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जन्मदिन विशेष: पीएम मोदी की कहानी, जीवन में कभी हार नहीं मानी

Sat, 16 Sep 2017 02:59 PM IST
अभिषेक/अमर उजाला, दिल्ली
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नरेंद्र मोदी
पीएम नरेंद्र मोदी रविवार को 66 वर्ष के हो जाएंगे। हम इस खुशी के मौके पर आपके लिए लाए हैं मोदी के जीवन से जुड़े कुछ अनसुने सत्य जो आपको कर देंगे हैरान। पेश हैं हैरान कर देनें वाले सत्य। 
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मोदी के जीवन के हैरान कर देने वाले सत्य

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Modi in Childhood
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बचपन में नरिया कहकर बुलाया जाता था। नरेंद्र मोदी के पिता की रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान चलाते थे। 
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मोदी के जीवन के हैरान कर देने वाले सत्य

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Narendra Modi in School days
वर्ष 1965 में जब भारत और पाकिस्तान का युद्ध हुआ तो नरेंद्र मोदी करीब 15 साल के थे। उन दिनों वो सुबह ही अपनी टोली के साथ रेलवे स्टेशन पहुंच जाते और वहां से होकर गुजरने वाले सैनिकों की सेवा में जुट जाते थे। इसी तरह 1967 में जब गुजरात में भयंकर बाढ़ आई तो नरेंद्र मोदी अपने साथियों के साथ बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुट गए थे।

मोदी के जीवन के हैरान कर देने वाले सत्य

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Modi during Play
नरेन्द्र मोदी को बचपन में एक्टिंग का शौक था। मोदी बचपन में स्कूल में एक्टिंग, वाद-विवाद, नाटकों में भाग लेते और पुरस्कार जीतते थे। एनसीसी में भी शामिल हुए।
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मोदी के जीवन के हैरान कर देने वाले सत्य

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Modi during Sanyas
नरेन्द्र मोदी बचपन में साधु-संतों से प्रभावित हुए। वे बचपन से ही संन्यासी बनना चाहते थे। संन्यासी बनने के लिए मोदी स्कूल की पढ़ाई के बाद घर से भाग गए थे। इस दौरान मोदी पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित कई जगहों पर घूमते रहे। हिमालय में कई महीनों तक साधुओं के साथ रहे। दो साल बाद जब वह हिमालय से वापस लौटे तब उन्होंने संन्यासी जीवन त्यागने का फैसला लिया। हिमालय से लौटने के बाद मोदी ने अपने भाई के साथ मिलकर अहमदाबाद के कई स्थानों पर चाय की दुकान भी लगाईं। उन्होंने हर कठिनाई को सहते हुए चाय बेची।
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बंद कर दिया था नमक और तेल खाना

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Modi in RSS office
आरएसएस से जुड़ने के बाद नरेंद्र मोदी ने नमक और तेल खाना बंद कर दिया था। इससे उनकी मां और भाई प्रह्लाद मोदी डर गए कि कहीं नरेंद्र मोदी फिर से साधु बनने तो नहीं जा रहे हैं। नरेंद्र मोदी बचपन से ही आरएसएस से जुड़े हुए थे। 1958 में दीपावली के दिन गुजरात आरएसएस के पहले प्रांत प्रचारक लक्ष्मण राव इनामदार उर्फ वकील साहब ने नरेन्द्र मोदी को बाल स्वयंसेवक की शपथ दिलवाई थी। नरेंद्र मोदी की जीवनी लिखने वाले लेखक एमवी कामथ के मुताबिक गुजरात आरएसएस के दफ्तर हेडगेवार भवन में सुबह नरेंद्र मोदी प्रचारकों के लिए चाय नाश्ता बनाते थे।इसके बाद हेडगेवार भवन के सारे कमरों की सफाई में जुट जाते थे। आठ नौ कमरों की सफाई के बाद अपने और वकील साहब के कपड़े धोने की बारी आती थी। 
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काम को देख बनाया गया संघ प्रचारक

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Modi in RSS
मोदी आरएसएस की शाखाओं में जाने लगे। मोदी ने आरएसएस के बड़े शिविरों के आयोजन में मैनेजमेंट का हुनर खूब दिखाया। आरएसएस नेताओं का ट्रेन और बस में रिजर्वेशन का जिम्मा उन्हीं के पास होता था। लेकिन जब मोदी ने चाय की दुकान खोली तो शाखाओं में उनका आना जाना कम हो गया। नरेंद्र मोदी का मैनेजमेंट और उनके काम करने के तरीके को देखने के बाद आरएसएस में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला लिया गया। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय कार्यालय नागपुर में एक महीने के विशेष ट्रेनिंग कैंप में बुलाया गया। आरएसएस के नागपुर मुख्यालय में ट्रेनिंग लेकर नरेंद्र मोदी गुजरात आरएसएस प्रचारक बनकर लौटे।

