दिल्ली की एतिहासिक झलकियों के रंग से कुछ अलग...एक रंग धरना-प्रदर्शन का भी रहा है। जी हां हम बात कर रहे हैं जंतर-मंतर की, जहां आपने देश भर से आये प्रदर्शकारियों के लम्बे और कई बार दिलचस्प तरीके से होने वाले धरने को देखा होगा। पिछले साल 10 अक्टूबर के बाद से ही जंतर-मंतर पर शांति थी...ना कोई नारा...ना कोई हड़ताल और ना कोई मांगो वाली पोस्टर और तख्तियां। जंतर-मंतर और बोर्ट क्लब का अपना एक इतिहास रहा है...किसान हो या मजदूर...समाज सेवी हो या राजनैतिक पार्टियां, हक की लड़ाई के लिए देश के दिल पर दस्तक दिल्ली से ही दी जाती रही हैं। आईये नजर डालते हैं कैसे जंतर-मंतर और वोट क्लब पूरे देश के प्रदर्शनकारियों के लिए कर्म स्थली बन गया और आजादी की लड़ाई के बाद सभी बड़े आंदोलन का बिगुल इसी जगह से फूंका गया ।