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Amartya Sen: बांग्लादेश के हश्र से भारत के नोबेल विजेता अर्थशास्त्री व्यथित; कहा- यूनुस को लंबा सफर तय करना है

Sun, 02 Mar 2025 07:44 PM IST
ज्योति भास्कर पीटीआई, शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल)

सार

बांग्लादेश में उथल-पुथल और हाल के दिनों में वहां की अशांति और सामाजिक हश्र को लेकर पड़ोसी देश भारत चिंता जाहिर कर चुका है। ताजा घटनाक्रम में देश के नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने अपनी व्यथा प्रकट की है। उन्होंने कहा कि देश की अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद यूनुस को हालात सामान्य करने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है।
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अमर्त्य सेन के साझात्कार का अंश - फोटो : अमर उजाला / एजेंसी
भारत के नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने पड़ोसी देश बांग्लादेश की दुर्दशा पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश की स्थिति उन्हें काफी विचलित और परेशान करती है। सेन पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में रहते हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की स्थिति ठीक करने और राजनीतिक-सामाजिक गतिरोध दूर करने के लिए मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को अभी लंबा रास्ता तय करना है।
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अमर्त्य सेन के साझात्कार का अंश - फोटो : अमर उजाला / एजेंसी
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को लंबा रास्ता तय करना है
जुलाई-अगस्त, 2024 के बाद बांग्लादेश में उपजे हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने कहा, उन्हें इस बात की चिंता है कि देश चुनौतियों से कैसे निपटेगा। बकौल सेन, उनके मित्र और पड़ोसी देश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं, लेकिन गतिरोध दूर करने के लिए उन्हें अभी लंबा रास्ता तय करना है।
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अमर्त्य सेन के साझात्कार का अंश - फोटो : अमर उजाला / एजेंसी
धर्मनिरपेक्षता के प्रति सराहनीय प्रतिबद्धता बरकरार रखे बांग्लादेश
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में शांतिनिकेतन स्थित अपने घर पर विशेष साक्षात्कार के दौरान सेन ने कहा,बांग्लादेश की स्थिति ने उन्हें बहुत प्रभावित किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश ने जमात जैसी सांप्रदायिक ताकतों को काफी हद तक काबू में रखा है। देश को धर्मनिरपेक्षता के प्रति सराहनीय प्रतिबद्धता बरकरार रखनी चाहिए।

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अमर्त्य सेन के साझात्कार का अंश - फोटो : अमर उजाला / एजेंसी
बांग्लादेश अपनी मौजूदा चुनौतियों से कैसे निपटेगा?
उन्होंने कहा, बांग्लादेश की स्थिति से विचलित होने का कारण है, क्योंकि मेरी पहचान बंगाली होने की मजबूत भावना से जुड़ी है। सेन ने कहा, 'मैंने ढाका में बहुत समय बिताया है और वहीं से अपनी स्कूली शिक्षा शुरू की है। ढाका के अलावा, मैं अक्सर मानिकगंज में अपने पैतृक घर जाता था। मां की जड़ों से जुड़े बिक्रमपुर, विशेष रूप से सोनारंग नियमित रूप से जाता था। इन स्थानों का मेरे लिए गहरा व्यक्तिगत महत्व है। कई अन्य लोगों की तरह, मैं इस बात को लेकर चिंतित हूं कि बांग्लादेश अपनी मौजूदा चुनौतियों से कैसे निपटेगा।'
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अमर्त्य सेन के साझात्कार का अंश - फोटो : अमर उजाला / एजेंसी
सरकार विरोधी रुख अपनाने के बावजूद समाचार पत्र 'अपेक्षाकृत स्वतंत्र'
बांग्लादेश ने बड़े आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन को रेखांकित करते हुए सेन ने कहा, महिलाओं के अधिकारों को आगे बढ़ाने में, सरकारी और BRAC जैसे गैर-सरकारी संगठनों और ग्रामीण बैंक ने उल्लेखनीय योगदान दिए हैं। बदलाव का एक अहम पहलू यह भी है कि बांग्लादेश में समाचार पत्र 'अपेक्षाकृत स्वतंत्र' बने हुए हैं, जिनमें से कई सरकार विरोधी रुख अपनाने के बावजूद फल-फूल रहे हैं।

