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जीएसटी से महंगी होंगी जीवन रक्षक दवाएं

Fri, 30 Jun 2017 05:27 PM IST
संदीप राय
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एक जुलाई से पूरे देश में एक समान वाले वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी लागू होने से सरकार द्वारा कीमत नियंत्रण के अंतर्गत आने वाली दवाएं महंगी हो जाएंगी। इंडियन ड्रग्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईडीएमए) के महासचिव दारा पटेल का कहना है कि नियंत्रित कीमत वाली दवाएं करीब 2.3 प्रतिशत महंगी हो जाएंगी। ऐसी दवाओं में कई जीवनरक्षक दवाएं भी शामिल हैं, हालांकि इनमें से कुछ पर सरकार ने टैक्स घटा कर पांच प्रतिशत कर दिया है और वो सस्ती हो जाएंगी।
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कंपनियां उठाएंगी भार
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि जीएसटी के लिए फार्मा इंडस्ट्री तैयार है और दवाओं की वैसी कोई किल्लत नहीं होने वाली है जैसा कि आशंका जताई जा रही है। हालांकि अभी डिस्ट्रीब्यूटर के बाद की कडी में आने वाले स्टॉकिस्ट पूरी तरह जीएसटी के लिए खुद पंजीकृत नहीं हो पाए हैं। दारा पटेल का कहना है, "इसलिए आईडीएमए ने फैसला किया है नियंत्रण से बाहर वाली दवाओं पर पडने वाले बढ़े टैक्स का भार फार्मा कंपनियां उठाएंगी। दवा निर्माता कंपनियों में इस बात पर सहमति बनी है।"

फार्मा कंपनियों ने बढ़े टैक्स के आधार पर एमआरपी बढाने की सरकार से मांग भी की थी। लेकिन सरकार ने केवल नियंत्रित दामों वाली दवाओं पर ही इसकी इजाजत दी है।
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अभी दवाओं पर करीब 9 प्रतिशत टैक्स लगता है जोकि जीएसटी लागू होने के बाद 12 प्रतिशत हो जाएगा।
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छोटे शहरों में हो सकती है किल्लत

राजस्थान फार्मास्यूटिकल मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव सुभाष मल्होत्रा कहते हैं, "चूंकि फार्मा कंपनियां को दवाओं के दाम बढाने की सरकार ने इजाजत नहीं दी है इसलिए कीमतों पर कोई फर्क नहीं पडेगा।"
ऐसी भी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि खुदरा बाजार में दवाओं की किल्लत हो सकती है।
सुभाष मल्होत्रा के मुताबिक, 'छोटे शहरों और कस्बों में वो स्टॉकिस्ट खुदरा दुकानदारों को दवाएं नहीं दे पाएंगे, जबतक जीएसटी के अंतर्गत पंजीकृत नहीं हो जाते। ऐसे स्टॉकिस्टों की संख्या दूर दराज के इलाकों में अभी भी काफी है।'
उनके अनुसार, सरकार ने अधिसूचित जिन दवाओं पर टैक्स को पांच प्रतिशत तक सीमित कर दिया है, उनकी बहुत थोड़ी ही संख्या है, "फिर इन दवाओं के दामों में चार प्रतिशत तक की कमी तो आएगी ही।"
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