गंगा का जलस्तर इस बार 1978 और 2013 के मुकाबले कम जरूर रहा है लेकिन नुकसान करीब चार गुना ज्यादा हुआ है। गंगा और वरुणा नदी के तटीय इलाकों में आई बाढ़ से दस दिन बाद भी सैकड़ों लोगों के मकान पानी में डूबे हैं। रोज कमाने-खाने वालों का रोजगार छिन गया है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो अब तक 300 करोड़ रुपये की संपत्ति के नुकसान का प्रारंभिक आकलन किया गया है।
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थाने में बाढ़
1978 की बाढ़ में सर्वाधिक प्रभावित इलाका गोदौलिया, दशाश्वमेध क्षेत्र था। उस समय वरुणा किनारे आबादी नहीं थी और गंगा किनारे भी बसावट अस्सी से राजघाट के बीच ही थी लेकिन नगर निगम, वीडीए और राजस्व विभाग की मिलीभगत के तब से अब तक वरुणा के डूब क्षेत्र में भी सैकड़ों अवैध निर्माण हो गए हैं। पिछले कुछ सालों में वरुणा के तटीय इलाकों में एक हजार से ज्यादा लोगों ने आशियाना बनाया है। आबादी बढ़ने के साथ ही नुकसान भी ज्यादा हुआ है। इस बार आई बाढ़ का उच्चतम जलस्तर अब तक 72.56 मीटर तक पहुंच चुका है, जो 1978 और 2013 की तुलना में कम है।
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हाल बेहाल
प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 23195 हेक्टेयर जमीन में उगाई गई फसल बर्बाद हुई है। 65830 हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित हुई है। केवल फसलों का नुकसान नौ करोड़ रुपये से ज्यादा हुआ है। मारुति नगर, शिवराजपुर, पटेल नगर, जानकी नगर, विश्वास नगर, तारा नगर, कमलेश नगर, शिवराज नगर, हरिओम नगर, काशीपुरम, आरके पुरम, शिवाजी नगर, रत्नाकर विहार, गायत्री नगर, बालाजी नगर, गंगोत्री विहार कॉलोनी, रजा कॉलोनी, गणेश विहार कॉलोनी, बुद्ध विहार कॉलोनी, बजरंग नगर, भीम नगर। इनमें से ज्यादातर कॉलोनियां नगर निगम की सीमा से बाहर हैं।
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नाव पर गांव
2013 की तुलना में इस बार ज्यादा नुकसान की आशंका है। बाढ़ का पानी कम होने पर करीब पंद्रह दिन में नुकसान के वास्तविक आकलन की रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी। - मनीलाल, एडीएम वित्त/सीआरओ
ये रहा गंगा का अधिकतम जलस्तर
2016: 72.560 मीटर
2013: 72.630 मीटर
1978: 73.901 मीटर
2013 का नुकसान एक नजर में
जलकल, जलसंस्थान: 15 करोड़
नगर निगम : 35 करोड़
पीडब्ल्यूडी : 17.19 करोड़
विद्युत विभाग : 16 लाख
प्राथमिक विद्यालय : 25 लाख
कुल: 67 करोड़ 66 लाख
- 3989.160 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई फसल
- 1.79 करोड़ रुपये की फसलें एवं क्षतिग्रस्त मकान के नुकसान का आकलन
- सात दिन से अधिक जलमग्न रहने वाले 51 परिवारों को1.37 करोड़ की मदद दी गई
- सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई धनराशि : चार करोड़ 42 लाख रुपये
बाढ़ के चलते बिजली विभाग को 8 से 10 करोड़ रुपये की चपत लगने की आशंका है। करीब दो महीने पहले शहर के कोनिया मुहल्ले व अन्य इलाकों में बिजली मीटरों को घर से बाहर लगाया गया था। अब ये सभी डूब गए हैं। इनके अलावा क्षेत्र में उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर लगाए गए थे। बाढ़ से 27 ट्रांसफार्मर और 20 हजार घरों के 23 हजार मीटर प्रभावित हुए हैं। जानकारों की मानें तो एक ट्रांसफार्मर की लागत 5 लाख रुपये है। इस हिसाब से 27 ट्रांसफार्मर की कुल लागत 1.35 करोड़ रुपये है। इसी तरह एक मीटर की कीमत 1200 रुपये है और इस हिसाब से 2.76 करोड़ रुपये के मीटर खराब हुए हैं। इनके अलावा बिजली के तार, पोल, खंभे और अंडरग्राउंड केबल भी खराब हुए हैं। नगरीय विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अधीक्षण अभियंता अनिल वर्मा के मुताबिक सही आकलन बाढ़ का पानी उतरने के बाद चलेगा।