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West Bengal: बंद समर्थकों की पुलिस और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं से हाथापाई, कई इलाकों में छिटपुट हिंसा

Wed, 09 Jul 2025 04:57 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।

सार

West Bengal: पश्चिम बंगाल में बुधवार को भारत बंद के दौरान कई जिलों में वामपंथी कार्यकर्ताओं की पुलिस और टीएमसी समर्थकों से झड़पें हुईं। बंद का आह्वान 10 केंद्रीय श्रमिक संघों ने महंगाई, बेरोजगारी और ठेका प्रथा के विरोध में किया था। राज्य सरकार ने बंद समर्थकों से निपटने के लिए सख्ती बरती और कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। सड़कों व रेलवे पटरियों पर अवरोध और रैलियों के कारण कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित हुआ।
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पश्चिम बंगाल में बंद के दौरान श्रमिक संघों के कार्यकर्ता - फोटो : पीटीआई
भारत बंद के दौरान बुधवार को पश्चिम बंगाल के विभिन्न इलाकों से हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। कई जिलों में वामपंथी कार्यकर्ताओं की पुलिस और तृणमूल कांग्रेस (समर्थकों) से झड़प हुई। राज्य सरकार ने अतिरिक्त पुलिस पुलिस बलों की तैनाती की, ताकि आम जनजीवन प्रभावित न हो। 

देश के दस केंद्रीय श्रमिक संघों ने बंद का आह्वान किया हुआ था। यह बंद 'उदारीकरण, आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतें, बेरोजगारी, ठेका प्रणाली में बढ़ोतरी और अन्य मुद्दों' के खिलाफ बुलाया गया था। ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को दोहराते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस ने सख्ती से बंद समर्थकों को हटाया। उन्हें उन स्थानों से बलपूर्वक हटाया गया, जहां वे आम जनजीवन को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे।

इन उपायों के बावजूद बंद समर्थकों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में सड़कों और रेलवे ट्रैक को जाम किया और कुछ इलाकों में दुकानों व प्रतिष्ठानों को बंद करवाने की कोशिश की। हालांकि, बंद को राज्य में आंशिक समर्थन मिला। बंगाल में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं काफी हद तक प्रभावित रहीं। 

दक्षिण कोलकाता के गांगुली बागान इलाके में डीवाईएफआई और माकपा के कार्यकर्ता पुलिस से भिड़ गए, जब उन्होंने मुख्य सड़क को जाम किया और भीड़भाड़ के समय यातायात को रोक दिया। उन्होंने दुकानदारों को धमकाया कि वे अपनी दुकानें बंद करें। प्रदर्शनकारियों ने पुतले जलाए और टायरों में आग लगाई जिससे सड़क पर आग के फैलने का खतरा पैदा हुआ, जिसे पुलिस ने तुरंत बुझा दिया। पुलिस ने कुछ बंद समर्थकों को हिरासत में लिया, जिनमें एसएफआई नेता सृजन भट्टाचार्य भी शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे तो पुलिस ने बल प्रयोग कर उन्हें हटाया।
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पश्चिम बंगाल में भारत बंद का आंशिक असर - फोटो : पीटीआई
भट्टाचार्य ने कहा, (मुख्यमंत्री) ममता बनर्जी की पुलिस टीएमसी के हाथों बिक चुकी है और टीएमसी ने खुद को भाजपा के हाथों गिरवी रख दिया है। यह बंद भाजपा की नीतियों के खिलाफ था और देखिए टीएमसी सरकार ने हम पर कैसे कार्रवाई की। वह हमें शांतिपूर्ण रैली तक करने नहीं दे रहे हैं।

उत्तर कोलकाता के कॉलेज स्ट्रीट चौराहे पर एसएफआई समर्थकों की पुलिस से झड़प हुई, जब पुलिस ने सड़क से अवरोध हटाने और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कोशिश की। झड़प तब और बढ़ गई, जब बंद समर्थकों ने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को पुलिस की गाड़ी से छुड़ाने की कोशिश की।

हावड़ा के डोमजुड़ इलाके में बंद समर्थकों ने बसों और ट्रकों की आवाजाही रोकने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने उन पर लाठीचार्ज किया। उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी शहर की हिल कार्ट रोड पर पुलिस ने सड़क जाम कर रहे बंद समर्थकों को हटाया। इसी दौरान हुई झड़प में एक बंद समर्थक ने पुलिस अधिकारी की टोपी गिरा दी, जिसका दृश्य टीवी कैमरों में कैद हो गया।

दक्षिण दिनाजपुर जिले के बुनियादपुर इलाके में बंशीहारी थाने के प्रभारी अधिकारी को कैमरे में एक स्थानीय माकपा नेता मजीदुर रहमान को थप्पड़ मारते हुए देखा गया। दोनों के बीच कहासुनी हो रही थी। कूचबिहार के तूफानगंज में सीआईटीयू और टीएमसी की श्रमिक संग शाखा आईएनटीटीयूसी के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया।
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रेलवे ट्रैक को बाधिक करने का प्रयास करते बंद समर्थक - फोटो : पीटीआई
बीरभूम के किरनाहर इलाके में जब वामपंथी कार्यकर्ताओं ने बंद के समर्थन में रैली निकाली, तो उनकी टीएमसी कार्यकर्ताओं से पुलिस की मौजूदगी में झड़प हो गई। इस झड़प में माकपा के तीन समर्थक घायल हो गए जिन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

पास के रामपुरहाट में पुलिस ने वामपंथी कार्यकर्ताओं की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग 10 पर लगाए गए अवरोध को हटा दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी रामपुरहाट रेलवे स्टेशन की ओर बढ़े और रेलवे ट्रैक जाम करने की कोशिश की। रेलवे पुलिस ने उन्हें रोका, जिससे दोनों पक्षों में फिर से झड़प हो गई। बंद सुबह 6 बजे शुरू हुआ था और इसके समर्थकों ने सियालदह दक्षिण खंड के डायमंड हार्बर और उत्तर खंड के श्यामनगर स्टेशनों पर ट्रेन रोकने की कोशिश की।

बाद में दिन में बैरकपुर, कोन्नगर, दुर्गापुर, लालगोला, उलुबेरिया और बेलघरिया स्टेशनों से भी रेलवे ट्रैक जाम किए जाने की खबरें आईं। बंगाल सरकार ने बंद के दौरान सामान्य जनजीवन पर असर न पड़े, इसके लिए अतिरिक्त परिवहन व्यवस्था और सुरक्षा बलों की तैनाती की थी। पुलिस के दलों को यातायात सुचारू रखने के लिए अहम स्थानों पर तैनात किया गया। 
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बंद के दौरान बैंकों का कामकाज भी रहा बाधित - फोटो : पीटीआई
पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए माकपा के वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा, टीएमसी यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि वह खुद भाजपा से भी ज्यादा भाजपा बन गई है। अब जनता के गुस्से के फूटने में ज्यादा देर नहीं है। 

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधुरी ने कहा, कांग्रेस ने इस बंद का समर्थन किया है। टीएमसी सिर्फ बंगाल में भाजपा की राजनीति की दलाली कर रही है। ममता बनर्जी बताएं कि इस बंद की कौन सी मांगें गलत या अव्यावहारिक हैं? 

वहीं, टीएमसी नेता देबांशु भट्टाचार्य ने पलटवार करते हुए कहा, बंद के नाम पर वामपंथी जो कर रहे हैं, वह गुंडागर्दी से कम नहीं है और पुलिस इन उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। यह आम जनता का स्वाभाविक बंद नहीं है, बल्कि उन पर थोपा गया है। उन्होंने आगे कहा, देश में सिर्फ एक वामपंथी सरकार केरल में है और उसने भी बंद के खिलाफ बंगाल सरकार की तरह ही आदेश जारी किया हैऔर ये बंद समर्थक उम्मीद कर रहे हैं कि जो ममता बनर्जी 2011 से बंद के खिलाफ स्पष्ट रुख रखती आई हैं, उन्हें सड़कों पर उधम मचाने देगी? 

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