजपा इतनी मजबूत हो गई की असम, त्रिपुरा में अकेले दम पर सरकार बनाई, जबकि मेघालय, नगालैंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में गठबंधन के साथ। केवल मिजोरम में एमएनएफ गठबंधन की सरकार थी। 

ये भी पढ़ें : Tripura-Nagaland-Meghalaya Result: तीनों राज्यों में कौन होगा मुख्यमंत्री, कैसा होगा सरकार का स्वरूप? समझें

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2023 में पूर्वोत्तर राज्यों पर भगवा राज - फोटो : अमर उजाला
अब भी बरकरार है पूर्वोत्तर में भगवा राज
सियासी पंडितों कहना है कि एक बार जहां भी भाजपा की सरकार बनती है, अमूमन उस राज्य में पूरी तरह से इस भगवा पार्टी का राज हो जाता है। पूर्वोत्तर में भी कुछ यही हुआ। चार राज्यों में पहले से भाजपा का राज कायम है। बाकी तीन राज्यों के चुनावी नतीजों ने भी साफ कर दिया है कि यहां भाजपा फिर से सत्ता में वापसी कर रही है।  मतलब आठ में से सात राज्यों में भाजपा ने अपना जादू बरकरार रखा है।  

ये भी पढ़ें :Tripura: प्रद्योत देबबर्मा की नई पार्टी टिपरा मोथा की क्यों हो रही चर्चा, त्रिपुरा की सियासत में क्या बदलेगा?

 
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भाजपा - फोटो : अमर उजाला
पूर्वोत्तर में भाजपा की जीत के पांच बड़े कारण
इसे समझने के लिए हमने नॉर्थ ईस्ट राज्यों की राजनीति पर अच्छी पकड़ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक संजय मिश्रा से बात की। उन्होंने पूर्वोत्तर में भाजपा की जीत के पांच बड़े कारण बताए।  

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह। - फोटो : ANI
1. पीएम मोदी का नॉर्थ ईस्ट पर विशेष फोकस : 2014 से पहले नॉर्थ ईस्ट के राज्यों की कुछ खास चर्चा नहीं होती थी। पीएम मोदी ने पूर्वोत्तर के इन राज्यों के विकास के लिए केंद्र सरकार ने अलग से बजट में प्रावधान किया। ये पहली बार हुआ। इसके अलावा तमाम तरह के कार्यक्रमों के जरिए भी पूर्वोत्तर के राज्यों को देश और दुनिया में प्रमोट किया जाने लगा।  
 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह। (फाइल फोटो।) - फोटो : अमर उजाला
2. केंद्र सरकार की योजनाओं से घर-घर पहुंचे पीएम मोदी : 2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद नॉर्थ ईस्ट के लोगों को केंद्र सरकार की तमाम योजनाओं का सीधे फायदा मिलने लगा। सबसे ज्यादा आवास योजना का लोगों को फायदा मिला। तीनों ही चुनावी राज्यों में 60 फीसदी से ज्यादा लोगों को आवास योजना का लाभ मिल चुका है। इसके अलावा कोरोनाकाल के दौरान केंद्र सरकार के मुफ्त राशन योजना का भी लाभ लोगों को मिला।  
 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा - फोटो : अमर उजाला
3. विकास योजनाओं ने बनाया भाजपा के लिए माहौल : केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद से पूर्वोत्तर के राज्यों में काफी तेजी से विकास हुआ। नॉर्थईस्ट के इन राज्यों को एयर, रेल और रोड कनेक्टिविटी के जरिए देश के बाकी हिस्सों से जोड़ा गया। तेजी से इन राज्यों में सड़कों का निर्माण हुआ। इससे इन राज्यों की कमाई भी बढ़ गई। लोगों को रोजगार मिला। इसके अलावा बड़े पैमाने पर यहां शिक्षण संस्थानों की शुरुआत हुई। युवाओं को कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा से जोड़ा गया। इससे भाजपा ने युवाओं के बीच भी अपनी अलग पहचान बना ली। 
 

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा - फोटो : Social Media
4. पुरानी लड़ाई को खत्म किया : केंद्र और फिर पूर्वोत्तर राज्यों में सरकार बनाने के बाद भाजपा का सबसे बड़ा फोकस राज्यों की पुरानी लड़ाईयों को खत्म करना था। भाजपा सरकार ने ऐसा किया भी। मेघालय और असम का 50 साल पुराना सीमा विवाद खत्म कर दिया। इसी तरह नगालैंड-असम सीमा विवाद को भी निस्तारित करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए। त्रिपुरा, असम और मेघालय में राजनीतिक हिंसा के मामले काफी कम हुए। इसी तरह नगालैंड में नगा संघर्ष को भी खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने अपने स्तर पर काफी काम किया। 
 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Social Media
5. पीएम मोदी का चेहरा : चुनाव में जीत का ये भी बड़ा फैक्टर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा नॉर्थ ईस्ट के इन चुनावी राज्यों में भी काफी विश्वसनीय हो गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी सूचना के अनुसार, 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद से लेकर अब तक नॉर्थ ईस्ट के इन राज्यों में 97 बार दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने नॉर्थ ईस्ट के लिए मंत्रियों की एक अलग टीम भी बनाई है। ये केंद्रीय मंत्री भी लगातार इन राज्यों का दौरा करते रहे हैं। इसका फायदा भी भाजपा को मिल रहा है। केंद्र सरकार ने 2024-25 के लिए नार्थ ईस्ट का बजट 5892 करोड़ किया है। ये 2022-23 के मुकाबले 113% ज्यादा है।
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