बंगाल से अमर्त्य सेना का रिश्ता
गौरतलब है कि सेन के बचपन का अधिकांश हिस्सा ढाका में बीता है। उन्होंने अपनी औपचारिक शिक्षा सेंट ग्रेगरी स्कूल से शुरू की। बाद में वे शांतिनिकेतन चले गए और देश के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के स्कूल में पढ़ाई की। बाद के दिनों में अर्थशास्त्र में योगदान के लिए साल 1998 में अमर्त्य सेन को भी नोबेल से नवाजा गया।
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अमर्त्य सेन के साझात्कार का अंश - फोटो : अमर उजाला / एजेंसी
बांग्लादेशी सेना और राजनीति पर भी बोले
अमर्त्य सेन ने कहा, कई अन्य देशों में सैन्य शासन स्थापित हो चुके हैं, लेकिन बांग्लादेशी सेना ने ऐसा नहीं किया। वे इस बात के लिए प्रशंसा के पात्र हैं। उन्होंने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ आगाह भी किया। सेन ने कहा, प्रतिबंध लगाने जैसा कदम उन्हीं गलतियों को दोहराएगा, जिनका आरोप अन्य दलों ने अवामी सरकार पर लगाया था। बकौल सेन, बांग्लादेश की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यहां एक व्यापक दृष्टिकोण और मिलकर काम करने की जरूरत है।

बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्षता: मोहम्मद यूनुस को क्या करना चाहिए?
अगस्त, 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़कर भागने के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार बने मुहम्मद यूनुस के बारे में अमर्त्य सेन ने कहा, 'यूनुस मेरे पुराने मित्र हैं। मैं जानता हूं कि वे अत्यधिक सक्षम हैं और कई मायनों में एक असाधारण इंसान हैं। उन्होंने बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता के बारे में मजबूत बयान दिए हैं।'
हालांकि, अगर आप अचानक किसी देश के प्रमुख बन जाते हैं, तो आपको विभिन्न गुटों पर विचार करना चाहिए। देश में इस्लामी पार्टियों के अलावा भी अब हिंदू गुट भी हैं। मुझे यूनुस की क्षमताओं पर पूरा भरोसा है।
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अमर्त्य सेन के साझात्कार का अंश - फोटो : अमर उजाला / एजेंसी
अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों और मंदिरों में तोड़फोड़ से जुड़े सवाल पर भी जवाब दिए। अमर्त्य सेन ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कहा, इस तरह की हिंसा को रोकना सरकार और जनता दोनों की जिम्मेदारी है। बकौल सेन, 'यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि बांग्लादेश ने ऐतिहासिक रूप से अल्पसंख्यकों के साथ अपने व्यवहार और जमात जैसी सांप्रदायिक ताकतों को नियंत्रित करने के अपने प्रयासों पर गर्व किया है। दुर्भाग्य से, भारत में भी मस्जिदों पर हमले हुए हैं। ये घटनाएं, चाहे बांग्लादेश में हों या भारत में, रुकनी चाहिए।'

सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने से आसान कोई काम नहीं
सांप्रदायिकता के प्रति आगाह करते हुए सेन ने कहा, 'कुछ घटनाओं को चुनिन्दा तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर पेश करके सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने से आसान कोई काम नहीं है। इसी तरह 1940 के दशक में हिंदू-मुस्लिम दंगे बढ़े। जमकर खून-खराबा हुआ। हमें अपने अतीत पर विचार करना चाहिए और उसी के आलोक में अपने भविष्य पर विचार करना चाहिए। चुनिंदा प्रचार बेहद खतरनाक हो सकता है।
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