वाघेला से थी मोदी की दोस्ती

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Vaghela with Modi
जब नरेन्द्र मोदी प्रचारक थे तो उन्हें स्कूटर चलाना नहीं आता था। शकरसिंह वाघेला उन्हें अपनी स्कूटर पर घुमाया करते थे। इमरजेंसी के दौरान नरेंद्र मोदी ने अपने आज के सबसे बड़े राजनीतिक दुश्मन शंकर सिंह बाघेला के साथ मिलकर गुजरात बीजेपी के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम किया किया और मजबूत कार्यकर्ताओं की फौज तैयार की।
उन दिनों शंकर सिंह बाघेला जनता के प्रिय नेता थे और मोदी को बेहतरीन रणनीति बनाने के लिए जाना जाता था।

मोदी के जीवन के हैरान कर देने वाले सत्य

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Modi in Kurta
नरेन्द्र मोदी संघ में कुर्ते की बांह छोटी करवा लीं, ताकि वह ज्यादा खराब न हो, जो वर्तमान में मोदी ब्रांड का कुर्ता बन गया है और देशभर में मशहूर है। 

मोदी की दाढ़ी थी और लोगों से जुदा

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Modi in young age
नरेंद्र मोदी की स्टाइल सारे प्रचारकों से जुदा थी। वो दाढ़ी रखते थे और ट्रिम भी करवाते थे। एक बार आरएसएस के तब के अध्यक्ष माधवराव गोलवलकर ने सबके सामने मोदी से दाढ़ी ट्रिम किए जाने की वजह भी पूछी थी।

चतुराई का नमूना देख सब रह गए हैरान

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Modi during Emergency
इमरजेंसी के दिनों में मोदी ने गुजरात में कई भाषाओं में लाखों की तादाद में संघ की विचारधारा को दर्शाने वाले पर्चे और पोस्टर छपवाए और पूरे देश में बेहद गुप्त तरीके से संघ के दफ्तरों तक पहुंचाने का काम किया। इमरजेंसी के दौरान ही मोदी को विश्व हिंदू परिषद की एक सभा के संचालन की जिम्मेदारी दी गई। चंदे के तौर पर एक बड़ी रकम वहां इकट्ठा हुई और तमाम विश्व हिंदू परिषद के नेताओं को उस रकम की चिंता हो रही थी। मोदी ने उसी वक्त जमीन में एक गड्ढा खोदकर उसमें वो सारी रकम दबा दी और खुद अपना गद्दा उसके ऊपर बिछा कर लेट गए।

सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा में बड़ी भूमिका

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Modi-Advani
90 के दशक में नरेंद्र मोदी ने आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा में बड़ी भूमिका निभाई थी। इसके बाद उन्हें उस वक्त के बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की एकता यात्रा का संयोजक बनाया गया। ये यात्रा दक्षिण में तमिलनाडु से शुरू होकर श्रीनगर में तिरंगा लहराकर खत्म होनी थी।

मोदी के जीवन के हैरान कर देने वाले सत्य

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Modi
नरेंद्र मोदी ने अमेरिका में मैनेजमेंट और पब्लिक रिलेशन से संबंधित तीन महीने का कोर्स किया है।

मोदी के जीवन के हैरान कर देने वाले सत्य

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Modi eating food
नरेंद्र मोदी शाकाहारी हैं। उन्होंने सिगरेट, शराब को कभी हाथ नहीं लगाया। नरेन्द्र मोदी सिर्फ साढ़े तीन घंटे की नींद लेते हैं, वे सुबह 5.30 बजे उठ जाते हैं। 
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मोदी के जीवन के हैरान कर देने वाले सत्य

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी अमेरिका की यात्रा पर - फोटो : Twitter
गुजरात दंगों के दाग के कारण वर्ष 2005 में मोदी को अमेरिका ने वीजा देने से मना कर दिया था। वहीं गुजरात में मुस्लिम कट्टरपंथी नरेन्द्र मोदी के विरोधी थे, इनमें से एक जफ्फर सरेशवाला थे जो इनके मुख्यमंत्री बनने के बाद लंदन चले गए और इनके खिलाफ प्रचार-प्रसार किया। बाद में जब वे मोदी से मिले तो इनके करीबी बन गए।
 
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