फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अयोध्या पर पुनर्विचार याचिका, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने गिनाए ये आधार

Mon, 18 Nov 2019 09:29 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 11
अयोध्या मामले में बैठक करती पर्सनल लॉ बोर्ड - फोटो : Social Media
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पुनर्विचार याचिका दायर करेगा। रविवार को बोर्ड कार्यकारिणी की बैठक में मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन भी नहीं लेने का फैसला हुआ। बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी और व मौलाना उमरैन महफूज रहमानी ने बैठक के बाद दावा किया कि दोनों फैसले आम राय से हुए और 30 दिन में याचिका दाखिल कर दी जाएगी।  बोर्ड ने याचिका के लिए ये आधार गिनाए:-
विज्ञापन

2 of 11
सुप्रीम कोर्ट का अयोध्या विवाद पर फैसला - फोटो : Amar Ujala Graphics
आधार नंबर एक: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि बाबर के सेनापति मीर बाकी ने मस्जिद निर्माण कराया था।
विज्ञापन

3 of 11
अयोध्या मामला - फोटो : अमर उजाला
आधार नंबर दो:  मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि 1857 से 1949 तक मस्जिद और अंदरूनी हिस्सों पर मुस्लिमों का कब्जा था।

4 of 11
अयोध्या मामला - फोटो : Amar Ujala
आधार नंबर तीन: बोर्ड के अनुसार, कोर्ट ने यह भी माना कि बाबरी मस्जिद में आखिरी नमाज 16 दिसंबर, 1949 को पढ़ी गई थी।
विज्ञापन

5 of 11
अयोध्या नगरी का एक विहंगम दृश्य। - फोटो : amar ujala
आधार नंबर चार: बोर्ड ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि 22-23 दिसंबर, 1949 की रात मूर्तियां रखी गईं। उनकी प्राण प्रतिष्ठा नहीं हुई लिहाजा देवता नहीं माना जा सकता।
विज्ञापन

6 of 11
अयोध्या - फोटो : amar ujala
आधार नंबर पांच: गुंबद के नीचे रामजन्मभूमि पर पूजा की बात नहीं कही गई, फिर जमीन रामलला विराजमान के पक्ष में क्यों दी गई।
विज्ञापन

7 of 11
अयोध्या जाने वाले वाहनों की चेकिंग करती पुलिस - फोटो : एएनआई
आधार नंबर छह:  कोर्ट ने रामजन्मभूमि को पक्षकार नहीं माना, फिर उसके आधार पर फैसला क्यों दिया?

8 of 11
अयोध्या - फोटो : amar ujala
आधार नंबर सात: कोर्ट ने कहा, मस्जिद ढहाना गलत था। इसके बावजूद मंदिर के लिए फैसला क्यों दिया?

9 of 11
अयोध्याः रामलला की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
आधार नंबर आठ:  कोर्ट ने कहा, हिंदू सैकड़ों साल से पूजा करते रहे हैं, इसलिए जमीन रामलला को दी जाती है, जबकि मुस्लिम भी इबादत करते रहे हैं।

10 of 11
सुप्रीम कोर्ट
आधार नंबर नौ:  वक्फ एक्ट की अनदेखी की गई, जिसके मुताबिक मस्जिद की जमीन बदली नहीं जा सकती।
विज्ञापन

11 of 11
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
आधार नंबर दस: कोर्ट ने यह माना कि किसी मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण नहीं हुआ था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें