फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

AAIB Report: ईंधन स्विच, पायलट की गलती और विमान में खराबी... इन तमाम सवालों पर विशेषज्ञ क्या सोचते हैं? जानिए

Sun, 13 Jul 2025 05:12 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।

सार

अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया विमान हादसे को एक महीना पूरा हो चुका है। अब एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट भी आ चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक एअर इंडिया के बोइंग ड्रीमलाइनर विमान- बी787-8 के दोनों इंजन टेकऑफ के एक सेकेंड के भीतर बंद हो गए। अब इस पहलू पर विशेषज्ञ अपनी समझ साझा कर रहे हैं।
विज्ञापन
1 of 5
एअर इंडिया विमान हादसे से ठीक पहले खुला फ्लाइट का RAT - फोटो : एएआईबी रिपोर्ट
गुजरात के मेघाणीनगर में बीते 12 जून को एअर इंडिया विमान एआई  171 क्रैश होने के बाद 260 लोगों की मौत हुई। हादसे के एक महीने बाद अब इस बिंदु पर चर्चाएं हो रही हैं कि फ्लाइट टेकऑफ के एक सेकेंड के भीतर कैसे इस अत्याधुनिक बोइंग विमान के दोनों इंजन एकसाथ बंद हो गए। विशेषज्ञों की राय है कि ईंधन स्विच बंद होने के जिस पहलू पर बात हो रही है, वह तकनीकी खामी भी हो सकती है। पायलटों की गलती की बात पर एक विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसा दावा करना गलत है। बता दें कि दोनों अनुभवी पायलटों- सुमित सभरवाल और क्लाइव कुंदर की हादसे में मौत हो चुकी है। इसके अलावा एक अन्य विशेषज्ञ का मानना है कि एक ही समय में दोनों इंजनों का फेल होना बेहद असामान्य घटना है, इसलिए इसकी विस्तार से जांच जरूरी है। आइए जानें, किस विशेषज्ञ ने क्या कहा?
विज्ञापन

2 of 5
एएआईबी रिपोर्ट के अंश - फोटो : अमर उजाला
विमान में खराबी से अपने आप बंद हुआ ईंधन स्विच
उड़ान भरते समय विमान के दोनों इंजनों को ईंधन की आपूर्ति अप्रत्याशित रूप से बंद हो गई थी। मैंने जो रिपोर्ट देखी है, उसके अनुसार विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का कोई और कारण नहीं था। ऐसा लगता है कि उड़ान भरते समय ईंधन बंद हो गया था। वॉइस रिकॉर्डर से स्पष्ट है कि न तो पायलट और न ही सह-पायलट ने ईंधन स्विच बंद किया था। यह स्पष्ट रूप से विमान में ही कोई खराबी थी, जिसके कारण ईंधन स्विच अपने आप बंद हो गया। बोइंग विमान की यह पहली घटना नहीं है। ऐसी दो घटनाएं पहले भी सामने आई हैं, जब बोइंग के दो नए विमान उड़ान भरने के बाद हादसे का शिकार हो गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई। दोनों मामलों में ही यह बात सामने आई कि 737 के अधिकतम वैरिएंट में बदलाव किए गए हैं और विमान उड़ाने वाले पायलटों को स्थिति की जानकारी नहीं थी। बोइंग ने जानबूझकर प्रशिक्षण नहीं दिया, क्योंकि प्रशिक्षण में पैसा खर्च होता है और उन्हें इसका खर्च वहन करना पड़ता है।
सनत कौल, विमान विशेषज्ञ 
विज्ञापन

3 of 5
एएआईबी की जांच रिपोर्ट के अंश - फोटो : अमर उजाला
पायलटों की ओर से इंजन बंद करने का दावा गलत
जेट ईंधन स्विच को गलती से सक्रिय नहीं किया जा सकता है, न ही यह किसी खराबी के कारण हिल सकता है। जब विमान क्रैश हुआ तो स्विच रन स्थिति में था। मेरे लिए एएआईबी की रिपोर्ट केवल यह कहने में निर्णायक है कि दुर्घटना दोनों इंजनों में ईंधन की आपूर्ति रुकने की वजह से हुई। पायलटों ने उड़ान भरने के 3 सेकंड बाद इंजन बंद कर दिए, यह दावा पूरी तरह से गलत है। यह संभव नहीं है कि स्विच अपने आप एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकें। यह स्पष्ट है कि विमान में कोई तोड़फोड़ नहीं हुई थी और न ही ईंधन में कोई मिलावट थी। कोई फ्लैप गलत कॉन्फिगरेशन नहीं था, विमान के रखरखाव में कोई समस्या नहीं थी।
एहसान खालिद, विमान विशेषज्ञ 

4 of 5
एअर इंडिया विमान हादसे के बाद का मंजर - फोटो : एएनआई
एक ही समय पर दोनों इंजन फेल होना, बेहद असामान्य
अब भी कई संदेह और सवाल हैं। बड़ा सवाल यह है कि दोनों इंजन कैसे फेल हो गए? रैम एयर टर्बाइन एक्टिवेट होना संकेत देता है कि दोनों इंजन व इलेक्ट्रिक सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुके थे। बोइंग 787 विमान के मैनुअल के अनुसार, अगर दोनों इंजन बंद हो जाएं तो उन्हें दोबारा चालू करने के लिए लीवर को हाथ से मूव करना पड़ता है। मेरी समझ के मुताबिक, उड़ान भरने के तुरंत बाद ही दोनों इंजन फेल हो गए। पायलट ने ‘मेडे’ कॉल दी और इंजन दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश की। जब तक पूरी जांच और अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक कहना मुश्किल है कि वास्तव में क्या हुआ। लेकिन एक ही समय पर दोनों इंजन फेल होना, बेहद असामान्य है और इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
संजीव कपूर, एयर मार्शल (सेवानिवृत्त)
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
एअर इंडिया का विमान दुर्घटनाग्रस्त - फोटो : अमर उजाला
भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट ने तथ्यों और स्पष्टता पर कही यह बात
एएआईबी का यह कर्तव्य और जिम्मेदारी है कि वह प्रारंभिक रिपोर्ट पेश करे। उन्होंने 30 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर इसे प्रस्तुत भी किया है। रिपोर्ट अधिकांश तथ्यात्मक है, लेकिन मेरी राय में, कुछ ऐसे बिंदु हैं जो कुछ हद तक अस्पष्ट हैं। विशेष रूप से, मैं कुछ ऐसा देखना पसंद करता जो समय-सीमा की व्याख्या करता। मसलन किस चरण में क्या हुआ? दोनों इंजनों के फेल होने पर पायलटों के बीच स्पष्ट बातचीत कब हुई? मेडे कॉल कब हुआ? इनके जवाब मिलने से रिपोर्ट थोड़ी और तथ्यात्मक और स्पष्ट हो जाती। इसमें वह अस्पष्टता भी कम होती जो हम इस समय देख रहे हैं।
कैप्टन शरत पनिकर, पूर्व पायलट (भारतीय वायु सेना)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें